अब अविवादित जमीनों के नामांतरण के लिए प्रदेश के लोगों को रजिस्ट्रियां लेकर तहसील दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने होंगे। ई-रजिस्ट्री होते ही नामांतरण की प्रक्रिया आनलाइन शुरू हो जाएगी। यदि जमीन की रजिस्ट्री को लेकर किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी तो जमीन खरीदने वाले के नाम पर 30 दिन के भीतर जमीन का नामांतरण हो जाएगा तथा खसरा रिकार्ड में भी भूमि स्वामी का नाम आटोमेटिक दर्ज हो जाएगा। बैरसिया तहसील में यह प्रक्रिया पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की गई थी अब इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। इसके लिए आरसीएमएस पोर्टल को इ-संपदा साफ्टवेयर के साथ लिंक किया जा रहा है। वहीं ई-नगर पालिका से भी इसका इंटीग्रेशन किया जा रहा है। इसके बाद अप्रैल महिने में नामांतरण के लिए किसी को तहसील कार्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे। पीआरसी से प्राप्त जानकारी के अनुसार आरसीएमएस के 4.0 पर काम चल रहा है। इसके लिए सर्वर को और अधिक सुद्ढ बनाया जा रहा हैं। वहीं ई-नगर पालिका सहित अन्य साफ्टवेयर से इसे इंटीग्रेट भी करवाया जाएगा। इसके बाद आम जनता को भी और अधिक सुविधाएं आसानी से मिल सकेगी।

तीन दिन में पटवारी को देनी होगी रिपोर्ट
ई-रजिस्ट्री होने के बाद से नामांतरण की प्रक्रिया के लिए अधिकतम एक माह का समय रखा गया है। ई-रजिस्ट्री होते ही उसकी एक कापी ऑनलाइन सीधे ही संबंधित हल्के के पटवारी के पास पहुंचेगी तथा जमीन खरीदकर ई-रजिस्ट्री कराने वाले व्यक्ति के पास इसका एसएमएस भी पहुंचेगा। पटवारी के पास इस रजिस्ट्री की जांच करके ऑनलाइन रिपोर्ट देने के लिए तीन दिन का समय होगा। इस समयसीमा में उसे यह जांचकर बताना होगा कि जिस जमीन की रजिस्ट्री हुई है वह जमीन सरकारी है या निजी। यदि जमीन निजी होगी तभी पंचायत सचिव आगे की प्रक्रिया करते हुए जमीन के विवादित या अविवादित होने का पता लगाने के लिए अखबार में इश्तेहार देगा, जिसमें आपत्ति के लिए 15 दिन की समयसीमा दी जाएगी। यदि आपत्ति नहीं आएगी तो सचिव ऑनलाइन नामांतरण की प्रक्रिया को पूरा कर देगा और पटवारी को निर्धारित समयसीमा में नामांतरण के आधार पर खसरा रिकार्ड में नए भूमि स्वामी के नाम जमीन दर्ज करनी होगी।

जमीन विवादित तो तहसीलदार के पास जाएगा प्रकरण
यदि रजिस्ट्री कराई गई जमीन विवादित निकलती है तो प्रकरण सचिव द्वारा सीधे तहसीलदार को भेज दिया जाएगा, ताकि वे उसकी सुनवाई कर निराकृत कर सकें। इसके लिए प्रकरण की समयसीमा निर्धारित नहीं है। जैसे ही प्रकरण तहसीलदार के पास पहुंचेगा, एसएमएस से भूमि स्वामी व खरीददार को इसकी जानकारी एसएमएस से पहुंच जाएगी, ताकि वे पेशियों पर पहुंच सकेंगे। PLC

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