
एमिटी विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश, ग्वालियर द्वारा 16 से 22 जुलाई 2026 तक आयोजित एक सप्ताहीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) “Excellence in Higher Education” के अंतर्गत 20 जुलाई को आयोजित विशेष सत्र में अंतरराष्ट्रीय यूनेस्को लीड ऑथर, डिजिटल डिप्लोमेट, शिक्षा विशेषज्ञ एवं स्वच्छ भारत मिशन के राष्ट्रीय ब्रांड एंबेसडर डॉ. डीपी शर्मा ने “उच्च शिक्षा में सार्वभौमिक मानवीय मूल्य, प्रोफेशनल एथिक्स एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जिम्मेदार उपयोग” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षकों, शोधार्थियों एवं अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों से आए प्रतिभागियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। कार्यक्रम में इंजीनियरिंग, प्रबंधन, विधि, फार्मेसी, जैव प्रौद्योगिकी, वास्तुकला, जनसंचार, पर्यावरण विज्ञान, फैशन प्रौद्योगिकी तथा मानविकी सहित विभिन्न विषयों के शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के समन्वयक प्रोफेसर स्वप्निल राय ने बताया कि इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर लेफ्टिनेंट जनरल वी. के. शर्मा, एवीएसम (सेवानिवृत्त), कुलपति: प्रो. (डॉ.) राजेश सिंह तोमर, उप कुलपति प्रोफेसर (डॉ) एमपी कौशिक ने डॉ शर्मा का स्मृति चिन्ह भेंट एवं शाल उढ़ा कर स्वागत एवं सम्मान किया।
अपने संबोधन में डॉ. शर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 के सफल क्रियान्वयन के लिए केवल तकनीकी दक्षता पर्याप्त नहीं है, बल्कि सार्वभौमिक मानवीय मूल्य, व्यावसायिक नैतिकता (Professional Ethics), उत्तरदायित्व एवं सामाजिक संवेदनशीलता को शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न अंग बनाना होगा। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) उच्च शिक्षा में अभूतपूर्व परिवर्तन ला रही है, किंतु इसका उपयोग सदैव मानव-केंद्रित, पारदर्शी, उत्तरदायी एवं नैतिक सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए।
डॉ. शर्मा ने कहा कि आज विश्व में एआई का प्रभाव शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, न्याय, उद्योग तथा अनुसंधान सहित प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है। यदि इसके उपयोग में नैतिकता, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं मानवीय मूल्यों की अनदेखी की गई तो इसके गंभीर सामाजिक और मानवीय दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं। इसलिए विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल कुशल पेशेवर तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है जो तकनीक का उपयोग मानव कल्याण के लिए करें।
उन्होंने प्रोफेसर्स से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों में सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, उत्तरदायित्व, सामाजिक दायित्व, डिजिटल नैतिकता, संवेदनशीलता तथा मानवीय नेतृत्व जैसे गुणों का विकास करें। उन्होंने कहा कि भविष्य का श्रेष्ठ शिक्षक वही होगा जो तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ विद्यार्थियों को नैतिक निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान करेगा।
डॉ. शर्मा ने अपने व्याख्यान में यह भी कहा कि विश्व स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग के लिए वैश्विक सहयोग, प्रभावी नियामक ढांचे तथा समान नैतिक मानकों की आवश्यकता है, ताकि तकनीकी प्रगति मानवता के लिए वरदान सिद्ध हो और उसके संभावित दुष्प्रभावों को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के साथ एक विस्तृत संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, परिणाम-आधारित शिक्षा (Outcome-Based Education), अनुसंधान उत्कृष्टता, संस्थागत गुणवत्ता आश्वासन, अकादमिक ईमानदारी तथा एआई के जिम्मेदार उपयोग से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रश्नों पर चर्चा हुई।
एमिटी विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित यह फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, अनुसंधान, नवाचार, प्रत्यायन (Accreditation), बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), संस्थागत सामाजिक उत्तरदायित्व (ISR), सामुदायिक सहभागिता तथा मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हो रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने डॉ. डी.पी. शर्मा के प्रेरणादायी व्याख्यान को शिक्षकों एवं शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं भविष्यदृष्टि प्रदान करने वाला बताया।










