देवल आशीष की जीवनपर्यन्त याद की जाने वाली कुछ रचनाएँ
1. मुक्तक
विश्व को मोहमई महिमा के असंख्य स्वरुप दिखा गया कान्हा सारथी तो कभी प्रेमी बना, तो कभी गुरु-धर्म निभा गया कान्हा रूप विराट धरा तो, धरा तो धरा हर लोक पे छा गया कान्हा रूप किया लघु तो इतना के यशोदा की गोद में आ गया कान्हा चोरी छुपे चढ़ बैठा अटारी पे, चोरी से माखन खा गया कान्हा गोपियों के कभी चीर चुराए, कभी मटकी चटका गया कान्हा घाघ था घोर, बड़ा चितचोर था, चोरी में नाम कमा गया कान्हा मीरा के नैन की रैन की नींद औ’ राधा का चैन चुरा गया कान्हा राधा ने त्याग का पंथ बुहारा, तो पंथ पे फूल बिछा गया कान्हा राधा ने प्रेम की आन निभाई, तो आन का मान बढ़ा गया कान्हा कान्हा के तेज को भा गई राधा तो राधा के रूप को भा गया कान्हा कान्हा को कान्हा बना गई राधा तो राधा को राधा बना गया कान्हा
2. गीत
लगती हो रात में प्रभात की किरन-सी किरन से कोमल कपास की छुअन-सी छुअन-सी लगती हो किसी लोकगीत की लोकगीत जिसमें बसी हो गंध प्रीत की प्रीत को नमन एक बार कर लो प्रिये एक बार जीवन में प्यार कर लो प्रिये प्यार ठुकरा के मत भटको विकल-सी विकल हृदय में मचा दो हलचल-सी हलचल प्यार की मचा दो एक पल को एक पल में ही खिल जाओगी कमल-सी प्यार के सलोने पंख बांध लो सपन में सपन को सजने दो चंचल नयन में नयन झुका के अपना लो किसी नाम को किसी प्रिय नाम को बसा लो तन-मन में मन पे किसी के अधिकार कर लो प्रिये एक बार जीवन में प्यार कर लो प्रिये प्यार है पवित्र पुंज, प्यार पुण्यधाम है पुण्यधाम जिसमें कि राधिका है, श्याम है श्याम की मुरलिया की हर गूंज प्यार है प्यार कर्म, प्यार धर्म, प्यार प्रभुनाम है प्यार एक प्यास, प्यार अमृत का ताल है ताल में नहाए हुए चन्द्रमा की चाल है चाल बनवासिन हिरनियों का प्यार है प्यार देवमंदिर की आरती का थाल है थाल आरती का है विचार कर लो प्रिये एक बार जीवन में प्यार कर लो प्रिये प्यार की शरण जाओगी तो तर जाओगी जाओगी नहीं तो आयु भर पछताओगी पछताओगी जो किया अपमान रूप का रूप-रंग-यौवन दोबारा नहीं पाओगी युगों की है जानी-अनजानी पल भर की अनजानी जग की कहानी पल भर की बस पल भर की कहानी इस रूप की रूप पल भर का, जवानी पल भर की अपनी जवानी का सिंगार कर लो प्रिये एक बार जीवन में प्यार कर लो प्रिये
3. ग़ज़ल
हम अंधेरों को दूर करते हैं अपनी ग़ज़लों से नूर करते हैं हो गए आप कितना पत्थर-दिल आईना चूर-चूर करते हैं ग़ैर तो ग़ैर हैं, करें न करें चोट अपने ज़रूर करते हैं सब तो शामिल हैं उनकी महफ़िल में हम भला क्या क़ुसूर करते हैं आएगी कब यहाँ वो ख़ुशहाली बात जिसकी हुज़ूर करते हैं
4. गीत
मुस्कुरा कर मुझे यूँ न देखा करो मृगशिरा-सा मेरा मन दहक जाएगा चांद का रूप चेहरे पे उतरा हुआ सूर्य की लालिमा रेशमी गाल पर देह ऐसी कि जैसे लहरती नदी मर मिटें हिरनियाँ तक सधी चाल पर हर डगर पर संभल कर बढ़ाना क़दम पैर फिसला, कि यौवन छलक जाएगा मुस्कुरा कर मुझे यूँ न देखा करो मृगशिरा-सा मेरा मन दहक जाएगा तुम बनारस की महकी हुई भोर हो या मेरे लखनऊ की हँसी शाम हो कह रही है मेरे दिल की धड़कन, प्रिये! तुम मेरे प्यार के तीर्थ का धाम हो रूप की मोहिनी ये झलक देखकर लग रहा है कि जीवन महक जाएगा मुस्कुरा कर मुझे यूँ न देखा करो मृगशिरा-सा मेरा मन दहक जाएगा
5. गीत
प्रिये तुम्हारी सुधि को मैंने यूँ भी अक्सर चूम लिया तुम पर गीत लिखा फिर उसका अक्षर-अक्षर चूम लिया मैं क्या जानूँ मंदिर-मस्जिद, गिरिजा या गुरुद्वारा जिन पर पहली बार दिखा था अल्हड़ रूप तुम्हारा मैंने उन पावन राहों का पत्थर-पत्थर चूम लिया तुम पर गीत लिखा फिर उसका अक्षर-अक्षर चूम लिया हम-तुम उतनी दूर- धरा से नभ की जितनी दूरी फिर भी हमने साध मिलन की पल में कर ली पूरी मैंने धरती को दुलराया, तुमने अम्बर चूम लिया तुम पर गीत लिखा फिर उसका अक्षर-अक्षर चूम लिया
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हिंदी गीत के सबसे लाड़ले रचनाकार- देवल आशीष

देवल आशीष21 मार्च 1971 को लखनऊ में जन्मे देवल आशीष हिंदी गीत के सबसे लाड़ले रचनाकार हैं। जनसंचार एवम् वाणिज्य में स्नातकोत्तर की उपाधियाँ प्राप्त करने वाले इस रचनाकार का मूल विषय प्रेम है। सात्विक प्रेम और हृदयस्पर्शी संवेदना देवल के गीतों में एकरूप होती दिखाई देती है। इस दौर ने देवल के गीतों पर झूमते हज़ारों श्रोताओं का रोमांच देखा है। मन से लिखने वाला और मन से पढ़ने वाला ये गीतकार हिंदी कवि-सम्मेलन मंच की वर्तमान पीढ़ी का लोकप्रिय कवि था। जो सौम्यता देवल के लेखन में है, बिल्क़ुल वही सच्चाई और सादगी देवल के जीवन में भी थी। आडंबर न तो उनके लेखन का हिस्सा है न ही उनके जीवन का। अनेक संस्थाओं ने इस मधुर गीतकार को विविध सम्मानों तथा पुरस्कारों से अलंकृत किया है।
कार्यक्षेत्र- देश के विभिन्न काव्य-मंचो से काव्य-पाठ, विभिन्न टी.वी. चैनलों एवंआकाशवाणी से काव्य-पाठ प्रसारित।
पुरस्कार व सम्मान- उत्तरप्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा सम्मानित। प्रकाशित कृतियाँ- अक्षर-अक्षर चूम लिया (नवचेतन प्रकाशन)
गीत के इस महान व्यक्तित्व का 4 जून 2013 को लखनऊ में निधन हो गया।