sanjaykumaraazad– संजय कुमार आज़ाद –                  

 

साल 2012 के 1 अक्तूबर को नवभारत टाइम्स ने एक कार्टून व्यंगय छापा था.उस समय तथाकथित भद्र मानुष का खेल ? कहे जाना वाला क्रिकेट के एक खिलाड़ी रोहित शर्मा का सितारा गर्दिश में था उसी को ध्यान में रखकर ये कार्टून व्यंग लिखा –
-चिंटू (पिंटू से )-   मैगी कैसे बनती है?
पिंटू-            सिंपल है…………
स्टेप 1 नुडल्स और पानी को मिलाइए .
स्टेप 2- गैस चूल्हा ऑन कीजिये
स्टेप 3- रोहित शर्मा की इनिग्स देखिये और वापस आइये
स्टेप 4 मैगी तैयार….बस

उस बक्त का यह व्यंग्य बहुत कुछ कहता है.इस देश को क्रिकेट और इसके लिए आवश्यक विज्ञापन ने हमारे संस्कार और संस्कृति में जो जहर घोला उसका दुष्परिणाम हमारे युवा वर्ग भुगत रहे हैं . हमने संयुक्त परिवार को छोड़ जिस तरह एकल परिवार की ओर कदम बढ़ाया वह, देश में फास्ट फ़ूड बिकृति के रूप में आज समाज को तहस नहस कर रही है. जिस तरह से विदेशी कम्पनियो ने क्रिकेट को और विज्ञापन के सहारे अपने घटिया उत्पाद का प्रमुख बाज़ार भारत को बनाया वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है.

देश भर में नेस्ले नामक बहुराष्ट्रीय कम्पनी का उत्पाद मैगी भारत के लोगो के लिए जिस धीमी ज़हर का प्रसार किया उसका कलई अब खुलने लगा.भारत के विभिन्न भागो से मैगी के लिए गये सैम्पल में जो तत्व उसमे पाए गए वह मानव शरीर के लिए अत्यंत घातक है. नेस्ले के मैगी उत्पाद जो “2 मिनट में तैयार और हमारी क्षुधा शांत” जब देश के प्रयोगशाला में भेजे गये तो इसमें E 621- मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG) जैसे धीमा ज़हर जो गर्भवती महिला और बच्चों के लिए घातक है ये अल्जाइमर पार्किसन मिर्गी हार्ट अटैक जैसे रोग और मानव शारीर के तंत्रिका तंत्र सहित कोशिकाओ को नष्ट करती है. सीसा जिसकी अधिकतम मात्रा 2.5 हो उससे कहीं तिगुना चौगना पाया गया .आखिर भारत में ही इन कम्पनियो की जुर्रत कैसे होती है इस तरह के अमानवीय कार्य करने की.

भारत के बाजारों में बिकने बाले अधिकाँश उत्पाद जो संदेहास्पद है और खाद्य सुरक्षा के मानदंडों को मुंह चिढा रही है जिनमे कुछ निचे है-

यूनिलिवर का उत्पाद -नॉर (Knorr) रेडी इन 1 मिनट स्वीट कोर्न वेज है.चिंग्स सेक्रट हंगर की बजाओ  मिक्स बेज इंस्टैंट सूप रेडी इन 1 मिनट ;चिंग्स सेक्रट हंगर की बजाओ टोमैटो इंस्टैंट सूप रेडी इन 1 मिनट ;चिंग्स सेक्रट हंगर की बजाओ  मंचोव इंस्टैंट सूप रेडी इन 1 मिनट ;चिंग्स सेक्रट बेज मंचूरियन मसाला ;चिंग्स सेक्रट पनीर चिल्ली मसाला ;चिंग्स सेक्रट बेज मंचूरियन मसाला; चिंग्स सेक्रट कमाल की स्केज्वान चटनी ये सारे उत्पाद विदेशी कम्पनी के जो अपने कबर पर हरा रंग यानी शाकाहारी होना दर्शाता है जबकि उसी कबर पर जो तत्व के बारे में लिखे है उसके अनुसार उपरोक्त सभी उत्पाद में E 627 (Disodium Guanylate) जो मछली या यीस्ट से और E631(Disodium Inosinate)जो मांस या मछली से बनते हैं फिर ये उत्पाद शाकाहारी कैसे है?

