डॉ डीपी शर्मा ने कहा कि रिसर्च और प्रोजेक्ट दोनों को किसी भी सूरत में अलग नहीं किया जा सकता। प्रोफेशनल दृष्टि से यदि समझें तो रिसर्च के आउटकम का अंतिम बिंदु प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन पर ही खत्म होता है

आई एन वी सी न्यूज़
नई दिल्ली

जयपुर स्थित महर्षि अरविंद इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड मैनेजमेंट में फैकल्टी एवं स्टूडेंट के संयुक्त एकेडमिक एवं रिसर्च विकास के लिए एक पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इस वर्कशॉप में तकनीकी विशेषज्ञों ने रिसर्च की विभिन्न विधाओं को कंप्यूटर एप्लीकेशन प्रोजेक्ट के साथ संयुग्मित करने पर चर्चा की।

इस अंतर्राष्ट्रीय वर्कशॉप में बोलते हुए आईटी के प्रोफेसर एवं डिजिटल डिप्लोमेट डॉ डीपी शर्मा ने कहा कि रिसर्च और प्रोजेक्ट दोनों को किसी भी सूरत में अलग नहीं किया जा सकता। प्रोफेशनल दृष्टि से यदि समझें तो रिसर्च के आउटकम का अंतिम बिंदु प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन पर ही खत्म होता है। आज दुनिया के बदलते कॉम्पिटिटिव परिदृश्य में यदि किसी प्रोजेक्ट में रिसर्च के एट्रीब्यूट यानी यूनिक एवं इन्नोवेटिव्सनेस को समाहित न किया जाए तो उस प्रोजेक्ट की अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्वीकार्यता बहुत कम यानी नगण्य हो जाती है।

डॉ शर्मा ने अपने लाइव डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से बताया कि किस प्रकार एक छोटा सा आईडिया बड़े रिसर्च प्रोजेक्ट में तब्दील किया जा सकता है। उन्होंने ग्रांट प्रोजेक्ट और ग्रांड प्रोजेक्ट के बीच में विभेद स्थापित करते हुए बताया कि भारत और दुनिया के अन्य विकसित देशों के बीच प्रोजेक्ट विकास की जो प्रक्रिया है उस में क्या अंतर है और कैसे लोगों को प्रोफेशनल दृष्टिकोण से ग्लोबल दुनिया के प्रोफेशनल लोगों के साथ तारतम्य स्थापित करना चाहिए।

फ्रांस की जूवेंसी कंपनी के डाटा साइंस इंजीनियर इंदूराज रामामूर्थी ने बताया कि सभी बिजनेस मॉडल कंप्यूटराइज मॉडल से इंटेलिजेंट मॉडल की ओर ट्रांसफॉर्मर हो रहे हैं। इन मॉडल को ट्रांसफार्म करने में डाटा साइंस एवं मशीन लर्निंग का विशेष योगदान है। इंजीनियर इंदु राज ने उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार इंश्योरेंस के क्लेम के लिए ट्रेडिशनल सर्वेयर की आवश्यकता नहीं है अर्थात कस्टमर स्वयं फोटोग्राफ इंश्योरेंस कंपनी के पोर्टल पर अपलोड कर ऐस्टीमेटेड क्लेम का अनुमान लगा सकता है एवं क्लेम कर सकता है । इसी प्रकार उन्होंने आने वाले वक्त में ट्रेडिशनल मॉडलिंग के लिए ह्यूमन मॉडल की जगह पर इंटेलिजेंट ऑटोमेटेड मॉडल यानी ऑगमेंटेड रियलिटी एवं डाटा एनालिटिक्स की तकनीक को विस्तार से समझाया।

इस वर्कशॉप में मैरीलैंड यूनिवर्सिटी यूएसए के डॉ राकेश कुमार शर्मा, साउथ कोरिया से मॉडर्न टैक के टेक्निकल डायरेक्टर एसोसिएट डॉ हर्ष दुर्गा तिवारी एवं वारविक रिसर्च फाउंडेशन यूके से डॉक्टर नेहा शर्मा को भी आमंत्रित किया गया था।

इस वर्कशॉप में मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन एवं पीएचडी कंप्यूटर साइंस एवं एप्लीकेशन के छात्रों के अलावा बीसीए फाइनल ईयर के छात्रों एवं महर्षि अरविंद इंस्टिट्यूट के वरिष्ठ एवं कनिष्ठ प्रोफेसर एवं व्याख्याताओं ने भी भाग लिया। मीडिया से बातचीत में  उप प्रधानाचार्य सुनील चौहान एवं एमसीए एवं कंप्यूटर रिसर्च विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ महावीर सेन ने बताया कि महर्षि अरविंद संस्थान छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए समय-समय पर इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करता रहता है।

संस्थान के डायरेक्टर डॉ भारत पाराशर ने इस तरह के एकेडमिक एवं रिसर्च कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि किसी भी संस्थान के सर्वांगीण विकास के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम अति आवश्यक हैं।

 

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