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Sunday, April 18th, 2021

बकवास के प्रकाशन को देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण

जेपी ब्रदर्स पब्लिशिंग हाउस  ने तब्लीगी जमात के बारे में गलत बात पर आधारित अपनी मेडिकल पुस्तक  वापस ले ली

प्रकाशक, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी को लिखित माफीनामा भेजेंगे। जमीयत के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज  दरिया गंज दिल्ली  स्थित पब्लिशिंग हाउस में ज़िम्मेदारों से मुलाकात की

आई एन वी सी न्यूज़  
नई  दिल्ली ,

माइक्रो बोइलोजी पुस्तक  के तीसरे संस्करण की धारा 8 में भारत में कोरोना फैलने  के लिए तब्लीगी जमात को जिम्मेदार बताया गया है। इस विवादास्पद पाठ के सामने आने के बाद लोगो में नाराज़गी थी, यह इस वजह से भी कि आधुनिक पीढ़ी को कुछ अप्रासंगिक और निराधार पाठ पढ़ाया जा रहा है, ये एक ऐसी बात है  जो एक समय में संप्रदायवादी पार्टी का एजेंडा रहा है और जिसे देश की अदालतों ने निष्कासित कर दिया था।

 आज नई दिल्ली में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने इस पर चिंता व्यक्त की और मेडिकल किताब में इस तरह के बकवास के प्रकाशन को देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।  मौलाना मदनी के निर्देश पर मौलाना हकीमुद्दीन  कासमी, सचिव जमीयत उलेमा-ए-हिंद के नेतृत्व में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज दोपहर दरिया गंज में जेपी पब्लिशिंग हाउस का दौरा किया और उनसे स्पष्टीकरण मांगा। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि इस पुस्तक का प्रकाशन रोक दिया जाए और इसे जहाँ भी भेजा गया है, वापस ले लिया जाए, और उपरोक्त पाठ को हटाने के बाद ही इसे पुनः प्रकाशित किया जाए। इस के जवाब में वहां मौजूद  अधिकारी ने कहा कि इस पुस्तक का प्रकाशन रोक दिया गया है और नए संस्करण में इस पाठ को हटा दिया गया है। उन्होंने नया और पुराना संस्करण प्रस्तुत किया और यह भी कहा कि वह जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी को माफी पत्र  भी भेजें ताकि इस संबंध में कोई गलतफहमी न हो। इस अवसर पर, मौलाना हकीमुद्दीन  कासमी ने स्पष्ट रूप से कहा कि देश में शांति और व्यवस्था बनाए रखी जानी चाहिए, यह हम सभी की जिम्मेदारी है, इसलिए लिखित रूप में यदि जवाब आप से आता है, तो गलतफहमी काफी हद तक दूर हो जाएगी।


जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रतिनिधिमंडल में अज़ीमुल्लाह सिद्दीकी, मौलाना ज़ियाउल्लाह कासमी, जमीअत उलमा नई दिल्ली के अध्यक्ष  मौलाना क़ासिम नूरी,  मौलाना यासीन जहाज़ी, मौलाना कारी अहमद अब्दुल्ला, मौलाना ग़य्युर कासमी, मौलाना जमाल कासमी, मौलाना इरफान कासमी और अन्य शामिल थे.

 

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