Sunday, April 5th, 2020

सूर्यग्रहण और  महाभारत का क्या है सम्बन्ध

आई एन वी सी न्यूज़
रोहतक,

स्वामी परमानन्द धर्मार्थ ट्रस्ट के चेयरमैन पं. विजय कुमार वृजवासी ने बताया कि 26 दिसम्बर पर पड़ने वाला सूर्य ग्रहण साल का आख्रिी ग्रहाण है। इससे पहले 6 जनवरी को 2 जुलाई को दो सूर्य ग्रहण घटित हो चुके है। हालांकि जनवरी और जुलाई को पड़ने वाले ग्रहण को भारत में नहीं देखा गया था। लेकिन 26 दिसम्बर को पड़ने वाले सूर्य ग्रहण को पूरे देश में देखा जाएगा। दिन्दू पंचांगा के मुताबिक पौष मास की अमावस्या को गुरुवार को नई दिल्ली में सुबह 08 बजकर 17 मिनट और 02 सैकेन्ड से 10 बजकर 57 मिनट 09 सेकैन्ड बजे तक घटित होगा। हालांकि ये ग्रहण  अलग-अलग स्थनों पर अलग अलग समय पर दिखाई देगा।

उन्होकि बताया कि भारत के अलावा यह  तथा दक्षिण कोरिया, फिलीपीन, सऊदी अरब, सिंगापुर, पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात, चीन, कंबोडिया, भूटान, बहरीन, रूस, कतर, सोमालिया, थाईलैंड, श्रीलंका, ताइवान, तंजानिया, लाओस, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान आदि जगहों पर दिखाई देगा।


महाभारत में भी सूर्य ग्रहण से जुड़ी एक घटना का उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि महाभारत युद्ध में 3 सूर्यग्रहण होने से भीषण युद्ध हुआ था। इस युद्ध  की शुरुआत सूर्य ग्रहण के साथ हुई थी और युद्ध के आखिरी दिन भी ग्रहण था। वहीं युद्ध के बीच भी एक सूर्यग्रहण हुआ था। दरअसल महाभारत की एक घटना में अर्जुन ने प्रतिज्ञा ली थी कि, वो सूर्यास्त होने से पहले जयद्रथ को मार देंगे या फिर खुद अग्नि में विलीन हो जाएंगे। जयद्रथ को बचाने के लिए कौरवों ने सुरक्षा घेरा बना लिया था, लेकिन उस दिन सूर्यग्रहण हो गया और चारों ओर अंधेरा छा गया। जयद्रथ को लगा कि सूर्यास्त हो गया है, तभी वह अर्जुन के सामने यह कहते हुआ गया कि सूर्यास्त हो गया है तुम अग्निसमाधी लो। लेकिन विधि को कौन बदल सकता है उसी समय सूर्य ग्रहण खत्म हो गया और सूर्य की चमकती किरणें उस पर पड़ी और तभी अर्जुन ने जयद्रथ का वध कर दिया।

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