Netaji Subhash Chandra Bose was the visionary of New India: Prof. Dwivedi

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लेखक प्रो. संजय द्विवेदी
लेखक प्रो. संजय द्विवेदी

Program organized on the eve of 78th Foundation Day of ‘Azad Hind Fauj’

Dr. Bhimrao Ambedkar Institute of Technology, Port Blair organized the program

INVC NEWS
New Delhi,

“Netaji Subhash Chandra Bose envisioned the modern India we see today. He had a vision for India that was far ahead of its time.” This view was shared by the Director General of the Indian Institute of Mass Communication (IIMC), Prof. Sanjay Dwivedi in the program organized by the Dr. Bhimrao Ambedkar Institute of Technology, Port Blair on the eve of 78th Foundation Day of ‘Azad Hind Fauj’ on Wednesday.

Speaking on the topic ‘Netaji Subhash Chandra Bose, Azad Hind Fauj and Akhand Bharat’, Prof. Dwivedi said that Netaji, who gave new energy to the entire country, was one of the great freedom fighters of India, from whom the youth of today’s era also take inspiration. The slogan of ‘Jai Hind’ given by him became the national slogan of the whole country. With his ideas, Netaji Subhash Chandra Bose influenced millions of people.

According to Prof. Dwivedi, Netaji believed that no distinction was possible between men and women. A true man is the one who respects women in every situation. This was the reason that she had established the ‘Rani Jhansi Regiment’ in Azad Hind Fauj, setting a unique example of women empowerment.

The Director General of IIMC said that it is the duty of every resident of India to take a pledge to contribute fully to the development of the country, inspired by Netaji. Netaji used to say that if we really want to empower India, then we need to adopt the right approach and youth have an important role in this work.

According to Prof. Dwivedi, if we want to remember Netaji, then we should remember him as a communicator who takes our thoughts to the last person of the mass group. Netaji became popular due to his simplicity and ease even after the limited means of communication before independence. With his thoughts, he opened new doors of success for unsuccessful and disappointed people.

In the program, Advocate Umesh Shandilya, who researched the life of Netaji Subhash Chandra Bose, and Mr. Vijay Patel, the coordinator of the ‘Netaji 125 Year Celebration’ program also shared their views. Dr. Utpal Sharma, Director, Dr. Bhimrao Ambedkar Institute of Technology was also present on this occasion.

1 COMMENT

  1. प्रति,
    सम्माननीय
    प्रोफेसर संजय द्विवेदी जी, चेयरमेन
    वेब जर्नलिस्ट ऐसोसियेसन आफ इंडिया

    दिनांक :- 10/ 05/2024

    विषयः- *छत्तीसगढ, दंतेवाड़ा FTC प्र.क्र. 113/2022, थाना सुकमा अप. क्र. 27/2022, धारा 376 (2) (झ) (ढ), 506* भादवि मे विधिक सेवा प्राधिकरण दंतेवाड़ा व सरकारी/प्राइवेट वकीलों के असहयोग एवं~ मेरे प्रतिपरीक्षण में विपक्ष के वकील द्वारा डेढ़ दिन तक अत्यधिक परेशान करके मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर लिखवाने व सही बातो को न लिखने *एवँ~ न्यायालय को सुपुर्द अपराधी की काॅल रिकार्डिंगस CD/दस्तावेजो से उत्पन्न “”51प्रश्नो के जवाब अभियुक्त से लेने”” के विषय में प्रार्थना विनती।*

