-------- दोहे  ---------- 
पन्नो मे इतिहास के, लिखा स्वयं का नाम ! दो हजार पंद्रह  चला,.....यादें छोड तमाम !!
दो हजार पंद्रह  चला, छोड सभी का साथ ! हमें थमा कर हाथ में, नये साल का हाथ !!
ढेरों मिली बधाइयाँ,........बेहिसाब संदेश ! मिली धड़ी की सूइंयाँ,ज्यों ही रात "रमेश"!!
मदिरा में डूबे रहे, ......लोग समूची रात ! नये साल की दोस्तों, यह कैसी सुरुआत !!
नये साल की आ गई, नयी नवेली भोर ! मानव पथ पे नाचता,जैसे मन मे मोर !!
नये साल का कीजिये, जोरों से आगाज ! दीवारों पर टांगिये, .नया कलैंडर आज !!
घर में खुशियों का सदा,. भरा रहे भंडार ! यही दुआ नव वर्ष मे,समझो नव उपहार !!
आयेगा नववर्ष में, ...शायद कुछ बदलाव ! यही सोच कर आज फिर, कर लेता हूँ चाव !!
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ramesh-sharmaरमेश-शर्मापरिचय -:
रमेश शर्मा
लेखक व् कवि

बचपन राजस्थान के जिला अलवर के एक छोटे से गाँव में गुजरा ,  प्रारंभिक पढाई आठवीं तक वहीं हुई, बाद की पढाई मुंबई में हुई, १९८४ से मुंबई में  एक प्राइवेट कम्पनी में नौकरी की शुरुआत की , बाद में नौकरी के साथ साथ टैक्स कन्सल्टन्ट का भी काम शुरू किया जो कि आज तक बरकरार है , बचपन से ही कविता सुनने का शौक था  काका हाथरसी जी को बहुत चाव से  सुनता था , आज भी उनकी कई कविता  मुझे मुह ज़ुबानी याद है बाद में मुंबई आने के बाद यह शौक शायरी गजल की तरफ मुड गया , इनकम टैक्स का काम करता था तो मेरी मुलाकात जगजीत सिंह जी के शागिर्द घनशाम वासवानी जी से हुई उनका काम मैं आज भी देखता हूँ उनके साथ साथ कई बार जगजीत सिंह जी से मुलाकात हुई ,जगजीत जी के कई साजिंदों का काम आज भी देखता हूँ , वहीं से लिखने का शौक जगा जो धीरे धीरे दोहों की तरफ मुड़ गया दोहे में आप दो पंक्तियों में अपने जज्बात जाहिर कर सकते हैं और इसकी शुरुआत फेसबुक से हुई फेसबुक पर साहित्य जगत की  कई बड़ी हस्तियों से मुलाकात हुई उनसे मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला

संपर्क -: 18/984,आश्रय को- ऑप. हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड  खेर नगर , बांद्रा (ईस्ट )  मुंबई ४०००५१  …  फोन ९७०२९४४७४४ –  ई-मेल. rameshsharma_123@yahoo.com