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Sunday, January 17th, 2021

व्यापनी अमावस्या में श्री महालक्ष्मी पूजन


श्री गणेश लक्ष्मीन्द्र प्रभु रिद्ध-सिद्ध दातार।
आन विरोजो काजमह: करयो मम उद्धार।।

१४ नंवबर २०२० कार्तिक कृष्ण पक्ष चर्तुदर्शी शनिवार में सायंकाल व्यापनी अमावस्या में श्री महालक्ष्मी पूजन (दीपावली पर्व) मनाया जायेगा। ज्योतिषमान से १४/११/२० शनिवार में कार्तिक कृष्ण पक्ष चर्तुदर्शी दिन में २ बजकर १७ मिनट तक रहेगी। तदोपरांत अमावस्या शुरु हो जायेगी। अत: इस वर्ष दीपावली पर्व शनिवार अमावस्या को ही मनाया जायेगा। इस दिन स्वाति नक्षत्र प्रदोषकाल में २० बजकर ८ मिनट तक रहेगा। इसके बाद रात्रि में विशाखा नक्षत्र भोग करेगा। शनिवार में स्वाति नक्षत्र में बना सिद्ध योग कार्य सफलता हेतु अच्छा माना जायेगा। स्वाति नक्षत्र चर, चल, संज्ञक होने के कारण वाहन लेन-देन उद्योग कर्म दुकानदारी चित्रकारी शिक्षक स्वूâल संचालक शृंगार सामग्री एवं अन्य कर्म के लिये अच्छा माना गया है।


दीपावली पूजन एवं दिन के लग्न मुर्हूत
कुछ व्यापारीगण अपने उद्योग, धंधे, व्यवसाय, दुकानदारी, प्रतिष्ठान, आदि में लक्ष्मी पूजन के लिए धनु लग्न को श्रेष्ठ मानते है। क्योंकि इस लग्न का स्वामी गुरु देव हैं। गुरु शुभग्रह होने के कारण गुरु की सफलता में सहायक रहते हैं। इस दीपावली दिन शनिवार में धनु लग्न प्रात: ९/१० बजे शुरु होकर ११/१४ बजे दोपहर तक रहेगी। ध्यान रहे लग्न में लग्नेश गुरु, गुरु शुभ फल देने में अति बलवान माना जायेगा। दिन शनिवार में राहु काल ९ बजे से १०/३० बजे तक रहेगा, तो इस दिन शुभ के चौघड़िया होने से कोई दोष मान्य नहीं हैं।
दिन के चौघड़िया
प्रात: ६/४५ से कालका ८/१० से शुभ को ९/२८ से रोग का १०/४६ से उद्वेग का १२/०७ से चरका १३/२५ से लाभ का १४/४४ से अमृत का और सायं १६/०४ बजे से काल चौघड़िया मुर्हूत वर्तमान में रहेगा।
दीपावली दिन लग्नारंभ
मकर लग्न १०/५९ से १२/४६ तक वुंâभ लग्न २/२० तक, मीन लग्न ३/५० तक, मेष लग्न ३/५० से शुरु होकर सायं ५/३० तक रहेगी। लग्नों का अपना महत्व होता है। मकर लग्न में शनि स्वयं बलवान होकर बैठा है।
दीपावली पूजन और रात्रि के मुर्हूत
इस वर्ष शनिवार दीपावली की रात्रि बेला में लाभ, उद्वेग, शुभ, अमृत और चर के पांच चौघड़िया मुर्हूत १७/३० बजे यानि ५/३० बजे सायं काल शुरु होकर निशीथ काल रात्रि में १०/४६ मिनट यानि २५/४७ मिनट तक रहेंगे। चौघड़िया मुर्हूत सभी क्षेष्ठ है। लाभ के स्वामी बुध, उद्वेग के स्वामी रावि, शुभ के स्वामी गुरु, अमृत के गुरु चंद्र और चर के गुरु शुक्र माने गये हैं। सायंकाल वृष लग्न १७/३० से शुरु होगी। इसी लग्न में प्रदोष काल वर्तमान रहेगा। जिसे गणेश लक्ष्मी पूजन के लिए सर्वोत्तम माना गया है। प्रदोष समय राजन, कर्तव्या दीप मालिका, वृष लग्न में राहु, कुछ गड़बड़ी करेगा सो द्विजाचार्यो की राहु का विशेष पूजन करा लेना चाहिए।
पूजम्य शिरसाय देवं, गौरीपुत्रं विनायकम,
भक्ता वासंरमरे नित्यं, मायु कामार्थ सिद्धयते    
दीपावली की रात्रि में मिथुन लग्न
मिथुन लग्न १९/२६ बजे शुरु होकर २१/४१ बजे तक रहेगी। जिसमें शुभ अमृत के दोनों चौघड़िया मुर्हूत अति सुदंर रहेगा। लग्न पर गुरु का शुभ प्रभाव कार्य विशेष में उन्नतिप्रद रहेगा। पूजन कराकर पंडित गण लाभ के भागीदार बनें।
दीपावली की रात्रि में कर्वâ लग्न
२१/४१ से २३/५१ बजे तक भोग करेगी। इसी लग्न मे अमृत का चौघड़िया २२/३३ से २४/५ बजे तक रहेगा। अमृत के चौघड़िया में आप किसी तरह का पूजन कराकर लाभार्थी बन सकते हे। सिंह लग्न निशीथ काल २४/०५ बजकर ५ मिनट से शुरु होगी। निशीथ लक्ष्म्यादि पूजनं कृत्यं शुभ, सूत्रानुसार यह समय महालक्ष्मी पूजन के लिये सर्वोत्तम कहा गया है। निशीथकाल में समुद्रमंथन के समय लक्ष्मी जी का प्रार्दुभाव हुआ था इसलिए इस समय को द्विजाचार्य शुभ मानते है।
श्री गणेश, महालक्ष्मी, इंद्र, वरुण, कुबेर, भंडारी, ऋद्धि-सिद्धी शक्तिन सहित श्री ब्रम्हा विष्णु महेश नवगृह मंडल देवता आदि पूजन कराकर बहीखाता, पूजन करना तथा साल मध्य उत्तरोत्र की ओर अग्रसर होते चले जाते है। लक्ष्मी जी की कृपा बनीं रहती है। दीपावली की पूजन दिजाचार्यों से कराने से लक्ष्मी का भंडार कभी खाली नहीं होता, क्योंकि इसमें पुण्य का अंश मिल जाता हैं।  
लक्ष्मी के भंडार की बड़ी अपूूरब बात।
ज्यों खरचे त्यों-त्यों बढ़े, बिन खरचे घट जात।।
विष्णु प्रिया श्री लक्ष्मी जी आश्रम गृहणार्थ सद गृहस्थ दुकान, कारखाना, उद्योग, आफिस, स्टोर्स आदि का निरीक्षण करती है। किसने कितनी स्वच्छत से घर सजाया है और किसने नहीं। कहां निवास करुं अथवा कहां नहीं यह भी देखती है, कि कौन मेरी भक्ति में संलग्न है।
अर्धरात्रे भ्रमत्येव, लक्ष्मी राक्षियुतं गृहान।
स्वलंकृता लिप्ता दीपै, जागृब्ज जनोत्सवा।।
अत:जहां अच्छा लगता है वहीं ठहर जाती है। इसलिये मनुष्य अलंकारों से युक्त तथा पुष्प माला आदि से सुशोभित चंदन लगाकर दीपकों के उजालें में उत्सव करते हुये जागते रहना चाहिए। PLC.

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