    माननीय महोदय,

    विषयान्तर्गत लेख है कि आपको प्रेषित मेरे पूर्व विनती पत्रो से आपको ज्ञात ही है कि मुझे सुकमा और दंतेवाड़ा के सरकारी/प्रायवेट वकीलो ने फीस ले लेने के बावजूद भी मेरी ओर से न्यायालय मे सही-सही सहयोग नही किया, सुकमा में तो हमारा सरकारी वकील कौन था मुझे आज तक उसका नाम-चेहरा नहीं मालूम, सुकमा में किसी ने हमे यह तक नहीं बताया कि हमारा सरकारी वकील कौन है ।
    न्यायालय के आदेश पर 18-मार्च-24 को ब्लड सैंपल देने हेतु दंतेवाड़ा जाने पर मैंने कोर्ट के नकल विभाग मे आवेदन कर प्रकरण की नकल प्राप्त की जिसे पढ़ने पर मैंने पाया– *जो कि हमारे वकीलों ने समय-समय पर प्रकरण की नकल निकलवाने के बावजूद भी हमें नहीं बताया* कि मेरे विनती पत्रो पर दया-किरपा करके *माननीय न्यायाधीश शैलेष शर्मा जी* ने दिनांक 13-04-23 व 25-04-23 को आदेशित किया कि *निःशुल्क विधिक सहायता के अंतर्गत पीड़िता हेतु अनुभवी अधिवक्ता की नियुक्ति की जा सकेगी* उपरांत 28-04-23 को विधिक सेवा प्राधिकरण से FTC कोर्ट को ज्ञापन प्राप्त हुआ कि क्षितिज दुबे नामक अधिवक्ता मुझ पीड़िता की पैरवी हेतु नियुक्त हुये है जो कि मुझे पता ही नहीं है और किसी ने भी मुझे फोन या पत्र द्वारा यह सूचित भी नहीं किया और विदित होवे कि विधिक सेवा प्राधिकरण दंतेवाड़ा के मुख्य सचिव *श्रीमान संजय सोनी* जी के समक्ष जब मैंने 18-मार्च-24 को और इसके लगभग 10 माह पहले भी स्वयं उपस्थित होकर निःशुल्क अधिवक्ता हेतु प्रार्थना की तो उन्होंने जवाब दिया कि आपके पास में नीलिमा वर्मा है और हम कोई दूसरा अधिवक्ता आपको नहीं दे सकते, संजय सोनी जी और शेखर सर ने तो हमारे दोनों फोन नंबर को ब्लॉक ही कर दिया है, सम्माननीय सर मुझ गरीब धनहीन पीड़िता जिसका भाई-पिता नहीं, 6 बहने, छोटी बहन पागल अर्ध विक्षिप्त है, सुकमा के रोड के किनारे सरकारी जमीन में माँ ने चाय-नाश्ता बेचकर हमें पाला है, *मेरे साथ इस तरह का पक्षपात-पूर्ण छल-कपट, ह्रदय को गहराई तक दुःख देकर, किलपाकर असहाय होने का एहसास करा देता है ।*

    दूसरी बात मैं मेरे मुख्य-परीक्षण और प्रति-परीक्षण के विषय में कहना चाहती हूं कि मेरे *मुख्य-परीक्षण को सिर्फ 1-2 घंटे में ही 15-18 बिंदुओं पर संपन्न* कर समाप्त कर दिया गया एवं *प्रति-परीक्षण के लिए विपक्ष के वकील बिच्चम पोंदी ने डेढ़ दिन का समय लिया । ( 12-12-23 की सुबह 11बजे से दूसरे दिन 13-12-24 के दोपहर 2 बजे तक )* और मुझे दु:खी कर, किलपा-किलपा कर, परेशान करके, व्यथित करके दोबारा-दोबारा लगभग डेढ़ सौ प्रश्नो का जवाब मुझसे लिया *एक ही बिंदु नंबर पर “” यह कहना सही है—यह कहना गलत है “” कह-कह कर मुझे बहुत ज्यादा परेशान किया गया ।* और इसमे भी जो मैंने कहा वो न लिखवाकर जानबूझकर उल्टा सीधा लिखवा दिया ।

    *मैं मेरे प्रति-परीक्षण बिंदु नंबर 30* के विषय में कहना चाहती हूं कि शैलेश मिश्रा मेरे घर के बाजू वाले घर में ही रहता है , यह घर शैलेश मिश्रा ने अभियुक्त सुखदेव से लगभग 2010 में खरीदा होगा।

