Tuesday, July 14th, 2020

JNU में हुए हमले के खिलाफ हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के छात्रों ने निकाला प्रतिरोध मार्च

आई एन वी सी न्यूज़           

नई  दिल्ली ,     

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा, महाराष्ट्र के छात्रों द्वारा कल 05 जनवरी 2020 कोJNU के विद्यार्थियों और शोधार्थियों पर हुए बर्बर हिंसा के खिलाफ, जिसमें लगभग 35से ज्यादाछात्रऔर शिक्षक घायल हुए है. इस हमले के विरोध एवं JNU के छात्रों के समर्थन में गांधी हिल्स से अंजलि हाइट तक प्रतिरोध मार्च निकाला गया।

 

JNU के विद्यार्थी अपनी फ़ीस वृद्धि के विरोध में लगभग दो महीनों से लोकतांत्रिक तरीके संघर्ष कर रहे हैं। कल शाम को उन पर कुछ बाहरी गुंडों द्वारा नक़ाब पहन कर रॉड और डंडो से आक्रमक तरीके से हमला कर दिया गया जिसमें JNUSU की अध्यक्ष आईषी घोष एवं ( सतीश चंद्र यादव को उस पूर्व संध्या में गुंडो द्वारा उन पर हमला किया) छात्र, छात्राओं तथा जेएनयू के प्रोफ़ेसर को गंभीर चोटें आयीं। ये गुण्डे एक तरफ कैंपस में आकर हमला कर रहे थे तो दूसरी तरफ प्रशासन शांत दुबका नजर आया। छात्रों के आरोपों के अनुसार वहाँ के सुरक्षा कर्मीउपद्रवी के सामने निष्क्रिय रूप से खड़े रह तमाशा देखती रही।90 से ज्यादा पुलिस को कॉल करने के बाद भी दिल्ली पुलिस का देर से घटनास्थल पर पहुँचना और पहुँचने के बाद भी कार्यवाही न करना संदेह के दायरे में पुलिस को खड़ा करता हैं। नक़ाबपोश बन कर आये अपराधी छात्रों एवं शिक्षको के साथ मारपीट कर बड़े आराम से वंदे मातरम, भारत माता की जय का नारा लगाते हुए जेएनयू कैंपस से निकल जाते है और पुलिस तमासबिन बन  देखती रह जाती हैं। य़े घटना एक बड़ी साजिश की तरफ इशारा करती हैं।

05 जनवरी की घटना पर कई बड़े सवाल खड़े होते है कि इन गुंडो को दिल्ली के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में एक साथ कई अपराधी लाठी, डंडो और लोहे के राड़ के साथकैसे कर जाते है और मारपीच कर बढ़ी ही आसानी से फरार हो जाते हैं।
प्रथम दृष्टया देखने से प्रतीत होता है कि जेएनयू पर केंद्र सरकार, जेएनयू प्रशासन और दिल्ली पुलिस की सोची समझी साजिश के तहत  पूर्व सूनियोजित ढंग से छात्रों पर हमला करवाया गया हैं क्योंकि एक लम्बे समय से जेएनयू हमेशा सरकार की गलत नितियों का विरोध करता आया हैं।


हिंदी विश्वविद्यालयके विद्यार्थीयों और शोधार्थियों के  द्वारा गांधी हिल्स से कैंपस के गेट तक प्रतिरोध मार्च का आयोजन कर जेएनयू में घटित घटना पर अपना विरोध जाहिर किया। कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने अपनी बाते रखते हुए सत्ता के कारगुजारियों एवं मुल विषय से भटका उनकी गलत नितियों पर बोलने, लिखने वाले व्यक्तयों पर कानूनी डंड़ा मार उन्हें चुप कराने जैसे विषयों पर प्रकाश डाला।

