‘…..के भूत’ बातों से नहीं मानते

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–  तनवीर जाफरी –

tanveerjafritanvirjafriतनवीर-जाफरीपिछले दिनों जम्मु-कश्मीर राज्य के ऊधमपुर में एक बार फिर स्थानीय लोगों के सहयोग से भारतीय सुरक्षा बलों को पाकिस्तान से सीमा पार कर भारत में प्रवेश करने वाले एक आतंकवादी को जीवित गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हाथ लगी। गिरफ्तार आतंकवादी कासिम उर्फ नावेद ने स्वयं को फैसलाबाद का निवासी बताया है। ऊधमपुर में सुरक्षा बलों से हुई मुठभेड़ में मोहम्मद नोमान नामक जो आतंकी मारा गया है उसकी भी शिनाख्त पाकिस्तान के बहावलपुर के निवासी के रूप में हो चुकी है। परंतु एक बार फिर पाकिस्तान ने इन आतंकियों को अपना नागरिक मानने से इंकार कर दिया है। बावजूद इसके कि जीवित गिरफ्तार आतंकी स्वयं को पाकिस्तान के फैसलाबाद से आया हुआ बता रहा है और दूसरे अन्य मृतक आतंकी को भी अपने साथ आया हुआ आतंकी बता रहा है। इसके बावजूद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद काज़ी ख़लीलुल्ला फरमा रहे हैं कि-‘पाकिस्तान पर एकदम से आरोप लगा देना ठीक नहीं है। इस तरह की बातें तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। हम उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तान पर आरोप लगाए जाते हैं तो इसके लिए सुबूत भी होने चाहिए’।

पाकिस्तान द्वारा भारत में आतंकी गतिविधियां फैलाने के लिए इन्हें सुरक्षित सीमा पार कराना तथा भारत में हिंसा का नंगा नाच करने हेतु इन्हें सहायता देना हालांकि कोई नई बात नहीं है। अनेक बार ऐसा हो चुका है कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी भारत आए। यहां आकर उन्होंने बड़ी से बड़ी आतंकी कार्रवाई अंजाम दी। कभी धर्मसथलों पर हमला किया तो कभी मुंबई में 26/11 जैसी दु:स्साहिक घटना अंजाम दी तो कभी भारतीय संसद को निशाना बनाया। और हर बार पाक प्रायोजित यह आतंकी सुरक्षा बलों के हाथों मौत के घाट उतारे गए। यहां तक कि मुंबई के 26/11 हमले में शामिल अजमल क़साब नामक आतंकी को तो जि़ंदा दबोच लिया गया। आतंकी अजमल कसाब ने भी सवयं को पाकिस्तानी नागरिक स्वीकार किया था। उस समय भी पाकिस्तान की ओर से अधिकृत रूप से अजमल क़साब से यही कहकर पल्ला झाडऩे की कोशिश की गई कि क़साब पाकिस्तान का नागरिक नहीं है। जबकि पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने ही उस समय स्वयं यह स्वीकार किया था कि अजमल क़साब पाकिस्तान का ही रहने वाला है। पाकिस्तान की मीडिया टीम ने भी क़साब के फरीदकोट (ओकारा) स्थित घर व उसके रिश्तेदारों को ढंूढ निकाला था। इसी प्रकार 13 दिसंबर 2001 में संसद भवन पर हुए हमले में मारे गए पाकिस्तान से आए लश्करे तैयबा व जैश-ए-मोहम्मद के हमज़ा हैदर उर्फ तुफैल,राणा, राजा तथा मोहम्मद आदि को पाकिस्तान ने अपना नागरिक मानने से इंकार किया था। यहां तक कि इनकी लाशों को भी पाकिस्तान ने स्वीकार नहीं किया।