    *35* के विषय में कहना चाहती हूं कि विपक्ष के वकील बिच्चम पोंदी ने यह किस तरह की लाइन लिखवा दी है कि मैंने पुलिस को कोई बयान ही नहीं दिया है यह तो साधारण सी समझ में आने वाली बात है कि यदि मैने बयान नहीं दिया होता तो माननीय न्यायालय के समक्ष कैसे प्रस्तुत हुआ जा सकता था *विपक्ष के वकील द्वारा जानबूझकर बातों को उलझाना तोड़ा मरोड़ा जाना निंदनीय है और इसे रोका जाना चाहिए ।*

    *37* के विषय में कहना चाहती हूं कि अभियुक्त सुखदेव सिंह 2003-04 में हमारे घर के बाजू वाले घर में रहने आया था और 2010-11 में मेरे घर के बाजू वाला मकान खाली करके बस स्टैंड, मिनी स्टेडियम महादेव वार्ड वाले नए मकान में रहने चला गया था।
    अभियुक्त सुखदेव सिंह 2003-04 से पहले मेरे घर के सामने रोड के उस पार सरदार कुलवंत सिंह ( किंदा ) पिता जसवंत सिंह के घर में लगभग तीन-चार वर्ष किराए से रहता रहा है ।
    *अभियुक्त के किराए के और मेरे घर के बाजू वाले अभियुक्त के स्वयं के मकान दोनों में ही मैं और अभियुक्त की पुत्री कँवलजीत कौर खेलते हुए आना-जाना करते थे यह बिंदु इस तरह स्पष्ट है जी।*

    *39* के विषय में कहना चाहती हूं कि *यह बात स्पष्ट हो कि यहां अभियुक्त के दो मकानो की बात की जा रही है* एक *पुराना मकान* जो मेरे घर के बाजू में था जिसके छत पर जाने वाली सीढ़ीओ के ऊपर एक पुराना छोटा कमरा था, *इसमे पानी का कुँआ है* जिसे कि शैलेश मिश्रा नामक व्यक्ति को बेच दिया गया है
    और दूसरा 2010 के बाद बना हुआ *नया मकान* जो की बस स्टैंड मिनी स्टेडियम महादेव वार्ड में बना हुआ है *जो की डबल मंजिल है “”नीचे सामने मेडीकल स्टोर है”” और ऊपर एक हाल दो कमरे और एक रसोई बनी हुई है जिसमे कि 10-01-2019 मे मेरे साथ जबरदस्ती बलात्कार किया गया था ।*

    *48,49 व 54* के विषय में कहना चाहती हूं कि विपक्ष के इस वकील ने क्या उल्टा सीधा करके बकवास लिखवा दिया है जो दोनों ही बिंदुओं 48 व 49 में उलझने जैसी बकवास जैसे तरीके से लिखा गया है । ( मैंने कहा कुछ और विपक्ष के वकील ने कुछ और लिखवा दिया, और बिंदु *62* में लिखवा दिया गया है कि मेरे स्कूल से 100 मीटर आगे अभियुक्त का जो नया मकान है उसे मैं नहीं जानती हूं यह कैसी अजीब बात है की जिस विषय में मैंने FIR में भी लिखवाया है उसे मै ना जानती होऊँ *( इस तरह की उल्टी सीधी विरोधाभासी डबल-डबल लाइन लिखवा कर विपक्ष का वकील मुझे “”पागल और भ्रमित साबित करना चाहता है”” )*

    यह धूर्त बहुत ही बेशर्म निर्लज्ज घाग कुटिल और चालाक लालची…. ..

