Monday, November 18th, 2019
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सुशांत सुप्रिय की कविताएँ

कविताएँ
 1. विडम्बना
कितनी रोशनी है फिर भी कितना अँधेरा है कितनी नदियाँ हैं फिर भी कितनी प्यास है कितनी अदालतें हैं फिर भी कितना अन्याय है कितने ईश्वर हैं फिर भी कितना अधर्म है कितनी आज़ादी है फिर भी कितने खूँटों से बँधे हम ----------०----------
                                 2. विनम्र अनुरोध
जो फूल तोड़ने जा रहे हैं उनसे मेरा विनम्र अनुरोध है कि थोड़ी देर के लिए स्थगित कर दें आप अपना यह कार्यक्रम और पहले उस कली से मिल लें खिलने से ठीक पहले ख़ुशबू के दर्द से छटपटा रही है जो यह मन के लिए अच्छा है अच्छा है आदत बदलने के लिए कि कुछ भी तोड़ने से पहले हम उसके बनने की पीड़ा को क़रीब से जान लें
                             ----------०----------
                                 3. कलयुग
एक बार एक काँटे के शरीर में चुभ गया एक नुकीला आदमी काँटा दर्द से कराह उठा बड़ी मुश्किल से उसने आदमी को अपने शरीर से बाहर निकाल फेंका तब जा कर काँटे ने राहत की साँस ली ----------०----------
                                  4. अंतर महँगे विदेशी टाइल्स और सफ़ेद संगमरमर से बना आलीशान मकान ही तुम्हारे लिए घर है जबकि मैं हवा-सा यायावर हूँ तुम्हारे लिए नर्म-मुलायम गद्दों पर सो जाना ही घर आना है जबकि मेरे लिए नए क्षितिज की तलाश में खो जाना ही घर आना है ----------०----------
                                5. नियति
मेरे भीतर एक अंश रावण है एक अंश राम एक अंश दुर्योधन है एक अंश युधिष्ठिर जी रहा हूँ मैं निरंतर अपने ही भीतर अपने हिस्से की रामायण अपने हिस्से का महाभारत ------------०------------
Sushant-supriy-poems,सुशांत सुप्रियपरिचय -:
सुशांत सुप्रिय
कवि , कथाकार व अनुवादक
शिक्षा: अमृतसर ( पंजाब ) व दिल्ली में । प्रकाशित कृतियाँ : हत्यारे , हे राम, दलदल ( कथा-संग्रह ) । एक बूँद यह भी , इस रूट की सभी लाइनें व्यस्त हैं (काव्य-संग्रह)। सम्मान :  # भाषा विभाग ( पंजाब ) तथा प्रकाशन विभाग ( भारत सरकार ) द्वारा रचनाएँ पुरस्कृत । # कमलेश्वर – कथाबिंब कथा प्रतियोगिता ( मुंबई ) में लगातार दो वर्ष प्रथम पुरस्कार । अन्य प्राप्तियाँ : # कई कहानियाँ व कविताएँ अंग्रेज़ी , उर्दू , पंजाबी , उड़िया , असमिया , मराठी , कन्नड़ व मलयालम आदि भाषाओं में अनूदित व प्रकाशित । #  कहानियाँ कुछ राज्यों के कक्षा सात व नौ के हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल । #  कविताएँ पुणे वि.वि. के बी.ए. ( द्वितीय वर्ष ) के पाठ्य-क्रम में शामिल । #  कहानियों पर आगरा वि.वि. , कुरुक्षेत्र वि.वि. व गुरु नानक देव वि.वि.,अमृतसर के हिंदी विभागों में शोधकर्ताओं द्वारा शोध-कार्य । #  अनुवाद की पुस्तक ” विश्व की श्रेष्ठ कहानियाँ ” प्रकाशनाधीन । # अंग्रेज़ी व पंजाबी में भी लेखन व प्रकाशन । अंग्रेज़ी में काव्य-संग्रह ” इन गाँधीज़ कंट्री ” प्रकाशित । अंग्रेज़ी कथा-संग्रह ” द फ़िफ़्थ डायरेक्शन ” प्रकाशनाधीन ।
# सम्पर्क : मो – 8512070086 ई-मेल: sushant1968@gmail.com
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  आत्म-कथ्य मुझमें कविता है , इसलिए मैं हूँ : सुशांत सुप्रिय ————————————————— कविता मेरा आॅक्सीजन है । कविता मेरे रक्त में है , मज्जा में है । यह मेरी धमनियों में बहती है । यह मेरी हर साँस में समायी है । यह मेरे जीवन को अर्थ देती है । यह मेरी आत्मा को ख़ुशी देती है । मुझमें कविता है , इसलिए मैं हूँ । मेरे लिए लेखन एक तड़प है, धुन है , जुनून है । कविता लिखना मेरे लिए व्यक्तिगत स्तर पर ख़ुद को टूटने, ढहने , बिखरने से बचाना है । लेकिन सामाजिक स्तर पर मेरे लिए कविता लिखना अपने समय के अँधेरों से जूझने का माध्यम है , हथियार है , मशाल है ताकि मैं प्रकाश की ओर जाने का कोई मार्ग ढूँढ़ सकूँ । मेरा मानना है कि श्रेष्ठ कविता शिल्प के आगे संवेदना के धरातल पर भी खरी उतरनी चाहिए । उसे मानवता का पक्षधर होना चाहिए । उसमें व्यंग्य के पुट के साथ करुणा और प्रेम भी होना चाहिए । वह सामाजिक यथार्थ से भी दीप्त होनी चाहिए । कवि जब लिखे तो लगे कि वह केवल अपनी बात नहीं कर रहा , सबकी बात कर रहा है । यह बहुत ज़रूरी है कि कवि के अंदर एक कभी न बुझने वाली आग हो जिससे वह काले दिनों में भी अपने हौसले और संकल्प की मशाल जलाए रखे ।उसके पास एक धड़कता हुआ ‘रिसेप्टिव’ दिल हो ।उसके पास एक ‘विजन’ हो, एक सुलझी हुई जीवन-दृष्टि हो । श्रेष्ठ कवि की कविता कभी अलाव होती है, कभी लौ होती है , कभी अंगारा होती है… ( २०१५ में प्रकाशित मेरे काव्य-संग्रह ” एक बूँद यह भी ” में से )

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