बिहार में शराबबंदी अप्रैल, 2016 में लागू हुई। इसके बाद से अब तक मद्य निषेध कानून उल्लंघन से जुड़े दो लाख से भी अधिक मामले संज्ञान में आए हैं, मगर 65 फीसद मामलों का ही ट्रायल शुरू हो पाया है। मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग के अनुसार, दिसंबर तक करीब एक लाख आठ हजार मामलों का ट्रायल शुरू हुआ है, जबकि 94 हजार से अधिक मामले ऐसे हैं, जिनका ट्रायल लंबित है। पिछले पांच सालों में महज 1636 कांडों का ही ट्रायल पूरा हो पाया है। इसमें 1019 मामलों में सजा सुनाई गई है, जबकि 610 मामलों में आरोपित दोषमुक्त सिद्ध हुए हैं।

पटना में सर्वाधिक 38 हजार मामले लंबित

पूरे राज्य में एक लाख 37 हजार 643 केस ऐसे हैं, जो संज्ञान के स्तर पर लंबित हैं। इसमें सर्वाधिक मामले पटना के हैं। पटना में पुलिस के 33,268 जबकि उत्पाद टीम के 5,240 केसों में संज्ञान नहीं लिया गया। मुजफ्फरपुर में भी 10 हजार से अधिक, सारण में आठ हजार से अधिक जबकि गया में 6800 से अधिक मामले संज्ञान की प्रतीक्षा में हैं। PLC

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