छात्र नेता चंदन सरोज ने अपने कार्यक्रम के वक्तव्य में कहा कि केंद्र सरकार उच्च शिक्षण संस्थान को बर्बाद कर निजीकरण करने पर उतारू हैं। जामिया मिल्लिया, एएमयू तथा जेएनयू के छात्रों और छात्राओं पर हमला कर उन्हें बदनाम करने का प्रयास एक लंबे समय से जारी है। जेएनयू को आज लोग जो वामपंथ को मार्क्स से जोड़ कर देखते हैं वो लोग अपना चश्मा बदल लें वामपंथ का मतलब मार्क्सवादी होना नहीं बल्कि वामपंथ का मतलब हैं अन्याय और अपने अधिकार के लिए लड़ना है।सत्ता की गलत नीतियों का विरोध करना है।आज संघ और केंद्र की बीजेपी सरकार जिस तरह निजीकरण कर रही है आने वाले भविष्य के लिए बहुत खतरनाक है। शिक्षा हमारा बुनियादी अधिकार है जिसे सत्ता छीन रही है। हम इसके लिए लड़ रहे हैं तो हम पर पुलिस और अपने फर्जी देश भक्त गुंडों से हमला करवा कर हमारे विरोध को दबाने का प्रयास किया जा रहा हैं।


शोधार्थी रविचंद्र ने अंबडेकर का जिक्र करते हुए कहा कि जेएनयू अध्यक्ष आईशी घोष के नेतृत्व को सलाम करते हैं। आज के समय में महिलाओ की एक मुखर आवाज के रूप में प्रतिनिधित्व करते हुए देख आईशी एक सभी के लिए प्ररेणाश्रोत के रूप मे हैं।

जेएनयू की पूर्व छात्रा रहीं एवं वर्तमान में विश्वविद्यालय की शोधार्थी सरिता यादव ने कहा कि  एक सोची समझी साजिश के तहत केन्द्र की बीजेपी सरकार की आखों की कीरकीरी जेएनयू बना हुआ है क्योंकि विपक्ष के भूमिका के रूप में जेएनयू के विद्यार्थी हमेशा खड़े मिले। सत्ता के गलत नितियों का हमेशा एक सवैंधानिक तरीके से विरोध कर सरकार को सही नितियों पर चलने को विवश किया। जेएनयू से जो लोग परिचित नहीं वो लोग सत्ता के द्वारा फैलाये गये झुठ पर यकिन कर उसके बारें में अभद्र टिप्पणी करते हैं। जेएनयू सत्ता के गलत नितियों के ख़िलाफ़ हमेशा लड़ता आया है और आगे भी लड़ता रहेगा। जेएनयूअपनी फ़ीस वृद्धि का विरोध कर रहा तो क्या गलत कर रहा? क्या सस्ती शिक्षा मिलना एक मानव का अधिकार नहीं हैं? आज की सरकार पढ़े लिखे लोगों से डरती है। सत्ता को सवाल करने वाले लोग पसंद नहीं है इसलिए वो छात्रों पर किसी न किसी रूप में हमले करवाती हैं।


अजय राउत ने अपने वक्तव्य में कहा कि आईआईटी मुम्बई, टीस(TISS), AMU और जेएनयू, जामिया जैसे शिक्षा के सर्वोच्च शिक्षण संस्थानों को फ़ीस वृद्धि करके और महिला छात्राओं को चाहे वो गुरमीत मेहर ,नेहा यादव और आईशी घोष और प्रियंका भारती जैसी छात्रओं की आवाज़ दबाकर मनुस्मृति लागू करना चाहती है, जिसमें महिलाओं शिक्षा का अधिकार ही नहीं था यह सरकार छात्राओं पर हमला कर के उन्हें शिक्षा से वंचित करना चाहती है।अजय ने जेएनयू में हुए हमले की निंदा की। बीजेपी सरकार, आरएसएस से जुड़े अन्य संगठन हमारे देश को दंगे की आग में जला देने पर आमादा  है।

छात्र प्रेम ने अपने वक्तव्य में कहा कि जेएनयू हर साल कई उच्च अधिकारी देदेश निर्माण करता हैं। देश की प्रगती में जेएनयू का एक महत्वपूर्ण योगदान है।


इसके साथ ही विश्वविद्यालय की अन्य लड़कियों ने भी मार्च में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और जेएनयू प्रशासन द्वारा विद्यार्थियों पर हमले को न रोके जाने और प्रशासनिक असफलता की घोर निंदा की।कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन इस्तेखार अहमद ने किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के भारी संख्या में प्रगतिशील एवं अमनपसंद विद्यार्थियों ने भाग लिया।

 

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