ध्यान दें- E627 Disodium guanylate Flavour enhancer.Isolated from sardines or yeast extract; not permitted in foods for infants and young children. Persons with gout, hyperactivity, asthmatics and aspirin sensitive’s should avoid it.

E631 Disodium inosinateMay be prepared from meat or sardines; not permitted in foods for infants and young children. Gout sufferers avoid. Asthmatic people should avoid inosinates. As inosinates are metabolised to purines, they should be avoided by people suffering from gout. Frequently contains MSG(621).

( Soursces—http://www.veggieboards.com/forum/60-vegan-support-forum/83207-flavour-enhancers.html)

नेस्ले, नेस्ले बेबी पाउडर (डब्बे का दूध) बेचती है। भारत में इसके उत्पाद नैन प्रो 3 मिल्क जिसके पिने से तमिलनाडु में १८ माह की बच्ची जो जुड़वां थी बीमार पड गयी और जब इस डीब्बेबंद दूध की जांच की गयी तो इसमें २८ जिंदा लार्वा और २२ राईस बिब्ल्स कीड़े पाए गए .यूरोप के देशों में बेबी पाउडर बिकता नहीं, यूरोप के देशों में बेबी पाउडर को बेबी किलर कहते हैं। क्योंकि इसमें जहर है, तो पूरे यूरोप में ये जो बेबी पाउडर “बेबी किलर” कहा जाता है वही बेबी पाउडर धड़ल्ले से भारत के बाजार में बिक रहा है जिस पर सिर्फ लिखा होता है माँ का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम है”, बस बात ख़त्म। होता ये कि भारत सरकार इन डब्बे के दूध को भारत में प्रतिबंधित कर देती, लेकिन नहीं.भारत की पढ़ी-लिखी और तथाकथित प्रगतिशील माताओं की हालत भी कुछ वैसी ही है, जो जितनी ज्यादा पढ़ी-लिखी हैं वो उतना ही ज्यादा बेबी पाउडर पिलाती हैं अपने बच्चों को.

भारत में बिकने बाले डिब्बेबंद खाद्य पदार्थो या 2 मिनिट में तैयार होने बाले उत्पादों हो या ठन्डे पेय बोतल इनमें सोडियम मोनो ग्लूटामेट ,पोटैसियम सोरबेट, ब्रोमिनेटेड वेजिटेबल ऑइल (BVO ये सभी घातक रसायन हैं जिससे कैंसर होता है.मिथाइल बेन्जीन – ये किडनी को ख़राब करता है.सोडियम बेन्जोईट – ये मूत्र नली का, लीवर का कैंसर करता है.एडोसल्फान – ये कीड़े मारने के लिए खेतों में डाला जाता है और कार्बन डाईऑक्साइड – जो कि बहुत जहरीली गैस है और जिसको कभी भी शरीर के अन्दर नहीं ले जाना चाहिए और इसीलिए कोल्ड ड्रिंक्स को “कार्बोनेटेड वाटर” कहा जाता है .

हम अपने घर में अक्सर मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती/लिक्विड/टिकिया इस्तेमाल करते हैं। अलग-अलग नामों से बाजार में वो बिक रहा है। इनमें इस्तेमाल होने वाले केमिकल हैं – डी एथिलीन, मेल्फोक्विन और फोस्फिन है , ये तीनों खतरनाक केमिकल हैं और ये तीनों केमिकल यूरोप और अमेरिका सहित 56 देशों में बंद हैं और पिछले 20 -22 साल से बंद हैं।किन्तु भारतीय बाज़ार में ये धड़ल्ले से बिकती है.