सवाल यह है कि पाकिस्तान भारत में अशांति फैलाने के अपने दुष्प्रयास कब तक यूंही जारी रखेगा और कब तक इस प्रकार से अघोषित युद्ध लड़ता रहेगा? अपनी इन्हीं घटिया व हिंसा को बढ़ावा देने वाली करतूतों की बदौलत पाकिस्तान की गिनती दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में की जाने लगी है। लश्कर-ए-तैयबा व जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को पनाह देते-देते पाकिस्तान तहरीक-ए-तालिबान के शिकंजे में आ गया है। और अब तो वहां आईएसआईएस के आतंकियों की दस्तक भी सुनाई देने लगी है। सत्ता से लेकर धार्मिक संस्थाओं तक तथा सेना,न्यायपालिका व आईएसआई तक में चरमपंथी विचारधारा रखने वालों की घुसपैठ गहरी हो चुकी है। पाकिस्तान स्थित आतंकियों ने तो अब छोटे-मोटे हमले करने अथवा एक-दो लोगों की जानें लेने के बजाए सामूहिक हत्याकांड करने,मस्जिदों,स्कूलों व बाज़ारों में दर्जनों लोगों को इक_ा कत्ल करने जैसे दहशतनाक मंसूबों पर अमल करना शुरु कर दिया है। और तो और अब पाक स्थित आतंकी संगठन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर सीधेतौर पर पाक सेना को ही चुनौती देने की स्थिति में आ चुके हैं। 16 दिसंबर 2014 पेशावर में तहरीक-ए-तालिबान ने आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमला कर 145 लोगों की हत्या की थी। जिनमें 132 बच्चे शामिल थे। शेष 13 अध्यापक व स्कूल स्टाफ के सदस्य थे। सभी मृतक बच्चे पाकिस्तान के सैनिकों व सैन्य अधिकारियों के बच्चे थे। इस घटना ने पूरे विश्व को हिलाकर रख दिया था। आिखर ऐसी घटना का कारण क्या था? और इस बात की भी क्या गारंटी है कि पाकिस्तान में भविष्य में ऐसी या इससे बड़ी घटना नहीं घट सकती है? दरअसल ऐसी घटनााओं का कारण ही यही है कि पाकिस्तान केवल भारत में अशांति फैलाने की खातिर ज़हरीले सांपों को दूध पिलाता आ रहा है। और अब वही ज़हरीले सांप इस कद्र बढ़ चुके हैं कि स्वयं पाकिस्तान के काबू से बाहर हो गए हैं। अब उनकी नज़रें पाकिस्तान की सत्ता पर तथा वहां के सैन्य साज़ो-सामान पर जा टिकी हैं। परंतु पाकिस्तानी शासक अपनी हरकतों से बाज़ आने के बजाए और अपने पिछले किए गए गुनाहों से तौबा करने के बजाए अब भी आतंकवादियों को पालने-पोसने,उन्हें संरक्षण देने तथा सीमा पर अपने सहयोग से उन्हें भारत में धकेलने तथा यहां आकर आतंकी कार्रवाई अंजाम दिलाने के एक सूत्रीय मिशन पर लगे हुए हैं। और आश्चर्य की बात तो यह है कि जब कभी अजमल क़साब या कासिम उर्फ नावेद जैसा आतंकी भारत में धर दबोचा जाता है उस समय पाकिस्तान इन्हें अपना नागरिक मानने से ही मुकर जाता है। यहां तक कि अपने नागरिक आतंकियों की लाशें लेने तक से इंकार कर देता है?

