Saturday, February 29th, 2020

मध्यप्रदेश एनकाउंटर पर भड़के मदनी : एजेंसियों की नाकामी को छिपाने के लिए हुई निहत्थों की हत्या

sआई एन वी सी न्यूज़ नई दिल्ली, जमीयत उलमा ए हिन्द के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने भोपाल में सिमी से संबंधित युवाओं की फर्जी मुठभेड़ (एनकाउंटर) पर सख्त आक्रोश व्यक्त किया है। विभिन्न टीवी चेनलों, मीडिया एवं सोशल मीडिया में प्रसारित वीडियो क्लिपों को देखकर ऐसा जाहिर होता है कि यह पुलिस का रणनीतिक परीक्षण और फर्जी एनकाउंटर है। जिसमें भोपाल सेन्ट्रल जेल से फरारी दिखाकर आठ निहत्थे कैदियों की बेरहमी से हत्या की गई प्रतीत होती है। मौलाना मदनी ने कहा कि यह सुनियोजित कार्यवाही थी जिसमेें न सिर्फ निर्दोष मौतें हुई हैं बल्कि कानून और मानवाधिकार की धज्जियां उधेड़ी गई हैं। इसलिए मेरी मांग है कि किसी निष्पक्ष एजेंसी से इस पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए और दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के साथ उन्हें सख्त से सख्त सजा दी जाए।

उल्लेखनीय है कि इन मृत युवाओं का मुकदमा मौलाना महमूद मदनी के निर्देश पर जमीयत उलमा महाराष्टड्ढ्र लड़ रही थी, कई सुनवाई के बाद जमीयत उलमा के वकीलों के सामने यह बात स्पष्टड्ढ हो गई थी कि वकील अभियोजन (एटीएस) के पास उन्हें दोषी करार देने से संबंधित कोई पर्याप्त सबूत नहीं है। मौलाना मदनी ने सवाल करते हुए कहा कि क्या देश की एजेंसियों ने अपनी नाकामी को छिपाने के लिए निर्दोष युवकों को फर्जी एनकाउंटर करने का तरीका अख्तियार कर लिया है। उन्होंने कहा कि मुठभेड़ से संबंधित दो वीडिया सामने आए हैं। जो स्पष्टड्ढ करते हैं कि इन गैर-हथियारबंद लोगों को पकड़ कर करीब से मारा गया है। साथ ही ये मुद्दा भी महत्वपूर्ण है कि भोपाल के सेन्ट्रल  जेल जिसे भारत का उच्चतम जेल होने का दर्जा प्राप्त है, जहां मजबूत सुरक्षा चेतावनी युक्त प्रणाली, दीवारों पर लगे बिजली के तारों में करंट प्रवाहित होने के साथ-साथ विशेष सुरक्षाबल तैनात हैं। वहाँ कैसे तीन-तीन ऊंची और आदमकद दीवारों को कूद कर आठ लोग भाग गए और पूरे शहर की पुलिस खामोश बैठे रही।

मौलाना मदनी ने गृह राज्यमंत्री विवादास्पद बयान पर भी खेद व्यक्त करते हुए कहा कि वे पुलिस के अपराध को छिपाने की कोशिश न करें बल्कि उन्हें वास्तविक तथ्यों का सामना करना चाहिए। जो लोग कैद में थे उनके पास हथियार कहां से आ गए? मृतकों के शरीर पर नए कपड़े, हाथ घड़ी और जूते इत्यादि किसने दिए और इतने बड़े क्रिमनल आपरेशन में पुलिस वाले मोबाइल से कैसे वीडियो शूट कर रहे थे। इतना ही नहीं घटना स्थल पर एक मेले की तरह स्थानीय गांव की भीड़ वहां तमाशा कैसे देखकर रही थी। मौलाना मदनी ने अफसोस का इजहार करते हुए कहा कि कुछ लोग संगीन आतंकवादी बताकर इस प्रकरण को हल्का करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि हमारे देश में कानून का राज है, हमारे संवैधानिक कानून का यह बुनियादी सिद्धांत है कि जब तक कोई व्यक्ति दोषी साबित न हो जाए उसे दोषी करार नहींं दिया जा सकता, इसलिए ये अधिकार किसी को प्राप्त नहीं है कि वह देश के कानून और व्यवस्था को रौंद कर तथाकथित देशभक्त बन बैठे। मौलाना मदनी ने कहा कि जमीयत उलमा ए हिन्द उनका मुकदमा लड़ रही थी, इसलिए चुप नहीं बैठ सकती और अदालत के सामने इससे संबंधित तथ्यों को उजागर करेगी।

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