    बिंदू *65* के विषय में हमारा विवाह प्रमाण पत्र नीलिमा वर्मा वकील को हमारे द्वारा दिया गया है यदि दोबारा आवश्यकता हो तो हम न्यायालय मे पोस्ट कर प्रस्तुत देंगे जी।

    बिंदू *73* के विषय मे कहना है कि पानी का कुँआ मेरे घर के बाजू वाले अभियुक्त सुखदेव सिँह के पुराने घर मे ही है जहाँ से मेरे द्वारा पानी भरने पर *अभियुक्त सुखदेव सिँह द्वारा हर बार मुझे यौन उत्पीड़न, दुर्व्यवहार, छेड़छाड़, शोषण, दुराचार किया जाता था ।*

    **विपक्ष का यह वकील स्वयं पागल है या मेरे प्रति-परीक्षण के समय इसने मुझे पागल साबित करने की भरपूर चेष्टा की है जो कि एक ही बात को दोबारा-दोबारा सही भी लिखवाता है और दोबारा से उसी बात को पूछकर गलत भी लिखवाता है । एक ही बिंदू नंबर पर सही है भी लिखवाता है और गलत है भी लिखवाता है**

    *( माननीय न्यायाधीश जी से करबद्ध🙏 प्रार्थना विनती है कि गवाह/पीड़िता के बयान उपरांत “”हस्ताक्षर के पहले”” उसे पूरे बयान को पढ़ने के लिए कहा जाये और पढ़ने-समझने का पर्याप्त समय दिया जाये तो ये न्यायहित मे अच्छी बात होवे जी। )*

    अंततः है विनती है कि यदि न्याय हित मे तथ्यों के स्पष्टीकरण हेतु माननीय न्यायाधीश जी यदि मुझे आवश्यकता होने पर समन जारी कर बुलाएंगे तो मैं दोबारा भी दंतेवाड़ा न्यायाधीश श्रीमान शैलेष शर्मा जी के समक्ष प्रस्तुत होने की पूरी कोशिश करूंगी जी ।

    >> *पटवारी आशीष यादव पिता नारद राम यादव* ने अपने प्रति परीक्षण के बिंदु नंबर *7* में कहा है कि दो मकान छोड़कर खंडहर पड़ा मकान पीड़िता के माता-पिता का है तो यहाँ कौन से दो मकानो को छोड़ा जा रहा है जबकि पीड़िता और अभियुक्त के मकान बिल्कुल पास-पास चिपके हुए हैं *माननीय न्यायाधीश जी से विनती है कि इस बात की और बिंदू नंबर 9 वाले कुँए की उपस्थिति को स्वयं अपना विश्वस्त-ईमानदार अधिकारी भेजकर पुष्टि करा लेने की किरपा करे जी ।*

    >>सिटी कोतवाली सुकमा के *उप निरीक्षक श्रीमान फागूराम लहरे* पिता खोरबहार राम लहरे जी ने अपने प्रति परीक्षण बिंदु नंबर *25* में कहा है कि घटनास्थल का मकान डबल मंजिल नहीं है *तो इस विषय में मैं स्पष्ट करना चाहती हूं कि* फागूराम लहरे जी और पटवारी आशीष यादव जी के द्वारा *अभियुक्त के सिर्फ एक ही मकान का विश्लेषण/मुआयना किया गया है जबकि घटना अभियुक्त के नए और पुराने दोनों मकानों में हुई* है
    *2010 से पहले* मेरे घर के बाजू वाले पुराने घर मे मेरे साथ यौन उत्पीड़न, दुर्व्यवहार, छेड़छाड़, शोषण, दुराचार बलात्कार किया जाता रहा, जहाँ कि मुझे कई बार कुएँ से पानी भरने जाना पड़ता था और *2010 के बाद* अभियुक्त के नए मकान महादेव वार्ड, मिनी स्टेडियम, बस स्टैंड वाले मकान की बात है जहां पर 10-01-19 को मेरे साथ जबरदस्ती बलात्कार किया गया था अभियुक्त के इस मकान में नीचे एक मेडिकल स्टोर भी है जिसका नाम गुरुनानक मेडीकल स्टोर है । *माननीय न्यायाधीश जी से विनती है कि इस बात को स्वयं अपना विश्वस्त-ईमानदार अधिकारी भेजकर पुष्टि करा लेने की किरपा करे जी ।*

