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Tuesday, October 20th, 2020

JNU व जामिया विश्वविद्यालय फिर बने शिक्षा के सिरमौर

- तनवीर जाफ़री -
                                     
भारतवर्ष  में  शिक्षा का सर्वोच्च मापदंड स्थापित करने वाले दस प्रमुख शिक्षण संस्थानों में नई दिल्ली के जवाहर  लाल नेहरू विश्वविद्यालय तथा जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय का नाम शामिल होने के बाद एक बार फिर उस मानसिकता के लोगों को गहरा आघात लगा है जो देश के इन प्रमुख शिक्षण संस्थानों  को राष्ट्र विरोध,राष्ट्र द्रोह,अपराध,अय्याशी,अपराध तथा राजनीति का अड्डा साबित करने की जी तोड़ कोशिश में लगे हुए थे। भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पिछले दिनों  NIRF अर्थात राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ़्रेमवर्क ने इस सूची की घोषणा की। इस रैंकिंग में पहला स्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस, बेंगलुरु को प्राप्त हुआ है जबकि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएन यू) को दूसरा व बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय को रैंकिंग में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। जबकि जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय को दसवाँ स्थान हासिल हुआ। गत वर्षों में बी एच यू भी सत्ता विरोधी आवाज़ बुलंद करने को लेकर काफ़ी चर्चा में रहा है। दिल्ली के यह दोनों ही विश्वविद्यालय जे एन यू व जामिया विश्वविद्यालय गत कई वर्षों से सत्ता के निशाने पर हैं। इन दोनों ही विश्वविद्यालयों ने हमेशा ही शिक्षा के सर्वोच्च माप दंड स्थापित करते हुए देश विदेश को एक से बढ़कर एक वैज्ञानिक,डॉक्टर,इंजीनियर,अधिवक्ता,न्यायाधीश,नेता,प्रशासक,बुद्धिजीवी,शिक्षाविद,थिंक टैंक दिए हैं। परन्तु गत कुछ वर्षों में जबसे सत्ता ने अपने विरुद्ध उठने वाले विरोध या आलोचना के स्वरों को सुनने का साहस खोया है तभी से यह  शिक्षण संस्थायें भी सत्ता व सत्ता समर्थकों के निशाने पर आ गयी हैं।
                                     पूरा देश अच्छी तरह जानता है कि किस तरह जे एन यू का चरित्र हनन करने की कोशिशें गत वर्षों में की गयी हैं। किस तरह भारतीय जनता पार्टी के ही राजस्थान के एक विधायक ने जे एन यू जैसे शिक्षण व शोध संस्थान के बारे में अपना निजी 'पूर्वाग्रही शोध पत्र ' पढ़ते हुए मीडिया को यह बताया था कि कैम्पस में शराब की  कितनी बोतलें मिलीं और कितने अधिये व पौवे। कितने हड्ड मिले और कितनी हड्डियां। कितनी बीयर की बोतलें बरामद हुईं और कितने 'प्रयुक्त निरोध'। कितने बीड़ी के टोटे मिले और कितने सिगरेटों के। ज़रा सोचिये जिस शख़्स को राजस्थान की जनता ने अपना विधायक चुना था 'देश का वह महान नेता दिल्ली के जे एन यू में आकर हड्डियां,बीड़ी सिगरेट के टोटे व निरोध उठा उठा कर गिनने जैसा 'कठिन टास्क' अंजाम दे रहा था? शिक्षण संस्थान से दुश्मनी निकालने का इससे गन्दा और भद्दा उदाहरण दूसरा क्या हो  सकता है? ऐसे नेता को देश विदेश में सत्ता के शीर्षों पर बैठे जे एन के पूर्व छात्र ख़ैर क्या दिखाई देंगे इसने यदि कम से कम अपनी ही पार्टी की केंद्र सरकार के विदेश मंत्री एस जय शंकर व वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जैसे नेताओं के पद व उनकी योग्यता की ओर ही देख लिया होता तो उसे कैम्पस में इन चीज़ों को ढूंढने की ज़रूरत न पड़ती। परन्तु आश्चर्य है कि देश के जिस शिक्षण संस्थान को आज भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा देश के शीर्ष दस शिक्षण संस्थानों में जगह दी गयी है उसे बदनाम व कलंकित करने का प्रयास करने वाली गन्दी मानसिकता के लोग आज हीरो बने घूम रहे हैं। बड़े अफ़सोस की बात है कि इन विश्व विद्यालयों के जिन छात्रों की क़ाबलियत की बदौलत आज एक बार फिर इन शिक्षा के मंदिरों की सार्थकता व इनकी अहमियत प्रमाणित हुई है उन्हीं छात्रों को असामाजिक तत्व प्रमाणित करने की कोशिश की जा रही थी। इन्हें देशद्रोही,राष्ट्र विरोधी,ग़द्दार बताया जा रहा था तथा विश्विद्यालयों को ऐसे  लोगों का अड्डा कहा जा रहा था ?
