राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ‘पन्ना प्रमुख’ और पूर्णकालिक ‘प्रचारक’ की तर्ज पर अब कांग्रेस ने भी मंडल स्तर पर ‘प्रेरकों’ की नियुक्ति का फैसला किया है। ये प्रेरक पार्टी की पहुंच बढ़ाने, उसकी विचारधारा का प्रसार करने और तमाम मुद्दों पर पार्टी के स्टैंड के बारे में लोगों को जागरूक करेंगे।
सूत्रों ने बताया कि प्रेरक कांग्रेस के दूत के तौर पर काम करेंगे और लोगों तक पार्टी की विचारधारा और राय को पहुंचाएंगे। इससे पार्टी को पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर मजबूती देने में भी मदद मिलेगी।

सूत्रों ने बताया कि प्रेरक राष्ट्रीय और राज्य स्तर के मुद्दों पर चर्चा के लिए पार्टी के हर जिला कार्यालय में संगठन संवाद का आयोजन करेंगे। इसके अलावा वे कांग्रेस और उसके फैसलों से जुड़ीं भ्रांतियों को खत्म करने में भी मदद करेंगे।

प्रेरकों की नियुक्ति का विचार 3 सितंबर को दिल्ली में हुई कांग्रेस की एक दिवसीय कार्यशाला के दौरान सामने आया। कार्यशाला में असम के पूर्व सीएम तरुण गोगोई ने पार्टी से जनसंपर्क और चुनाव जीतने के लिए आरएसएस मॉडल अपनाने का सुझाव दिया था।

मंडल स्तर पर 3 प्रेरक नियुक्त किए जा सकते हैं। हर मंडल में 4 से 5 जिले होंगे। प्रेरकों की नियुक्ति में महिलाओं, एसएसी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के पर्याप्त प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित किया जाएगा।

एक सूत्र ने बताया, ‘प्रत्येक प्रेरक को उसके ज्ञान और आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए 5 से 7 दिनों की ट्रेनिंग दी जाएगी।’ आरएसएस के प्रचारक खुद चुनाव नहीं लड़ते लेकिन माना जा रहा है कि कांग्रेस के प्रेरकों पर इस तरह का कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।

अगर सूत्रों की माने तो संघ से निष्कासित पूर्व प्रचारक हो सकते हैं बड़े पदाधिकारी साथ संघ की तरह कांग्रेस का संघ जैसा संगठन खड़ा करने व् संचालित करने के लिए कई संघ से नाराज व् हासिये पर पड़े संघ अघिकारियों व् संघ प्रचारको को संपर्क साधा जा रहा हैं , जिससे व्यापक रणनीति तैयार करके संघ से बड़ा संगठन खड़ा किया जा सके 

PLC.

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