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Friday, September 17th, 2021

गणेश जी के प्रत्येक अवतार का रंग भिन्न है

धर्म के साथ गणेश उत्सव चल रहा है, जिसके चलते देश में जोरों-शोरो से गणपति बप्पा की आराधना का सिलसिला चल रहा है। बता दें प्रत्येक वर्ष भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि गणेश चतुर्थी के साथ ही गणेश उत्सव का आगाज़ होता है, जो दस दिन बाद अनंत चतुर्थी के दिन गणपति विसर्जन के साथ समाप्त होता है। तो गणेश उत्सव के इस खास मौके पर जानते हैं गणेश जी के संबंधित खास बातें, जिनके बारे में लोग बहुत कम जानते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश जी ने कई अनेक जन्म लिए थे। सतयुग में इन्होंने कश्यप व अदिति के यहां महोत्कट विनायक मंदिर नाम से जन्म लेकर देवांतक और नरांतक वध किया था। तो वहीं त्रेतायुग में उन्होंने उमा के गर्भ जन्म लिया और गणेश के रूप में प्रकट हुए। इसके अलावा सिंधु नामक दैत्य का विनाश करने के कारण इन्हें मयुरेश्वर नाम से जाना जाता है।

इसके अतिरिक्त द्वापर में माता पार्वती के यहां पुन: जन्म लेकर ये गणेश कहलाए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऋषि पराशर ने उनका पालन पोषण किया और इन्होंने वेदव्यास के विनय करने पर सशर्त महाभारत लिखी।

प्रचलित मान्यताओं के अनुसार एक बार देवी पार्तवी ने कार्तिकेय और गणेश जी को कहा कि सर्वप्रथम सभी तीर्थों का भ्रमण कर आएगा, उसी को मैं यह मोदक दूंगी। माता की ये आज्ञा पाते ही कार्तिकेय जी ने मयूर पर आरूढ़ होकर मुहूर्तभर में ही सब तीर्थों का स्नान कर लिया। इधर गणेश जी का वाहन मूषक होने के कारण वे तीर्थ भ्रमण में असमर्थ थे। तब गणेश जी ने श्रद्धापूर्वक माता-पिता की परिक्रमा की और माता-पिता के सम्मुख खड़े हो गए। माता पिता की भक्ति देख माता ने उन्हें मोदक दे दिया और उनकी सबसे पहले पूजा होने का वरदान भी दिया। कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यही कारण है गणेश दी सर्वप्रथम पूज्नीय देव माना जाता है।

माना जाता है कि अन्य देवी-देवताओं की तुलना में गणेश जी के प्रत्यक अवतार का रंग भिन्न है। को वहीं शिव पुराण की बात करें तो गणेश जी के शरीर का मुख्य रंग लाल व हरा माना जाता है। जिसमें लाल रंग शक्ति का तथा हरा रंग समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसका अर्थात माना जाता है कि जहां गणेश जी का वास होता, वहां शक्ति और समृद्धि दोनों का वास होता है। PLC

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