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Thursday, March 4th, 2021

इंटरनेट गवर्नेंस का अन्तरराष्ट्रीय लोकतांत्रीकरण - नागरिकों के साथ, नागरिकों के लिए

यदि भविष्य में इंटरनेट की ग्लोबल गवर्नेंस एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मानव के लिए समान अवसर, अधिकार संरक्षण एवं मानवतावादी दृष्टिकोण से नियंत्रित नहीं किया तो दुनिया का भविष्य वेरोजगारी, व्यक्तिगत प्राइवेसी, सुरक्षा एवं मानवता के धरातल पर खतरे में पड़ जाएगा : डॉ डीपी शर्मा 

आई एन वी सी न्यूज़  
नई  दिल्ली ,

यदि आप जानना चाहते हैं कि दुनिया के नागरिकों के डाटा, या इंटरनेट गवर्नेंस पर दुनियाँ  के एक्सपर्ट्स और यूनाइटेड नेशंस के प्रतिनिधि क्या सोचते हैं ? तो आपको 14 दिसंबर को "मिशन पब्लिक" के माध्यम से हुए अंतर्राष्ट्रीय संवाद और उसके सर्वे परिणामों को जानना होगा/  दुनियाँ के लिए "इंटरनेट गवर्नेंस का कानूनी एवम तकनीकी ढाँचा" कैसा होना चाहिए? यह कानूनी एवम तकनीकी बहस अब अंतिम दौर के संवाद तक पहुँच चुकी है/  दुनिया के नागरिक डेटा सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक क्षेत्र, डिसइंफॉर्मेशन एवं आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के बारे में विशेसज्ञ क्या सोचते हैं? और आने वाला "इंटरनेट गवर्नैंस कानून" कैसा होना चाहिए ? इस पर गहन चर्चा के लिए दुनियां के 81 देशों के प्रतिनिधियों ने यूनाइटेड नेशंस की इंटरनेट गवर्नेंस फॉरम द्वारा प्रस्तावित और  मिशन्स पब्लिकस द्वारा आयोजित बहस में हिस्सा लिया/  दो सत्रों में चलने वाली इस इंटरनेशनल बहस के दौरान ब्रेकआउट सेशंस में, हितधारकों, शोधकर्ताओं, और कानूनी - तकनीकी विशेषज्ञों ने इंटरनेट गवर्नेंस की रिपोर्ट अंतिम रूप देने  के लिए विस्तार से चर्चा की l

संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित इंटरनेट गवर्नेंस फॉरम के मिशन पब्लिक संयुक्त संवाद " इंटरनेट के भविष्य पर विश्व नागरिक संवाद की अंतिम रिपोर्ट" में स्वच्छ भारत मिशन के राष्ट्रीय एम्बेसडर एवम आईएलओ (यूनाइटेड नेशंस) के अंतराष्ट्रीय सूचना तकनीकी विशेषज्ञ डॉ डीपी शर्मा ने कहा कि यदि भविष्य में इंटरनेट की ग्लोबल गवर्नेंस एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मानव के लिए समान अवसर, अधिकार संरक्षण एवं मानवतावादी दृष्टिकोण से नियंत्रित नहीं किया तो दुनिया का भविष्य वेरोजगारी, व्यक्तिगत प्राइवेसी, सुरक्षा एवं मानवता के धरातल पर खतरे में पड़ जाएगा । हालात विगड़ें इससे पहले हमें जरूरी कदम उठाने होंगे और इस सन्दर्भ में अंतराष्ट्रीय तकनीकी विशेषज्ञों, कानूनी सलाहाकारों एवम यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल एजेंसियों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है l

डॉ शर्मा ने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए दुहराया कि आने वाले वक्त में बम, मिसाइल, बंदूकों से भी ज्यादा खतरनाक होगा 50 रुपये का रीचार्ज / मोबाइल पर 50 रुपये के रिचार्ज से आप दुनियाँ के किसी भी कोने में सोशल मीडिया या हैकिंग के माध्यम से धार्मिक, राजनैतिक या सामाजिक उन्माद पैदा कर उपद्रव एवं हिंसा को भड़का सकते हैं और अपराध कर सकते हैं/ ज्ञात रहे कि इस नवीन हथियार (मोबाइल + 50 रुपया रीचार्ज) के अपराध की रेंज बम, मिसाइल, बंदूकों से भी ज्यादा लम्बी एवं खतरनाक है l उन्होंने कहा कि कैसी विडंबना है कि "दुनियाँ की आवाज को बुलंद कर लोकतान्त्रिक हथियार मुहैया कराने वाला 'इंटरनेट' आज अपने खुदके लोकतंत्र के लिए जूझ रहा है, संघर्ष कर रहा है"l


ज्ञात रहे कि यह दुनिया का सबसे बड़ा डायलॉग है जिसमें 81 से  अधिक देश "इंटरनेट गवर्नेंस, डाटा राइट्स एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस" जैसे मुद्दों पर नियम कानून एवं पॉलिसी बनाने के लिए भाग ले चुके हैं और अब यह अंतिम दौर में है जिसकी रिपोर्ट यूनाइटेड नेशन्स महासचिव को सौंपी जाएगी । इस डायलाग का सञ्चालन अंटोनिये वेर्गेने ने किया जिसमें दुनियाभर के प्रतिनिधियों के अलावा मिशंस पब्लिकस की अंतराष्ट्रीय संचार सचिव मारिया ताज़ी भी उपस्थित थीं l

दूसरे दौर के इस संवाद में गूगल के मुख्य एवेंजलिस्ट एवं वाईस प्रेसिडेंट-विंट सेर्फ़, चेयरमैन ऑफ वी, इंटरनेट एवम यूनाइटेड नेशंस के मल्टीस्टेकहोल्डर सलाहकार समूह, इंटरनेट गवर्नेंस फोरम (IGF) की चेयरमैन - लिन सेंट अमौर, क्षेत्रीय सगाई निदेशक-लैटिन अमेरिका और कैरिबियन - एलीन सेजस, जर्मन सरकार के संघीय विदेश कार्यालय में राज्य मंत्री- नील्स एनेन, यमन की पूर्व सूचना और संचार मंत्री नादिया अल-सकफ, एवम संयुक्त राष्ट्र के अवर महासचिव फबरीज़ियो होचशिल्ड ने भी दूसरे दौर के डायलाग में भाग लिया/  ज्ञात रहे कि यह दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा डायलॉग है जिसमें 81 से अधिक देश  भाग ले चुके हैं।

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Solomon Fred, says on December 17, 2020, 3:39 AM

Excellent Contribution