भारत में पाकिस्तान द्वारा आतंकियों की घुसपैठ कराई जाती है या यहां होने वाले अधिकांश आतंकी हमलों में पाकिस्तान शामिल रहता है यह आरोप मात्र आरोप ही नहीं होते या केवल भारत सरकार या भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा ही ऐसे आरोप नहीं लगाए जाते बल्कि जिस प्रकार नवाज़ शरीफ ने अजमल क़साब को पाकिस्तान का नागरिक स्वीकार किया था ठीक उसी प्रकार पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी अर्थात् एफआईए के पूर्व प्रमुख ने भी पिछले दिनों अपने एक लेख में यह स्वीकार किया कि 2008 में मुंबई में हुए हमलों की योजना पाकिस्तान में ही बनाई गई थी और पाकिस्तान से ही इन हमलों को संचालित किया गया था। एफआईए के पूर्व प्रमुख तारिक खोसा ने अपने लेख में स्पष्ट रूप से यह लिखा है कि पाकिस्तान को मुंबई हमलों के परिणामों से निपटना होगा और सच का सामना करना होगा तथा अपनी गलतियों को भी मानना होगा। खोसा ने यह भी लिखा है कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों को यह बात सुनिश्चित करनी होगी कि इस हमले को अंजाम देने वालों को कानून के कठघरे तक लाया जाए क्योंकि यह मामला काफी समय से लटका हुआ है। गौरतलब है कि नवंबर 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले में 166 लोग मारे गए थे। मृतकों में कई विदेशी भी शामिल थे। पाकिस्तान ने इन हमलों के लिए किसी प्रकार की जि़म्मेदारी लेने से इंकार किया था। जबकि मुंबई हमलों के कुछ ही दिनों बाद तारिक खोसा को ही संघीय जांच एजेंसी का मुखिया बनाया गया था। परंतु पाकिस्तान अभी तक मुंबई हमलों के दोषियों को पर्याप्त सुबूतों के अभाव के बहाने सज़ा नहीं दे पा रहा है। और तो और इन हमलों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने वाले लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर ज़की-उर-रहमान लखवी को पाकिस्तान उच्च न्यायालय ने ज़मानत पर भी रिहा कर दिया था।

भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ सहअस्तितव के वातावरण में रहना चाहता है। परंतु पाकिस्तान भारत की इन भावनाओं को या तो समझना नहीं चाहता या फिर इसे भारत की कमज़ोरी के रूप में देखने की गलतफहमी पाले हुए है। चाहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा बस में बैठकर लाहौर जाने की बात हो या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान सहित सार्क देशों के प्रमुखों को आमंत्रित करने की बात हो। हर जगह भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ सौहार्द्रपूर्ण वातावरण को बढ़ावा देता हुआ ही नज़र आया है। परंतु पाकिस्तान ने जवाब में भारत को कभी कारगिल घुसपैठ भेंट की तो कभी मुंबई हमले, संसद पर हमला तथा देश के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों को अपवित्र करने जैसे दुष्प्रयास किए। ऐसा प्रतीत होता है कि पाकिस्तान बार-बार भारत को उकसा कर भारत के धैर्य की परीक्षा लिए जा रहा है। परंतु पाकिस्तान को यह भी समझना चाहिए कि भारत के जो नागरिक पाकिस्तान के साथ खासतौर पर वहां के आम नागरिकों के साथ मधुर संबंध बनाए रखना चाहते हैं उन्हीं भारतीय नागरिकों का धैर्य अब लगभग जवाब दे चुका है। ऐसा न हो कि न चाहते हुए भी भारत को सैन्य कार्रवाई का सहारा लेना पड़े क्योंकि बार-बार की जाने वाली पाकिस्तान की उकसावे की कार्रवाई से तो ऐसा ही लगता है कि….के भूत बातों से नहीं मानते।

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Tanveer Jafri

Columnist and Author

Tanveer Jafri, Former Member of Haryana Sahitya Academy (Shasi Parishad),is a writer & columnist based in Haryana, India.He is related with hundreds of most popular daily news papers, magazines & portals in India and abroad. Jafri, Almost writes in the field of communal harmony, world peace, anti communalism, anti terrorism, national integration, national & international politics etc.

He is a devoted social activist for world peace, unity, integrity & global brotherhood. Thousands articles of the author have been published in different newspapers, websites & news-portals throughout the world. He is also a recipient of so many awards in the field of Communal Harmony & other social activities

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1622/11, Mahavir Nagar AmbalaCity. 134002 Haryana

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