कांग्रेस आज से आगामी नगरीय निकाय चुनाव सहित 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति बनाएगी। प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ आज से मिशन 2023 के लिए मोर्चा संभालेंगे। गौरतलब है कि कांग्रेस में अंदरुनी खींचतान और बैठकों के दौर ने फिर से प्रदेश की सियासत का पारा चढ़ा दिया है। कमलनाथ स्वास्थ्य कारणों से कुछ दिन प्रदेश से दूर रहे। इसी दौरान कांग्रेस में सियासी बयानबाजी और बैठकों का दौर शुरु हो गया। इन बैठकों ने कई तरह की अटकलों का बाजार गर्म कर दिया। अब इन कयासों पर विराम लगाने एक बार फिर कमलनाथ ने मोर्चा संभाल लिया है। गुरूवार से कांग्रेस में बैठकों का दौर शुरू होगा। कमलनाथ ने दिल्ली दौरे से लौटने के साथ ही संभागवार बैठक करने का मन बनाया है।
कमलनाथ 24, 25 और 26 जून को लगातार बैठकें करने वाले हैं। कुछ बैठकें ऑनलाइन तो कुछ को भोपाल भी तलब किया जा सकता है। जिलों में संगठन प्रभारियों की नियुक्ति के बाद अब उनके और जिला इकाइयों के बीच समन्वय बनाने के लिए बैठक करने की तैयारी है। वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि कमलनाथ के दिल्ली से लौटने के साथ ही बैठक होगी। जानकारी के मुताबिक ग्वालियर चंबल इलाके से बैठकों का दौर शुरू होगा। बैठकों का मकसद नवनियुक्त प्रभारियों और जिला इकाइयों के बीच समन्वय बनाने के साथ ही जिला स्तर पर पार्टी के संगठन को मजबूत करना है। संभागवार होने वाली बैठकों में प्रभारी के साथ जिला अध्यक्ष और विधायकों को शामिल किया जाएगा। 2023 के चुनाव से पहले होने वाली बैठकें को कई मायनों में अहम माना जा रहा है।

उपचुनावों की भी तैयारी
इन बैठकों के साथ ही कमलनाथ उपचुनावों की तैयारी भी शुरु कर देंगे। प्रदेश में एक लोकसभा और तीन विधानसभा उपचुनाव होने हैं। खंडवा लोकसभा के अलावा जोबट, रैगांव और पृथ्वीपुर विधानसभा उपचुनाव भी प्रदेश की सियासी नब्ज जानने के लिए अहम माने जा रहे हैं। खंडवा में कांग्रेस की ओर से अरुण यादव की उम्मीदवारी तय मानी जा रही है। वहीं तीन विधानसभा में से दो कांग्रेस के कब्जे में रही हैं। जोबट कलावती भूरिया और पृथ्वीपुर बृजेंद्र सिंह राठौर के निधन के बाद खाली हुई है वहीं रैगांव विधानसभा भाजपा विधायक जुगल किशोर बागरी के निधन से रिक्त हुई है। कमलनाथ इन उपचुनाव वाले क्षेत्रों में भी सियासी जमावट करने जा रहे हैं। आठ जिलों के जिलाअध्यक्षों को भी हटाने की तैयारी की जा रही है। ये वे जिला अध्यक्ष हैं जो सालों से इस कुर्सी पर जमे हुए हैं।

अजय सिंह मामले में भी हो सकती है बात
अजय सिंह के कमलनाथ के संबंध में दिए बयान के बाद दोनों के बीच अंदरुनी टकराव देखा जा रहा है। दोनों के समर्थकों की बयानबाजी भी खुलकर सामने आ चुकी है। कमलनाथ इस एपीसोड का भी पटाक्षेप कर सकते हैं। रीवा में राकेश चौधरी को प्रभारी बनाने के बाद अजय सिंह की नाराजगी सामने आई थी। बाद में अजय सिंह ने बयान जारी कर ये भी कहा था कि इस फैसले पर कांग्रेस पुनर्विचार करेगी। इस संबंध में कोई फैसला हो सकता है। कमलनाथ और अजय सिंह कार्यकर्ताओं को एकजुटता का संदेश भी दे सकते हैं। PLC.

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