                                 दरअसल आम तौर से छात्र आन्दोलनों के दमन का कारण प्रायः यही होता है कि विश्वविद्यालय के छात्र सरकारों के हर 'फ़रमान' पर अपनी  पूर्ण सहमति दर्ज करने के बजाए अपनी राय व अपनी आवाज़ भी रखते हैं। कोई भी असहनशील सरकार इसे अपने 'सरकारी फ़रमानों' में दख़ल मानती है। परन्तु देश का छात्र वर्ग चूंकि शिक्षित व संगठित होता है इसलिए वह देश की आम असंगठित जनता की तरह भेड़ बकरियों की मानिंद सत्ता के इशारे  पर नाचने व उसकी 'भक्ति' करने  के बजाय अपनी सोच व फ़िक्र के अनुसार सरकार को सुझाव भी देता है और उसकी अवहेलना तथा विरोध का साहस भी रखता है। और जब यही छात्र व विश्वविद्यालय विरोधी ताक़तें छात्रों को अपनी मनमानी कर पाने में बाधा समझने लगती हैं तो विद्या के इन्हीं मंदिरों को बदनाम करने की ऐसी साज़िशें रची जाने लगती हैं जिससे छात्र,छात्रावास तथा विश्वविद्यालय आदि बदनाम हों। इसी शिक्षण संस्थान विरोधी वातावरण में जे एन यू के गेट पर टैंक खड़ा करा दिया गया और दलील यह दी गयी की इस टैंक से छात्रों में देश भक्ति पैदा होगी। क्या इस टैंक के खड़ा होने से पहले यहाँ के छात्र देश भक्त नहीं होते थे? इंतेहा  तो यह है कि आज जो विश्वविद्यालय शीर्ष दस की रैंकिंग में दूसरे नंबर पर आया है उसे बंद कराए जाने तक के विचार भी कुछ शिक्षा विरोधी 'विचार वान' लोगों द्वारा रखे जाने लगे थे।
                     ग़ौर तलब है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय जो की इस समय देश के अग्रणी विश्वविद्यालयों में अपना स्थान बना चुका है इसकी स्थापना 1966 में हुई थी। यह  शिक्षण और शोध के लिए एक विश्व विख्यात केंद्र है। वर्ष 2016 में भी जेएन यू को राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ़्रेम वर्क (एनआईआरएफ़), भारत सरकार द्वारा भारत में सभी विश्वविद्यालयों में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ था तथा वर्ष 2017 में दूसरा स्थान हासिल हुआ था । इसी विश्व विद्यालय को वर्ष 2017 में भारत के राष्ट्रपति की ओर से सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय का पुरस्कार भी  मिला था। परन्तु जे एन यू को जहां वामपंथी विचारधारा का अड्डा कहकर बदनाम करने की कोशिशें गत कई वर्षों से जारी हैं वहीँ जामिया को भी सी ए ए जैसे क़ानून का मुखर होकर विरोध करने के लिए राष्ट्र विरोधियों का अड्डा साबित करने की कोशिश की जा रही है। इन्हीं दोनों विश्व विद्यालयों के अनेक मुखर छात्र व छात्र नेता भी अपने सत्ता विरोधी विचारों की अभिव्यक्ति के चलते अक्सर सरकार व पुलिस के निशाने पर भी बने रहते हैं। इसी विश्वविद्यालय की  एक गर्भवती छात्रा सफ़ूरा ज़रगर की गिरफ़्तारी इन दिनों पूरे विश्व मीडिया का ध्यान अपनी और आकर्षित कर रही है और इसे लेकर सत्ता की सर्वत्र आलोचना हो रही है । इसी जे एन यू के छात्र कन्हैया कुमार अपने सत्ता विरोधी तेवरों के लिए विश्वविख्यात हो चुके हैं। बहरहाल एक बार फिर शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग में शीर्ष दस में आने  के बाद दिल्ली के इन दोनों ही विश्वविद्यालयों ने न केवल बदनामी की कोशिशों के धब्बों को मिटाया है बल्कि दोनों ही विश्वविद्यालयों ने शिक्षा का सिरमौर बनकर इन शिक्षण संस्थानों की शान में इज़ाफ़ा भी किया है।
 
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About the Author
Tanveer Jafri
Columnist and Author
Tanveer Jafri, Former Member of Haryana Sahitya Academy (Shasi Parishad),is a writer & columnist based in Haryana, India.He is related with hundreds of most popular daily news papers, magazines & portals in India and abroad. Jafri, Almost writes in the field of communal harmony, world peace, anti communalism, anti terrorism, national integration, national & international politics etc.
He is a devoted social activist for world peace, unity, integrity & global brotherhood. Thousands articles of the author have been published in different newspapers, websites & news-portals throughout the world. He is also recipient of so many awards in the field of Communal Harmony & other social activities.
Contact – : Email – tjafri1@gmail.com
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