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Thursday, April 22nd, 2021

पूरे विश्व में लग सकता है जयकारा श्री राम का

 तनवीर जाफ़री

सृष्टि के नायक,सर्वव्यापी भगवान श्री राम चन्द्रको मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया है। पूरा विश्व भगवान श्री राम चन्द्र जी को आस्था व सम्मान की नज़रों से देखता है। विश्व के अलग अलग धर्मों व विश्वासों से संबंध रखने वाले अनेकानेक लेखकों व कवियों ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का गुणगान किया है। विश्व के अनेक देशों में भगवान श्री राम के मंदिर देखे जा सकते हैं। परन्तु दुर्भाग्यवश भारत में ही श्री राम चन्द्र जी के नाम का इस्तेमाल आस्था के लिए कम परन्तु राजनीति के लिए अधिक किया जाने लगा है। अन्य धर्मों के लोगों की भगवान राम के प्रति आस्था व सम्मान की तो बात ही क्या करनी स्वयं हिन्दू धर्म में ही श्री राम पर एकाधिकार जताने की होड़ सी मची हुई। ख़ास तौर पर देश के किसी भी राज्य में जब भी चुनाव क़रीब होते हैं उस दौरान  राम के नाम का इस्तेमाल पूरे ज़ोर शोर से किया जाता है। सर्वविदित है कि जब से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संरक्षण में विश्व हिन्दू परिषद ने चार दशक पूर्व अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का आंदोलन चलाया तब ही से उसके राजनैतिक संगठन भारतीय जनता पार्टी ने भगवान राम के नाम पर चुनावी राजनीति करनी शुरू कर दी। बावजूद इसके कि अब सर्वोच्च न्यायालय ने मंदिर निर्माण के रास्ते प्रशस्त कर दिए हैं और अब भगवान राम के नाम पर की जाने वाली राजनीति बंद हो जानी चाहिये परन्तु ठीक इसके विपरीत अभी भी राम नाम का सहारा लेकर चुनावों में बढ़त हासिल करने की कोशिश बदस्तूर जारी है। अंतर केवल इतना है कि अब राम के नाम पर राजनीति राम मंदिर निर्माण संबंधी नारों से नहीं बल्कि भगवान राम के नाम के 'जय कारों' को लेकर की  जाने लगी है।

                              शीघ्र ही आम विधान सभा चुनावों का सामना करने जा रहा राज्य पश्चिम बंगाल आजकल श्री राम के उत्तेजक नारों का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी की ऐसी कोई भी रैली या जन सभा नहीं हो रही जहां उत्तेजना फैलाने के अंदाज़ से 'जय श्री राम' के नारे न लगाये जा रहे हों । गत माह कोलकाता में भारत सरकार द्वारानेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125 जयंती के मौक़े पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्य मंत्री ममता बनर्जी दोनों ही मौजूद थे। यहां भी भाजपा समर्थकों द्वारा 'जय श्री राम' का नारा लगाया गया। ममता बनर्जी  इस से इतना नाराज़ हो गई कि उन्होंने अपना भाषण ही नहीं दिया और प्रधानमंत्री की मौजूदगी में अपनी आपत्ति व नाराज़गी सार्वजनिक रूप से जताई। इस घटना के विषय में जब बी बी सी ने तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सदस्या महुआ मोइत्रा से प्रश्न किया कि -'क्या ममता बनर्जी का 'जय श्री राम' के नारे को लेकर इसतरह अपनी नाराज़गी जताना ठीक था? इस पर उनका जवाब था कि-" उन्होंने जो किया वो बिल्कुल सही था। ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं। और जिस कार्यक्रम में वो शामिल हो रही थीं, वह केंद्र सरकार का कार्यक्रम था। केंद्र सरकार चाहती है तो संविधान में संशोधन करे, उनके पास बहुमत है. 'सेक्युलर' शब्द को संविधान से हटा दे। हिंदू राष्ट्र बना दे, फिर कोई दिक़्क़त नहीं होगी। जब तक हमारे संविधान में सेक्युलर शब्द है, आप किसी सरकारी कार्यक्रम में धार्मिक नारे नहीं लगा सकते। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इससे "हमें कोई दिक़्क़त नहीं है। लेकिन हम क्या बोलेंगे और कैसे अपने धर्म का पालन करेंगे, ये हमारा निजी मामला है। जय श्री राम, जय माँ काली, जय माँ दुर्गा बोलने में किसी को कोई दिक़्क़त नहीं है। हम माँ दुर्गा की पूजा करते हैं, माँ काली की पूजा करते हैं, सिंह की सवारी करते हैं। कोई हमें ये नहीं बता सकता कि हम कैसे हिंदू धर्म को मानें। जिनको जय श्री राम बोलना है, उनको बोलने दें। लेकिन आप आज जय श्रीराम क्यों कहते हैं? आप ख़ुद को हिंदू स्थापित करने के लिए नहीं कहते हैं। आप ये इसलिए बोलते हो क्योंकि देश के अल्पसंख्यक घबरा कर, डर कर दुम पीछे करके छिप जाएँगे. हमें दिक़्क़त इस बात से है."                          

