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Thursday, May 6th, 2021

तपेश शर्मा की तीन कविताएँ

तपेश शर्मा की तीन कविताएँ
1. उम्मीद करता हूँ ! जिस बच्चे ने पिछले साल , हर दिन बिना कचरा , उम्मीद करता हूँ उसका नया साल हो । जिस बेटी को पिछले साल , गर्भ में ही मार दिया गया , उम्मीद करता हूँ उसका नया साल हो । जिस बूढ़े बाप को पिछले साल , खुद ही के घर से बेघर किया गया , उम्मीद करता हूँ उसका नया साल हो । जिस माँ ने पिछले साल , जवान बेटे की अर्थी खुद की आँखो से देखी , उम्मीद करता हूँ उसका नया साल हो । जिस बहु को पिछले साल , ससुराल में दहेज़ की खातिर ज़लील किया गया , उम्मीद करता हूँ उसका नया साल हो । जिस व्यक्ति ने पिछले साल , भूकंप में अपने पुरे परिवार को खोया , उम्मीद करता हूँ उसका नया साल हो । जिस लड़की की पिछले साल , चलती गाडी में इज़्ज़त लूटी गयी , उम्मीद करता हूँ उसका नया साल हो । जिन परिवार के बच्चों को , स्कूल में ही गोलियों से भून दिया गया था , उम्मीद करता हूँ उसका नया साल हो । जिन जिन लोगो ने पिछले साल , अपनी उम्मीद को दफना दिया था , उम्मीद करता हूँ की उस उम्मीद का नया साल हो ।
2. नया क्या ? सूर्योदय वही , धूप वही , कपड़े वही , शरीर वही , बाहर से सब कुछ वैसा ही , जैसा कल रात सोने से पहले था । मैं वही , तुम वही , फिर नया क्या ? नया कैलेंडर नए साल का | कैलेंडर की तारीखे वही , मौसम वही , त्यौहार वही । तो नया क्या ? नया कैलेंडर नयी उम्मीद के साथ, नयी उम्मीद नयी खुशियो की । ये खुशिया उन सपनो की , जो पिछले साल पुरे ना हो सके । ये सपने खुद को वहा देखने की , जहा पिछले साल पहुँच ना पाया । सपने वही , खुद वही , बस नए साल के रास्ते नए । मैं वही , तुम वही , फिर नया क्या ? नया कैलेंडर ! बस नया कैलेंडर । नज़रे वही बस नजरिया नया !!!
3. कुछ समझ नहीं आ रहा ! क्या लिखू , क्या ना लिखू , कुछ समझ नहीं आ रहा | लिखू उस उगते हुए सूरज की उम्मीद भरी रौशनी पर , या उन प्यारे तारो से भरी रात के चमकते चाँद पर लिखू ? कुछ समझ नहीं आ रहा || उस छोटे बच्चे की ख़ुशी पर लिखू जिसने आज नयी साईकिल खरीदी है | या उस माँ के दर्द पर लिखू , जिसके बेटे का खून सड़क पर अब भी चिपका पड़ा है ? कुछ समझ नहीं आ रहा || लिखू उस बहिन की मुस्कान के बारे में , जब राखी पर उसने अपना उपहार देखा | या उस बाप की शर्म पर लिखू  , जिसकी बेटी अफसर बनी है , और उसने इसे अपनी पत्नी की कोख में ही मारने का सोचा था ? कुछ समझ नहीं आ रहा || लिखू उस पिल्ले की बेचैनी को , अकेला वो बैठा है , जिसकी माँ उसके लिए खाना लाने गयी है | या उस बिल्ली की पीड़ा पर लिखू !
tapesh-sharma-poet-tapesh-sharma-poem-of-tapesh-sharma-परिचय : -  तपेश शर्मा युवा कवि 
योग्यता : बी.कॉम तृतीय वर्ष
जन्म तिथि : 05 जनवरी 1996
रूचि : लेखन
संपर्क : 09571755331 ,
tapesh9571@gmail.com

Comments

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Users Comment

Tapesh sharma, says on January 2, 2015, 1:25 PM

it seems adulating khush..by the way thanks :)

Khushvendar Singh Rathore, says on January 1, 2015, 11:13 PM

Achi hai kavitaye. Ab garv se hum bhi kahenge. Vo Dekho Kavi Samrat Tapesh humare Senior the.