शिवसेना ने कोरोना महामारी का लाभ उठाकर मरीजों से लाखों रुपये का बिल वसूलने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पार्टी का कहना है कि कोरोना प्रबंधन में प्रधानमंत्री सहित सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अच्छा काम किया है। पर, सरकार को निजी ठेकेदारों, एजेंसियों और अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। क्योंकि, उन्होंने बड़े पैमाने पर खराब वेंटिलेटर सप्लाई किए हैं। लोकसभा में कोरोना महामारी पर चर्चा की शुरुआत करते हुए विनायक राउत ने कहा कि केंद्र ने महामारी के दौरान राज्यों को जरूरत के मुताबिक वेंटिलेटर और पीसीए संयंत्र देने का आश्वासन दिया था। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि पीएम केयर्स निधि के तहत दिए गए 60 फीसदी वेंटिलेटर काम नहीं कर रहे हैं। कई बार शिकायत के बावजूद कंपनी अपना इंजीनियर नहीं भेज रही है। उन्होंने कहा कि पीसीए संयंत्रों के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। कई अस्पतालों में अभी संयंत्र नहीं लगे हैं। ऐसे में जिन एजेंसियों और ठेकेदारों ने यह काम किया है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ उन्होंने केंद्र पर टीके उपलब्ध कराने में गैर भाजपा शासित राज्यों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि महामारी के दौरान केंद्र को इससे बचना चाहिए था। कोरोना पर बहस में हिस्सा लेते हुए भाजपा सांसद रतनलाल कटारिया ने कहा कि महामारी के दौरान देश में भुखमरी से मौत का एक भी मामला नहीं आया है। इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देते हुए उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कोरोना के खिलाफ सफल टीकाकरण अभियान पर भी सवाल उठा रहे हैं। जबकि भारत के टीकाकरण अभियान की पूरी दुनिया प्रशंसा कर रही है। PLC.

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