    सुकमा कोतवाली उपनिरीक्षक श्रीमान *फागूराम लहरे* जी ने बिंदू नंबर *28* मैं कहा है कि पीड़िता के घर से लगी हुई तीन दुकान के बाद में अभियुक्त का मकान है *इसमें मैं स्पष्ट करना चाहूंगी कि मेरे घर के बाजू की तीन दुकानों के पीछे अभियुक्त का मकान है* और दुकानों के पीछे से हमारे घर और अभियुक्त के घर के दरवाजे मिलते हैं और पीछे से एक दूसरे के घर में आने-जाने का रास्ता भी था, आज भी अभियुक्त का पुराना मकान इस तरह बना है सामने की तरफ दुकान और पीछे निवास स्थान है जहां पर वर्तमान में शैलेश मिश्रा रहते हैं, *माननीय न्यायाधीश जी से विनती है कि इस बात को स्वयं अपना विश्वस्त-ईमानदार अधिकारी भेजकर पुष्टि करा लेने की किरपा करे जी ।*

    सुकमा कोतवाली उपनिरीक्षक श्रीमान *फागूराम लहरे* जी ने बिंदू नंबर *45* मैं कहा है कि प्र•पी•3 मैं उल्लेखित मकान में अभियुक्त और उसकी पत्नी बच्चे निवासरत हैं तो इस विषय में मैं स्पष्ट करना चाहूंगी कि लगभग 2006 से अभियुक्त सुखदेव सिंह गुराया का परिवार सुकमा शहर छोड़ कर पंजाब में रहने लगा है और तब से अभियुक्त सुखदेव सिंह सुकमा में अकेला ही रहता है उसके घर में एक बंगाली लेडिस रोटी बनाने आती है *माननीय न्यायाधीश जी उचित समझे तो कृपया अभियुक्त के बच्चो की पढ़ाई और पत्नी का वोटर कार्ड मंगवाकर इस बात की तस्दीक अवश्य कर लें जी कि माननीय न्यायालय को सही जानकरी दी गई है या झूठी जानकारी देकर गुमराह किया जा रहा है।*

    *फागूराम लहरे* जी के बिंदू नंबर *49* के विषय मे कहना है कि मैने FIR के अंतिम पेज पर साफ-साफ लिखा है कि 10-01-2019 को अभियुक्त सुखदेव सिंह ने मेरे साथ जबरदस्ती बलात्कार किया और उसी के अंत में लिखा है कि तब सुखदेव सिंह सुकमा बस स्टैंड, खेल मैदान के सामने, गुरु नानक मेडिकल स्टोर वाले स्वयं के मकान मे क्लीनिक चलाता है और उसके ऊपर रहता है ।

    *फागूराम लहरे* जी ने बिंदू नंबर *55* मैं अजीब सी बात कही है कि अभियुक्त सुखदेव ने डीएनए टेस्ट हेतु सहमति नहीं दिया था और मैंने भी उससे बलपूर्वक जबरदस्ती साइन नहीं कराए तो प्रश्न यह उठता है कि उस डीएनए सहमति पत्र पर अभियुक्त सुखदेव सिंह के साइन और उप निरीक्षक फागूराम लहरे के साइन कैसे हुए हैं, *यह न्यायालय को गुमराह कर भटका देने जैसी बात है*

    >> *आर्डर शीट दिनांक 30-01-2024 में अभियुक्त ने स्वयं को निर्दोष होना बताते हुए अपने बचाव में साक्ष्य देना व्यक्त किया किंतु दिनांक 18-मार्च-24 को डीएनए परीक्षण हेतु रक्त देने के पश्चात अभियुक्त और उनके वकील ने बचाव साक्ष्य के लिए मना कर दिया क्योंकि वे समझ गए कि अब सच्चाई प्रकट हो जाएगी और बचाव गवाह साक्षी सब झूठे पड़ जाएंगे।*

