Report of the Sub-Group of Chief Ministers on Rationalization of Centrally Sponsored Schemes submitted to PM,shivrajsingh chauhan with narendra modi,shivrajsingh chauhan ,narendra modiआई एन वी सी न्यूज़ नई दिल्ली , मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री एवं नीति आयोग के अंतर्गत गठित केन्द्र पोषित योजना उपसमिति के संयोजक श्री शिवराज सिंह चौहान ने उपसमिति के अन्य सदस्यों के साथ अनुशंसा के साथ रिपोर्ट प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को सौंपी। इस अवसर पर श्री चौहान के साथ अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, झारखंड, मणिपुर और तेलंगाना राज्यों के मुख्यमंत्री सहित केन्द्र शासित प्रदेश पाण्डिचेरी के उपराज्यपाल मौजूद थे। यह उपसमिति केन्द्र पोषित योजनाओं के फण्डिंग पैटर्न और योजनाओं के युक्तियुक्तकरण करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री द्वारा मार्च 2015 में गठित की गयी थी।

रिपोर्ट सौंपने के बाद उपसमिति के संयोजक श्री शिवराज सिंह चौहान ने आई एन वी सी न्यूज़ बताया कि यह रिपोर्ट टीम इंडिया की भावना से काम करने के उद्देश्य को मद्देनजर रखते हुए तैयार की गई है। इसमें मुख्यतः केन्द्र परिवर्तित योजनाओं के फण्डिंग पैटर्न का बेहतर प्रयोग कैसे करें और साथ ही केन्द्र और राज्य सरकार दोनों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। श्री चौहान ने बताया कि इस रिपोर्ट को तैयार करने में हमने न केवल उपसमिति के सदस्य राज्यों की सलाह ली है बल्कि हमने केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और अन्य राज्य सरकारों से भी सलाह मशविरा किया है। यह रिपोर्ट सर्वसम्मति से तैयार कर अनुशंसाएं प्रधानमंत्री को सौंपी गई हैं।

श्री चौहान ने अनुशंसाओं के बारे में चर्चा करते हुए  बताया कि अभी तक चालू 72 केन्द्र पोषित योजनाओं को घटाकर 50 कर दिया गया है। योजनाओं के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि योजनाओं को मुख्यतः तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है। पहला कोर सेक्टर, दूसरा कोर आफ कोर सेक्टर और तीसरा ऐच्छिक। कोर सेक्टर में मुख्यतः पेंशन, मनरेगा आदि और कोर आफ कोर सेक्टर में स्वास्थ्य, सिंचाई, ऊर्जा आदि और ऐच्छिक में राज्य आधारित योजनाएं शामिल हैं। अनुशंसाओं के अनुसार कोर ऑफ कोर सेक्टर के लिए फण्डिंग पैटर्न 90ः10 यथावत रखा जाएगा, कोर सेक्टर के लिए पहाड़ी राज्यों के लिए 90ः10 रहेगा और अन्य राज्यों के लिए फण्डिंग पैटर्न 60ः40 रखने की सिफारिश की गई है। ऐच्छिक योजनाओं के लिए पहाड़ी राज्यों के लिए 80ः20 और अन्य राज्यों के लिए 50ः50 फण्डिंग पैटर्न रहेगा। केन्द्र शासित राज्यों के लिए 100 प्रतिशत केन्द्र सरकार पूर्व की भांति सहायता करती रहेगी। श्री चौहान ने इन सिफारिशों को चालू वित्त वर्ष से ही लागू करने की मांग की है। साथ ही राज्यों के लिए 25 प्रतिशत अलग से फ्लैक्सी फण्ड रखने का भी सुझाव दिया है जिसे राज्य सरकार अपनी जरूरत और मांग के अनुसार योजनाओं में खर्च कर सकेगा। आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय दो साल तक यथावत रखा जाने की भी बात कही है। श्री चौहान ने मार्च 2015 तक स्वीकृत योजनाओं का फण्डिंग पैटर्न यथावत रखने की भी वकालत की है। श्री चौहान ने दी गई अनुशंसाओं की समीक्षा दो वर्ष बाद किये जाने की भी बात कही। श्री चौहान ने नीति आयोग से प्रत्येक राज्य की हर छह माह में बैठक करने की भी मांग की। राज्य सरकारों द्वारा समय पर उपयोग प्रमाणपत्र न दिये जाने पर केन्द्र सरकार द्वारा समय पर अगली किश्त जारी न किये जाने की भी समस्या के बारे में सुझाव दिये।