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Friday, July 30th, 2021

महाबलेश्‍वर स्थित गुफाओं में निपाह वायरस की पुष्टि

सतारा । सतारा जिले की महाबलेश्‍वर स्थित गुफाओं में निपाह वायरस होने की पुष्टि हुई है। महाबलेश्‍वर को भारत में मिनी कश्‍मीर भी कहा जाता है। हर वर्ष वहां पर हजारों की संख्‍या में देशी-विदेशी सैलानी पहुंचते हैं। वर्ष 2020 में पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने महाबलेश्‍वर की गुफा से चमगादड़ों की लार के नमूने लिए थे। इनकी जांच के दौरान ही इसमें निपाह वायरस मिलने की पुष्टि हुई है। बता दें कि ऐसा पहली बार हुआ है कि महाराष्‍ट्र में इस तरह से वायरस की पुष्टि चमगादड़ों में हुई है। पुष्टि के बाद सतारा जिले के महाबलेश्‍वर-पंचगनी के पर्यटन स्‍थलों को फिलहाल बंद कर दिया गया है।
बता दें कि ये कोई नया वायरस नहीं है ओर पूर्व में इसके संक्रमण को रोका जा चुका है। वर्ष 2018 में निपाह वायरस की वजह से केरल में 17 लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि, इस वायरस से संक्रमित करीब 75 फीसद मरीजों की मौत हो जाती है,इसकारण इस एक डेडली वायरस कहा जाता है। मौजूदा समय में भी इसकी कोई दवा तो उपलब्‍ध नहीं है, लेकिन जानकारों की राय में बचाव ही इसका एक उपाय है। ये वायरस मुख्यत: चमगादड़ से फैलता है। गौरतलब है कि जो चमगादड़ फल खाते हैं उनकी लार फलों पर ही रह जाती है।इसके बाद जब कोई भी अन्‍य जानवर या व्‍यक्ति इन फलों को खाता है, तब वहां इससे संक्रमित हो जाता है।
विश्‍व में वायरस का सबसे पहला मामला मलेशिया के कम्पंग सुंगाई गांव में सामने आया था। इस वजह से इस गांव के नाम के आगे ही निपाह जुड़ गया था। ये वायरस सबसे अधिक नुकसान दिमाग को पहुंचता है। यूएन की स्‍वास्‍थ्‍य एजेंसी विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि ये सूअर के जरिए इंसानों में फैला था। इसके बाद सिंगापुर में इसका पहला मामला सामने आया था। निपाह वायरस डब्ल्यूएचओ के शीर्ष दस वायरस में शामिल है। भारत में वर्ष 2001 और वर्ष 2004 में बांग्लादेश में भी इसके मामले सामने आए थे। वर्ष 1998 में मलेशिया में इसकी वजह से 100 से अधिक लोगों की जान गई थी। वायरस के लक्षणों की बात करें तब इसमें तेज बुखार आना, उल्‍टी और बेहोशी छाना, सांस लेने में तकलीफ शामिल है। PLC.

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