रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ और भारतीय सेना को सफल परीक्षण के लिए बधाई देते हुए कहा कि दोनों परीक्षणों से यह साबित हो गया है कि यह प्रणाली अलग-अलग रेंज से निशाने को भेदने में सक्षम है।

रक्षा शोध एवं विकास सचिव और डीआडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी. सतीश रेड्डी ने परीक्षण में शामिल टीम को बधाई दी और कहा कि यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मील का पत्थर है।

क्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने रविवार को मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली वायु रक्षा प्रणाली का दो बार सफल परीक्षण किया। ओडिशा के समेकित परीक्षण रेंज, चांदीपुर से हाई स्पीड वाले निशानों को भेदकर वायु रक्षा प्रणाली का सफल परीक्षण किया गया। यह प्रणाली सेना के लिये निर्मित की गई है।

पहले परीक्षण के दौरान मिसाइल ने मध्यम ऊंचाई पर उड़ान भर रहे निशाने पर लंबी दूरी से प्रहार किया। दूसरा परीक्षण कम ऊंचाई पर उड़ान भर रहे निशाने पर कम दूरी से किया गया। मिसाइल ने दोनों निशाने को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

इसे डीआरडीओ ने इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के साथ मिलकर विकसित किया है।

परीक्षण के अवसर पर डीआरडीओ और सेना के कई अधिकारी मौजूद थे। PLC

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