नई दिल्‍ली. डेंगू  इस बार ज्‍यादा जानलेवा हो रहा है. मौसमी बीमारी के रूप में डेंगू पिछले कुछ महीनों से उत्‍तर प्रदेश सहित कई राज्‍यों में अपना कहर बरपा रहा है, वहीं अब दिल्‍ली-एनसीआर में भी इसका प्रकोप देखने को मिल रहा है. राजधानी में डेंगू से पहली मौत सामने आई है जबकि अक्‍टूबर महीने में ही डेंगू के 382 मामले सामने आए हैं. वहीं पिछले हफ्ते में 243 मामलों की पुष्टि हुई है. जबकि यूपी के कई जिलों फिरोजाबाद, मथुरा, लखनऊ, कानपुर, नोएडा आदि में बड़ी संख्‍या में डेंगू के मरीजों की मौतें रोजाना हो रही हैं. इनमें बड़ी संख्‍या में बच्‍चे भी शामिल हैं. हालांकि अब स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू इस बार दिवाली के त्‍यौहार (Diwali) पर अपना विकराल रूप दिखा सकता है.
दिल्‍ली म्‍यूनिसिपल कॉर्पोरेशन में डेंगू, मलेरिया, कॉलेरा, इन्‍सेफेलाइटिस नियंत्रण के लिए बतौर पूर्व नोडल ऑफिसर काम चुके पब्लिक हेल्‍थ एक्‍सपर्ट डॉ. सतपाल का कहना है कि डेंगू अब संकट बनता जा रहा है. हालांकि अभी इसका पीक (Dengue Peak) आना बाकी है. वे कहते हैं कि अभी करीब 15 दिन के बाद अक्‍टूबर के अंत में या नवंबर के पहले सप्‍ताह में दिवाली के आसपास डेंगू के केसेज (Dengue Cases) सर्वाधिक रहने का अनुमान जताया जा रहा है. ऐसे में त्‍यौहार के आसपास डेंगू अपने पीक पर रह सकता है.
नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) से जुड़े एक स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ ने कहा कि इस वक्‍त कोरोना के मामलों के बढ़ने का अनुमान जताया जा रहा था लेकिन उसकी जगह अब डेंगू के मरीजों ने ले ली है. देश में 2017-18 में डेंगू के सर्वाधित मामले सामने आए थे. चूंकि डेंगू और चिकनगुनिया बीमारियां भी तीन-चार साल के अंतराल पर लहर के रूप में आती हैं ऐसे में 2021 में इन मामलों का बढ़ना इस हिसाब से भी संभव है. अगस्‍त से लेकर अभी तक डेंगू के मामलों की एक बड़ी संख्‍या सामने आ चुकी है.
वहीं डा. सतपाल आगे कहते हैं कि इस बार काफी ज्‍यादा बारिश हुई है और अभी तक हो रही है. खासतौर पर दिल्‍ली-एनसीआर में जलभराव बहुत आसानी से और जल्‍दी होता है. लिहाजा डेंगू के मच्‍छरों को पनपने के लिए बेहतर माहौल मिल जाता है. अब दो दिनों से जो बारिश हो रही है इसका असर 12 दिन के बाद देखने को मिल जाएगा क्‍योंकि 10 दिन के अंदर डेंगू का लार्वा बनने से लेकर मच्‍छर पैदा हो जाता है और काटना शुरू कर देता है. ऐसे में आने वाले 20 दिन डेंगू के मामलों को लेकर काफी संवेदनशील हो सकते हैं. हालांकि दिवाली को लेकर की जाने वाली साफ-सफाई का ध्‍यान रखा जाता है तो हालात कुछ बेहतर भी हो सकते हैं.
 डॉ. सतपाल कहते हैं कि आधा अक्‍टूबर गुजरने के बाद एकाएक मौसम में बदलाव हुआ है और चारों तरफ बारिश हो रही है. इससे जहां डेंगू के मामलों के बढ़ने के आसार हैं वहीं कोरोना महामारी (Corona Pandemic) को नियंत्रित करने में यह लाभदायक हो रही है. बारिश की वजह से हवा में कोरोना का जो वायरस था वह अब बूंदों दवाब से जमीन पर आ गया है और पूरी तरह निष्क्रिय हो गया है. यही वजह है कि अगर कोरोना की तीसरी लहर आने वाली थी तो वह कुछ दिन के लिए अब टल गई है या उसमें देरी हो गई है. इतना ही नहीं एयरोसोल्‍स या सर्फेस पर कोरोना वायरस न होने के चलते अभी आ रहे कोरोना के मामलों में भी कमी आ सकती है. इसके साथ ही वायु प्रदूषण के स्‍तर में भी कमी आएगी. इससे रेस्पिरेटरी संबंधी और बीमारियों में भी राहत मिलेगी. PLC

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