                                                  यदि हम भारतीय समाज में सदियों से चले आ रहे भगवान श्री राम के नाम को समाहित करते हुए संबोधनों पर नज़र डालें तो हमें इनके उच्चारण में  सद्भाव,विनम्रता,प्रेम व शिष्टाचार साफ़ तौर पर झलकता है। भारतीय समाज में एक दूसरे को देखकर 'राम-राम ' बोले जाने की पुरानी परंपरा है। इसके अतिरिक्त 'सीता राम' और 'जय सिया राम' भी बोला जाता है। और यदि सामूहिक रूप से जयकारा भी लगाया जाता है तो उसमें भी 'श्री राम चंद्र की' -'जय' का उद्घोष किया जाता है। उपरोक्त किसी भी संबोधन में किसी तरह के उकसावे या भड़काने अथवा आक्रामकता का नहीं बल्कि विनम्रता का एहसास होता है। परन्तु निश्चित रूप से राम मंदिर आंदोलन के समय से आंदोलनकारियों द्वारा सुनियोजित तरीक़े से प्रचारित किये गए 'जय श्री राम' के नारे तथा इसके बोलने के अंदाज़ में वही आक्रामकता दिखाई देती है जिसका ज़िक्र महुआ मोइत्राने अपने साक्षात्कार में किया है।                            

                                           गृह मंत्री अमित शाह ने ममता बनर्जी की इस आपत्ति का भी राजनैतिक लाभ उठाते हुए गत दिनों पश्चिमी बंगाल में एक सभा में आरोप लगाया कि "बंगाल के अंदर माहौल ऐसा कर दिया गया है कि 'जय श्रीराम' बोलना गुनाह है। उन्होंने पुछा कि ममता दीदी, बंगाल में जय श्रीराम नहीं बोला जाएगा, तो क्या पाकिस्तान में बोला जाएगा?" गृह मंत्री का यह बयान बिना सोचे समझे भावनाओं में बह जाने वाले मतदाताओं पर ममता के 'राम विरोधी' होने का वह प्रभाव तो डाल सकता है जो अमित शाहचाहते भी हैं परन्तु उनका यह बयान दरअसल भगवान राम की महिमा,उनके सर्व व्यापी व सृष्टि के नायक होने पर ही सवाल खड़े करता है। जब भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं,सर्वव्यापी हैं,कण कण में समाये हुए हैं फिर आख़िर उस पाकिस्तान में उनका जयकारा क्यों नहीं लग सकता जो कभी भारत का ही हिस्सा था और आज भी वहां भगवान राम सहित अनेक देवी देवताओं के सैकड़ों मंदिर मौजूद हैं जहाँ आरती पूजा के बाद देवी देवताओं के जयकारे लगाये जाते हैं। अपने चुनावी फ़ायदे के लिये भगवान राम को किसी एक राजनैतिक दल की संपत्ति समझना अथवा उन्हें अयोध्या या पश्चिमी बंगाल तक सीमित रखना बिल्कुल ठीक नहीं है। ऐसा करना उनकी महिमा को कम करने तथा असीम को सीमित करने का प्रयास है। भगवान श्री राम के नाम का प्रेम व सद्भावनापूर्ण जयकारा केवल अयोध्या,उत्तर प्रदेश या बंगाल में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में लग सकता है।

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About the Author
Tanveer Jafri
Columnist and Author

Tanveer Jafri, Former Member of Haryana Sahitya Academy (Shasi Parishad),is a writer & columnist based in Haryana, India.He is related with hundreds of most popular daily news papers, magazines & portals in India and abroad. Jafri, Almost writes in the field of communal harmony, world peace, anti communalism, anti terrorism, national integration, national & international politics etc.

He is a devoted social activist for world peace, unity, integrity & global brotherhood. Thousands articles of the author have been published in different newspapers, websites & news-portals throughout the world. He is also recipient of so many awards in the field of Communal Harmony & other social activities.
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