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Friday, October 30th, 2020

हाजी अली दरगाह मामला : हिन्दू संगठन फैसले से नाराज

Haji-Ali-Dargah's-Caseआई एन वी सी न्यूज़ नई दिल्ली, अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चन्द्र प्रकाश कौशिक जी की अध्यक्षता में हिन्दू संगठनों की बैठक में हाजी अली दरगाह में महिलाओं के प्रवेश कराने के मुम्बई उच्च न्यायालय के फैसले से नाराजगी जाहिर गयी ।

बैठक में दारा सेना के अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने कहा कि 800 साल बाद एक हिन्दू शासक के हाथों देश की बागडौर आयी है,यह भारत को फिर से अंग्रेजों का गुलाम बनाने में लगी आतंकवादी ईसाई मिश्निरियों और उनकी अंग्रेजी और अंग्रेजियत के गुलाम जजों को रास नहीं आ रहा है। इसीलिये धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करके पहले हिन्दुओं को मोदी सरकार के खिलाफ भडकाने के लिये हिन्दुओं के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करते हुए दही हान्डी पर प्रतिबन्ध लगाकर हिन्दुओं को प्रशासन के खिलाफ भडकाने का प्रयास किया गया। और अब हाजी अली की दरगाह पर शरियत नियमों के खिलाफ महिलाओं को प्रवेश करने की इजाजत मुम्बई उच्च न्यायालय ने दी। किन्तु खुशी की बात यह है कि स्वामी ओम जी की इस अपील कि ‘‘हिन्दुओं अपना गुस्सा पुलिस और प्रशासन पर न उतारकर उन अन्यायधीशों के खिलाफ उतारो जो अनुच्छेद 26 के तहत मिले धार्मिक कार्यों के प्रबन्धन के मूलाधिकार अनुच्छेद 26 का हनन् कर रहे हैं। जिसका पालन करके पूरे देश ने समझदारी का परिचय देते हुए ही अपना गुस्सा सर्वोच्च और उच्च न्यायालय के अन्यायधीशों के खिलाफ उतारा।

श्री जैन ने कहा कि कल हम मुख्य अन्यायधीश और दही हान्डी को प्रतिबन्धित करने वाले अन्यायधीश अनिल रमेश दवे को जूता दिखाने उनके निवास स्थल 5 और 7 कृष्णा मेनन मार्ग पर भी गये थे। किन्तु पुलिस द्वारा पूरे इलाके को छावनी में तब्दील करने के कारण हम वहां तक नही जा सके। बाद में हिन्दू संगठनों ने दारा सेना के महामंत्री औ ओम जी हिन्दू सेना के अघ्यक्ष स्वामी ओम जी के नेतृत्व में इन अन्यायधीशों का पुतला जन्तर मन्तर पर फृूंककर अपना विरोध जताया।

बैठक में स्वामी ओम जी ने कहा कि 1857 में अंग्रेजों ने धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करके हिन्दू और मुस्लिम सैनिकों को गाय और सूअर की कारतूसों पर चढी चर्बी खिलाकर उन्हे ईसाई बनाने की साजिश रची थी। तब धर्म की रक्षा के लिये क्रांतिकारी मंगल पाण्डे ने लेफ्टिनेन्ट ह्यूसन और अंग्रेज बाॅब को गोली से उडा कर धर्म की रक्षा की थी। तब गाय और सूअर की चर्बी लगे करतूसों को मुंह से कुतरवाने के मामले ने इतना तूल पकडा था कि सम्राट बहादुर शाह जफर के नेतृत्व में हिन्दू राजाओं और सैनिकों ने अंग्रेजों के खिलाफ पहला स्वतन्त्रता संग्राम लडा था। तब हमारे बहादुर सैनिको की पलटन ने न केवल अंग्रेजों को चुन चुन कर मारा था बल्कि कश्मीरी गेट सहित अंग्रेजों के अनेकों चर्चो को भी आग के हवाले कर दिया था। हाल ही में मूर्ति विर्सजन पर रोक लगवाने वाले नरेन्द्र दाभोलकर ,गोविन्द पनसरे और कलबुर्गी को गोली से मारने वाले सनातन संस्था और हिन्दू जन जागृति समिति के धर्मरक्षक वीरेन्द्र तावडे को गिरफ्तार किया है। इससे जाहिर है कि जब-जब भी अंग्रेजो ग्राह्म स्टेंस और नरेन्द्र दाभोलकर जैसे राक्षसों ने धर्म का नाश करने के लिये सिर उठाया है तब-तब क्रान्तिकारी मंगल पाण्डे, धर्मरक्षक श्री दारा सिंह और धर्मरक्षक श्री वीरेन्द्र तावडे को भगवान ने धर्म की रक्षा के लिये भेजा है।

हिन्दू संगठनों ने तय किया है कि कल जैसे हिन्दू और मुसलमान एक जुट होकर धार्मिक आस्थाओं से खिलवाड करने वाले अन्यायधीशों को जूता मारने गये थे वैसी ही साम्प्रदायिक सौहार्दता कायम रखते हुए जल्द ही सर्वोच्च न्यायालय को हिन्दू और मुसलमान एकजुट होकर घेराव करेंगे।

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