    >>> अभियुक्त कथन के प्रश्न नंबर *4* के विषय में कहना चाहती हूं कि मेरे घर के बाजू में जो शैलेश मिश्रा जी रहते हैं जिन्होंने अभियुक्त से मकान खरीदा है *उन्हें समन भेजकर न्यायालय मे बुलाकर इस विषय में सच्चाई पूछी जाए एवं कुएँ के विषय में भी पूछा जाए जी ऐसी विनती प्रार्थना है आपसे ।*

    >>> *माननीय न्यायाधीश जी से अतिविनम्र विनती है कि इस ओर कुछ और अधिक ध्यान देकर सही-सच्ची बात को स्वयं समझकर सत्य को खोज निकाले कि गवाह पटवारी-पुलिस के बयानों को पहले से ही सिखा-पढ़ाकर न्यायालय के समक्ष भेजा गया है, जोकि इस तरह के बयान देकर न्यायालय को भ्रमित कर रहे जिससे कि अभियुक्त सजा से बच जाए*

    >>दिनांक 30-01-24 को कथन के समय सुखदेव सिंह गुराया ने प्रश्नो जो झूठे जवाब दिए हैं उन पर *सही-सही सच्चाई जानने हेतु* माननीय न्यायाधीश जी से विनती है कि मेरे द्वारा आपको सुपुर्द किए गए मेरी और अपराधी की *बातचीत के सीडी और दस्तावेजों में से उत्पन्न 51 प्रश्नों का जवाब लिया जाए जिससे सभी सच्चाई निकल कर सामने आ जावेगी जी।* *( आर्डर शीट दिनांक-17-02-23 मे उल्लेख है कि “”सीडी में रिकॉर्डिंग व उससे बनने वाले 51 प्रश्न जो बहुत महत्वपूर्ण है”” एवँ “”प्रस्तुत सीडी व दस्तावेजों की छायाप्रतियो को प्रकरण में संलग्न किया जाता है “” )*

    दिनांक 19-06-23 को आपके समक्ष मेरा विनती पत्र प्रस्तुत हुआ था जिसमें कि मैंने तब भी *कॉल रिकॉर्डिंग के 51 प्रश्नों की समीक्षा* के विषय में प्रार्थना की थी।

    आपसे अतिविनम्र विनती है कि मैं दंतेवाड़ा से 1200किमी दूर रहती हूं और बार-बार मेरा दंतेवाड़ा पहुंच पाना संभव नहीं है मेरी 12 व 7 वर्षीय दो बालिकाऐ है जिन्हें कि मैं किसी और के पास छोड़कर नहीं आ सकती, और आप जानते ही हैं कि दंतेवाड़ा में कोई भी वकील मुझे पूरी तरह से सहयोग नहीं कर रहे हैं और मैं निर्धन असहाय गरीब होने के कारण कहीं ओर से किसी वकील साहब की व्यवस्था करके लाने में सक्षम नहीं हूं जी अतः मेरे इस प्रार्थना पत्र आवेदन को ही मेरी उपस्थिति समझ/मानकर, दया-कृपा करके, मेरी विनय-अरदास को स्वीकृत करे जी, और आपको सुपुर्द की गई *कॉल रिकॉर्डिंग्स के सहयोग से सत्य को स्थापित करके मुझे पूरा सच्चा न्याय देने की कृपा करें जी,*

    *मै आजीवन आपकी शुक्रगुज़ार रहूंगी जी।*

    आपको बहुत-बहुत धन्यवाद है जी ।

    संलग्नः-

    01. 51 प्रश्नो की पीडीएफ ।

    02. डीएनए परीक्षण आदेश ।

    03. प्रकरण सारतत्व इत्यादि।

    दिनांक :-10/05/2024

    मंदीप कौर

    (पीड़िता) मंदीप कौर पति – श्री सोहन सिंह पता- म०नं0 359, शांति फोटो के पीछे, पुराना बस स्टैण्ड, आजाद वार्ड पिपरिया, जिला होशंगाबाद, नर्मदापुरम (म०प्र०) पिन 461775 मो. 9584214089

    whatsapp number 9926311681

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