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Sunday, October 24th, 2021

दो एक्सप्रेस वे से मिलेगी दिल्ली को राहत

दिल्ली एनसीआर के शहरों को बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। वाहनों के भीड़भाड़ से राहत देने के लिए दिल्ली में आउटर रिंग रोड के साथ एक और नई रिंग तैयार करने का भी प्रस्ताव है। सभी एंट्री एक्जिट पर स्लिप रोड होगा ताकि वाहनों को दिक्कत न हो। दूसरे रिंग रोड से न तो वाहनों का जाम लगेगा और गंतव्य तक भी जल्द पहुंचेंगे।

दो एक्सप्रेस वे से मिलेगी राहत

पेरिफेरल एक्सप्रेस वे के बाहर सर्कुलर रीजनल एक्सप्रेस वे(सीआरई-2) बनाने का प्रस्ताव है। इसके तहत पानीपत, शामली, मेरठ, जेवर, नूंह, भिवाडी, रेवाड़ी, झज्जर, रोहतक और पानीपत को जोड़ा जाएगा। एनसीआर के शहरों को जोड़ने के लिए एक सर्कुलर रीजनल एक्सप्रेस वे(सीआरई-3) का करनाल, मुजफ्फनगर, गढ़मुक्तेश्वर, नरौरा, अलीगढ़, मथुरा, ढींग, अलवर, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी, भिवानी, जींद, कैथल और करनाल तक विस्तार किया जाएगा।

मिसिंग लिंक जल्द होंगे पूरे, बढ़ेगी सहूलियतें

ड्राफ्ट प्लान में राज्यों को प्राथमिकता के आधार पर मिसिंग लिंक(शेष सड़क)को पूरा करने करने के लिए संभावनाएं तलाशने को कहा गया है। इससे एनसीआर के शहरों का जुड़ाव एक्सप्रेस वे सहित अन्य राजमार्गों से भी हो सकेगा। इसके तहत राजनगर एक्सटेंशन -रोड औऔर चिल्ला बार्डर से महामाया फ्लाईओवर वाली सड़क को भी जोड़ने पर विचार किया जा रहा है। इससे गाजियाबाद और नोएडा से बेहतर कनेक्टिविटी होगी। ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे से सुविधाओं में बढ़ोतरी को देखते हुए दोनों सीआरआई बनाने की दिशा में पहल की गई है।

सभी प्रमुख सड़कों से होगी कनेक्टिविटी

एलिवेटेड रिंग रोड के साथ दोनों एक्सप्रेस वे तक की कनेक्टिविटी देने के लिए सभी प्रमुख सड़कों को स्लिप रोड से जोड़ा जाएगा। तीनों सड़कों को दूसरी सड़कों से बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए पहले ही प्रस्ताव तैयार किया गया है। इन सड़कों को गंगा एक्सप्रेस वे, दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे से भी जोड़ा जाएगा। इससे वाहनों को कम दूरी तय कर जल्द पहुंचने का मौका मिलेगा।

200 से अधिक शहर और कस्बों से होगी कनेक्टिविटी

दिल्ली एनसीआर में वाहनों की भीड़ को देखते हुए एनसीआर के दायरे में आने वाले 200 से अधिक शहर और कस्बों को शामिल किया गया है। बढ़ती आबादी और शहरों के विस्तार को देखते हुए रिंग रोड, एक्सप्रेस वे के बनने से एक से दूसरे शहर में आवागमन में काफी कम वक्त लगेगा। इससे वाहनों में ईंधन की बचत से प्रदूषण स्तर भी कम होगा। फिलहाल, दिल्ली में एक करोड़ से अधिक वाहन पंजीकृत है और दूसरे शहरों को शामिल करने पर संख्या में बढ़ोतरी को देखते हुए प्रस्ताव में ये प्रावधान किए गए हैं।

एक्सप्रेस वे पर 200 किलोमीटर पर होगी एयर एंबुलेंस की सुविधा

राष्ट्रीय राजमार्ग, राजमार्ग और एक्सप्रेस वे पर सफर के दौरान यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से ट्रॉमा सेंटर बनाने के लिए पेट्रोल पंपों के आसपास की जगहों का इस्तेमाल किया जाएगा। प्रत्येक ट्रॉमा सेंटर में ब्लड बैंक का होना अनिवार्य होगा ताकि गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सके। एंबुलेंस और हेल्पलाइन की सुविधा भी होगी ताकि सफर के दौरान वाहन चालक सुरक्षित महसूस करे। ट्रॉमा सेंटर की दूरी 50 किलोमीटर या एक घंटे के अंदर(गोल्ड ऑवर)की दूरी पर हो। एक्सप्रेस वे पर प्रत्येक 200 किलोमीटर के अंतराल पर एयर एंबुलेंस की भी सुविधा दी जाएगी ताकि मरीजों को राहत मिल सके। PLC

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