इन्ही जहरों से भरे उत्पाद का प्रचार भारत के क्रिकेटर और अभिनेता/अभिनेत्री करते हैं पैसे के लालच में, उन्हें देश और देशवाशियों से प्यार होता तो ऐसा कभी नहीं करते. भारत में खाध्य पदार्थों के लिए बनाए गए क़ानून “फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैण्डर्ड एक्ट 2006” के तहत किसी भी कम्पनी या उत्पाद का विज्ञापन गुमराह करनेबाला भ्रामक या गलत है तो कम्पनी और विज्ञापनकर्ता सहित प्रसारक पर कठोर कारवाई करने का प्रावधान है इसके अलावे भारतीय दंड संहिता की धारा 270, 273 और 276 के तहत इस तरह के कृत्य दंडनीय अपराध है. इन कम्पनियो द्वारा तय मानक का मानदंड माना जाय इस पर निगरानी करने के लिए भी भारत में “भारतीय खाध्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI)” सहित राज्यों के भी अपने तंत्र है.  फिर भारत सरकार या राज्यों की सरकार समुचित निगरानी क्यों नही करती है. अत्यंत चिंताजनक स्थिति है .

इन संस्थानों में कार्य करने बाले भ्रष्ट अधिकारिओं के मिलीभगत से इस देश का भविष्य धीमे ज़हर की चपेट में है.निगरानी के इतने तंत्र के बाबजूद इस देश के उपभोक्ता ज़हर खा अपनी जीवन को लील रहे है और इस देश का नौकरशाह और नेता चैन की बंशी बजा रहाहै. यह तो उस उक्ति को चरितार्थ करती है की जब ‘रोम जल रहा था तो नीरो वंशी बजा रहा था”.

भारत की अधिकाँश जनता आज भी अपने हितो को नही जानते .भारत विश्व का सबसे बड़ा उपभोक्ता का बाज़ार है .आम भारतीय लोगो के अपने स्वाथ्य के प्रति उदासीनता और सरकार की भ्रष्ट व्यबस्था के बीच देश का भविष्य इस ज़हर का शिकार हो रहा है .देश के हर उस उत्पाद को उसके कम्पनी और उसके विज्ञापन करता एवं विज्ञापन की भाषा पर सरकार कड़ी निगाह रख उसका नियमित जांच यदि करवाती तो आज भारत में इन कंपनियो की ये मजाल नही थी की हम भारतीयों को यूरोपीय और अमेरिकी देशों में प्रतिबंधित उत्पाद हमें परोस हमारे जीवन को लीलती.

आज भी जब देश के बिभिन्न भागो में मैगी जैसे उत्पादों में तय मानदंडो से अधिक घातक ज़हर पाए जा रहे तो कोई १५ दिन कोई एक माह के लिए राज्यों में मैगी को प्रतिबंधित कर रही है यह देश के नागरिको के साथ भद्दा मज़ाक नहीं तो क्या है.सरकार बाज़ार में देशी विदेशी हर कंपनी के 1 मिनट और 2 मिनट बाले फ़ूड पैकेटो या पेय पदार्थों की सैम्पल लेकर अबिलम्ब जांच करवाए तथा शाकाहारी और मांसाहारी उत्पादों के घालमेल से भारत के जनता को उबारे. .खान पान जैसे चीजों में यदि मिलाबट पाई गयी है तो उन कम्पनियो की सम्पति सरकार तुरंत जव्त कर पुरे देश में एकसाथ ऐसे उत्पादों को प्रतिबंधित कर सम्बंधित कम्पनियो के मालिको और अधिकारिओं पर कठोरतम कारवाई करे.ताकि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृति ना हो .फास्ट फ़ूड जो इस देश में मौत के वाहक के रूप में अपना पंजा फैला रही है अब समय है की इन राक्षसों के प्रति कठोरतम कारवाई सरकार करे.

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 sanjay-kumar-azadपरिचय :-

संजय कुमार आजाद

स्वतंत्र लेखक व पत्रकार हैं

पता : शीतल अपार्टमेंट,निवारणपुर रांची 834002
ईमेल — azad4sk@gmail.com  , फोन–09431162589

 

*लेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं और आई.एन.वी.सी का इससे सहमत होना आवश्यक नहीं ।

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