- दोहे -
हिंदी मेरे देश की,..... मोहक मधुर जुबान ! इसका होना चाहिए, और अधिक उत्थान !!
किया उन्होंने आज फिर, हिंदी पर अहसान ! दिया साल के बाद फिर, हिंदी में व्याख्यान !!
भावी पीढ़ी पर अगर, दिया नहीं जो ध्यान ! हो जाएगी सत्य यह,.... हिंदी से अनजान !!
हिंदी का समझें बड़ा, खुद को खिदमतगार ! बच्चे जिनके पढ़ रहे,..... अँग्रेजी अखबार !!
अँग्रेजी में लिख रहे, हिन्दी का अनुवाद ! संसद में भरपूर है ,.... ऐसों की तादाद !!
होती हिंदुस्तान की,......हिंदी से पहचान ! इसका होना चाहिए, सबको ही अभिमान !!
हिंदी का आदर करे ,..पढें नये नित छंद ! होगी सबकी एक दिन,हिंदी प्रथम पसंद !!
हिंदी भाषा देश की,.....जिसकी नही मिसाल ! समय समय पर विश्व मे,जिसने किया कमाल ! !
फिल्मो का भी हाथ है,इसमे बडा रमेश ! हिंदी को पहचानते, इसकारण सब देश !!
फिल्मो के द्वारा गया, सहज बड़ा सन्देश ! हिंदी मे बातें करे,....... आज समूचा देश !!
अंग्रेजी मे ले रहे,...हिंदी का वो स्वाद ! भाषा हिंदी बोझ सी, दी हो जैसे लाद !!
हुई धुंधली आज पर ,उज्वल है तकदीर ! चलो सँवारें हम सभी, हिंदी की तस्वीर !!
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परिचय -:
रमेश शर्मा
लेखक व् कवि

बचपन राजस्थान के जिला अलवर के एक छोटे से गाँव में गुजरा ,  प्रारंभिक पढाई आठवीं तक वहीं हुई, बाद की पढाई मुंबई में हुई, १९८४ से मुंबई में  एक प्राइवेट कम्पनी में नौकरी की शुरुआत की , बाद में नौकरी के साथ साथ टैक्स कन्सल्टन्ट का भी काम शुरू किया जो कि आज तक बरकरार है , बचपन से ही कविता सुनने का शौक था  काका हाथरसी जी को बहुत चाव से  सुनता था , आज भी उनकी कई कविता  मुझे मुह ज़ुबानी याद है बाद में मुंबई आने के बाद यह शौक शायरी गजल की तरफ मुड गया , इनकम टैक्स का काम करता था तो मेरी मुलाकात जगजीत सिंह जी के शागिर्द घनशाम वासवानी जी से हुई उनका काम मैं आज भी देखता हूँ उनके साथ साथ कई बार जगजीत सिंह जी से मुलाकात हुई ,जगजीत जी के कई साजिंदों का काम आज भी देखता हूँ , वहीं से लिखने का शौक जगा जो धीरे धीरे दोहों की तरफ मुड़ गया दोहे में आप दो पंक्तियों में अपने जज्बात जाहिर कर सकते हैं और इसकी शुरुआत फेसबुक से हुई फेसबुक पर साहित्य जगत की  कई बड़ी हस्तियों से मुलाकात हुई उनसे मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला

संपर्क -: 18/984,आश्रय को- ऑप. हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड  खेर नगर , बांद्रा (ईस्ट )  मुंबई ४०००५१  …  फोन ९७०२९४४७४४ –  ई-मेल. rameshsharma_123@yahoo.com