Tuesday, February 25th, 2020

राजकुमार धर द्विवेदी के ताटंक छंद

राजकुमार धर द्विवेदी के ताटंक छंद
स्नेहलता बोस की टिप्पणी : ताटंक छंद पर दो शब्द कविता में छंदों का बड़ा ही महत्त्व है। नई कवित्ता, अकविता के इस युग मेंछंद -लेखन कम हो गया है, लेकिन कई वरिष्ठ कवि आज भी छंद लिख रहे हैं। दोहा, रोला, कुंडलिया को आज भी काफी लोकप्रियता प्राप्त है। मंचों में श्रोता इन्हें बड़े ही चाव से सुनते हैं। भाई राजकुमार धर द्विवेदी जी दोहा, रोला, कुंडलिया के साथ ही कई अन्य छंद बखूबी लिख रहे हैं। मैंने उनके लिखे ताटंक छंद देखे। बहुत ही सुंदर छंद लिखे हैं श्री द्विवेदी ने।ताटंक के बारे में मैं अपने पाठकों को थोड़ी जानकारी दे दूं। ताटंक छंद मात्रिक छंद है, जो चार चरण का होता है। पहले चरण में १६ और दूसरे चरण में १४ मात्राएं होती हैं। चारों चरणों में यही नियम। हर लाइन के अंत में तीन गुरु यानी मगण होता है। हां, एक बात और। इस छंद की हर पहली पंक्ति का अंत गुरु से होता है। ( स्नेहलता बोस ” शिक्षक श्री अवार्ड – 2013 ” से सम्मानित शिक्षिका व् साहित्यकार )
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ताटंक छंद
भवसागर की सब नौकाएं, लग जाएं अब कूलों से, रौनक जीवन की बगिया में, आए गीतों, झूलों से। नया साल सबको खुशियां दे, भर दे झोली फूलों से, घायल 'राज' कहे भगवन से, मिले मुक्ति अब शूलों से। -------------------------------------------------------------------- मार रहे जो आज मलाई, खाते हैं बैठे काजू, सबक सिखाना उनको अब है, तुम पुख्ता रखना बाजू। शारद का नित मान बढ़ाना, देना कभी नहीं आंसू, बात खरी, सच्ची ही कहना, लिखना गीत सदा धांसू। ----------------------------------------------------------------- ऊबड़ -खाबड़ रचनाओं से, दम निकला है गीतों का, छंदों से अनुराग नहीं है, आज हमारे मीतों का। स्वर लहरी गायब मंचों से, युग है आज लतीफों का, नंगा नाच करे फूहड़ता, जमना कठिन शरीफों का। --------------------------------------------------------------- छाया घना कुहासा तो क्या, कहर ओस को ढाने दो, सब कुछ साफ दिखाई देगा, सूरज को आ जाने दो। आती हैं बाधाएं पथ में, एक नहीं, दस आने दो, रुकना रास नहीं आता है, मुझको कदम बढ़ाने दो।
Rajkumar-Dhar-Dwivedis-poemspoems-of-Rajkumar-Dhar-DwivediRajkumar-Dhar-Dwivediपरिचय : - राजकुमार धर द्विवेदी लेखक, कवि, पत्रकार
साहित्यिक नाम:-  राजकुमार धर द्विवेदी ‘विद्रोही’
संप्रति :- वरिष्ठ उप -संपादक, नईदुनिया, जेल रोड,रायपुर छत्तीसगढ़
साहित्यिक गुरु (अगर हो)-  स्व.  डा. प्रयागदत्त तिवारी जी( प्राध्यापक हिंदीव्यवसाय)
साथ में :  पत्रकारिता, स्वतंत्र लेखन, कादम्बिनी,हिन्दुस्तान सहित देश की राष्ट्रीय पत्रिकाओं में लेखन
फोन नंबर : –09425484657 ,  ईमेल :- rajkumardhardwivedi@gmail.com

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rajkumardhardwivedi, says on January 3, 2015, 5:38 PM

लोकप्रिय पोर्टल 'आईएनवीसी ग्रुप' के पटल पर अपनी रचनाएं देखकर बेहद खुशी हुई। आदरणीया स्नेहलता बोस की टिप्पणी बड़ी ही सार्थक है। आपने ताटंक छंद का परिचय दिया। इससे वे पाठक इस छंद से परिचित होंगे, जो छंद -विधान से अवगत नहीं हैं। मैं आपका आभारी हूं कि आपने मेरे छंद पढ़ने के लिए समय निकाला और आशीर्वचन दिए। साधुवाद। साथ ही ग्रुप के माननीय संपादक जी, सोनाली जी को साधुवाद, जिन्होंने मेरी रचना को स्थान दिया। -राजकुमार धर द्विवेदी, रायपुर [छत्तीसगढ़ ]