पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव के लिए  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अपना नया सहोदर मिल गया है अब पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की नवगठित पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस के साथ वह गठबंधन करेगी इसकी औपचारिक घोषणा कर दी है। संभावना है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींढसा के नेतृत्व वाली शिरोमणि अकाली दल (लोकतांत्रिक) भी आने वाले दिनों में इस गठबंधन का हिस्सा बने। सिंह ने भाजपा के साथ गठबंधन की घोषणा से पहले केंद्रीय मंत्री और पंजाब के लिए भाजपा के चुनाव प्रभारी गजेंद्र सिंह शेखावत से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की। कुछ दिनों पहले ही शेखावत ने चंडीगढ़ में भी सिंह से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच आज दूसरी मुलाकात थी। इस मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने गठबंधन का औपचारिक ऐलान किया।
सिंह के साथ संवाददाताओं से बातचीत में शेखावत ने कहा, ‘आज मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि भाजपा और अमरिंदर सिंह पंजाब चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगे। हम साथ मिलकर काम कर रहे हैं।’ शेखावत ने कहा कि उपयुक्त समय पर सीटों के तालमेल के बारे में घोषणा की जाएगी। सिंह ने कहा, ‘हमारा गठबंधन निश्चित तौर पर…101 प्रतिशत चुनाव जीतेगा। सीटों का तालमेल जीत की संभावना के हिसाब से तय किया जाएगा।’ भाजपा को अमरिंदर सिंह का साथ मिलने से राज्य में एक प्रमुख सिख चेहरा मिल गया है।
शेखावत से मुलाकात के बाद सिंह जैसे ही निकले थोड़ी देर बाद ढींढसा भी वहां पहुंचे। शेखावत और ढींढसा के बीच तकरीबन आधे घंटे बातचीत हुई। ढींढसा ने शिरामणि अकाली दल से अलग होने के बाद शिरोमणि अकाली दल (लोकतांत्रिक) नाम से एक पार्टी बना ली थी। सूत्रों ने दावा किया कि ढींढसा की पार्टी का भी इस गठबंधन का हिस्सा बनना लगभग तय है। कुछ अन्य छोटे दल भी इसमें शामिल हो सकते हैं। ज्ञात हो सिंह को सितंबर में पंजाब के मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी और पंजाब लोक कांग्रेस नाम से अपनी पार्टी बना ली थी।
इसके बाद सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ भी मुलाकात की थी। वह भाजपा के साथ गठबंधन के संकेत दे चुके थे। भाजपा का शिरोमणि अकाली दल से बहुत पुराना गठबंधन था, लेकिन केंद्र के तीन कृषि कानूनों के मुद्दे पर दोनों दलों का गठबंधन टूट गया था।
पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। 117 सदस्यीय राज्य विधानसभा में भाजपा अधिकतम 23 सीटों पर चुनाव लड़ती रही है। वह राज्य में शिरोमणि अकाली दल की कनिष्ठ सहयोगी रही है। हालांकि इस बार के चुनाव में वह आधे से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। पंजाब में कांग्रेस का शासन है जबकि आम आदमी पार्टी वहां की प्रमुख विपक्षी पार्टी है। भाजपा से अलग होने के बाद अकाली दल ने बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन किया है। ऐसे में इस बार पंजाब विधानसभा का चुनाव चतुष्कोणीय होने की संभावना है। PLC

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