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Tuesday, October 27th, 2020

कृषि विधेयक नहीं ये है किसानों के लिए काला क़ानून 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कृषि बिलों को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है.राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों को पूंजीपतियों का गुलाम बना रहे हैं, जिसे देश कभी सफल नहीं होने देगा. उन्होंने कहा, मोदी सरकार के कृषि-विरोधी ‘काले कानून’ से किसानों को APMC/किसान मार्केट खत्म होने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य कैसे मिलेगा? इस बिल में MSP की गारंटी क्यों नहीं दी जा रही है. राज्यसभा में रविवार को दो बिलों को पेश किया गया है. लोकसभा से ये बिल पहले ही पास हो चुके हैं.  कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, बसपा और अकाली दल समेत कई पार्टियां इस बिल का विरोध कर रही हैं.

 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कृषि बिलों को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है. राहुल गांधी ने ट्वीट करके इन बिलों पर मोदी सरकार को घेरा है. राज्यसभा में रविवार को इन बिलों को पेश किया गया है.

इन बिलों को लेकर बीजेपी की अगुआई वाली एनडीए में फूट पड़ चुकी है. बीजेपी की सबसे पुरानी सहयोगी अकाली दल और मोदी कैबिनेट में केंद्रीय मंत्री रहीं हरसिमरत कौर इन बिलों के विरोध में इस्तीफा दे चुकी हैं. वहीं टीआरएस के प्रमुख और तेलंगाना के सीएम केसी राव ने अपनी पार्टी के सांसदों से इन विधेयकों का विरोध करने और खिलाफ में वोट करने को कहा है.

सरकार बिलों को बता रही क्रांतिकारी

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020 और कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020 आज राज्यसभा में पेश किया. उन्होंने कहा कि ये बिल किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले हैं.

केजरीवाल- ब्रायन भी विरोध में

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने भी कृषि बिलों का विरोध किया है और इनके खिलाफ राज्यसभा में गैर बीजेपी दलों से वोट करने का आह्वान किया है. अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, 'आज पूरे देश के किसानों की नजर राज्य सभा पर है. राज्य सभा में भाजपा अल्पमत में है. मेरी सभी ग़ैर भाजपा पार्टियों से अपील है कि सब मिलकर इन तीनों बिलों को हरायें, यही देश का किसान चाहता है.'

 यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीम मायावती ने भी कृषि बिलों के खिलाफ विरोध जताया था. मायावती ने कहा था कि लोकसभा में किसानों से जुड़े दो बिल, उनकी सभी शंकाओं को दूर किए बिना ही पास कर दिए गए हैं. उससे बसपा कतई भी सहमत नहीं है. पूरे देश का किसान क्या चाहता है? इस ओर केंद्र सरकार जरूर ध्यान दे तो यह बेहतर होगा.

दोगुनी नहीं होगी किसानों की आय

वहीं तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने राज्यसभा में कृषि बिलों का विरोध किया. उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का वादा करती है. लेकिन मैं बता दूं कि किसानों की आय 2028 तक दोगुनी नहीं हो सकती है. ये सरकार सिर्फ वादा करती है. दो करोड़ नौकरी कहां हैं?

कांग्रेस के सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस बिल का विरोध करती है. पंजाब और हरियाणा के किसानों का मानना है कि ये बिल उनकी आत्मा पर हमला है. इन विधेयकों पर सहमति किसानों के डेथ वारंट पर हस्ताक्षर करने जैसा है. किसान एपीएमसी और एमएसपी में बदलाव के खिलाफ हैं. PLC.

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