राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने  डीजल-पेट्रोल पर  वैट कम करने से इनकार करते हुए केंद्र सरकार से डीजल-पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी और कम करने की मांग की है।
गहलोत ने दो दिन के भीतर दोबारा बयान जारी कर कहा, “मेरा सुझाव है कि पेट्रोल, डीजल और गैस से एडिशनल एक्साइज ड्यूटी, स्पेशल एक्साइज ड्यूटी और सेस के रूप में जो राजस्व केंद्र सरकार इकट्ठा कर रही है इसमें और अधिक कमी करनी चाहिए, इससे राज्यों का वैट अपने आप ही कम हो जाएगा।”
गहलोत ने कहा “हम केन्द्र सरकार से लगातार पेट्रोल, डीजल की कीमतों पर नियंत्रण और कमी करने का आग्रह करते रहे हैं। अभी 4 नवंबर को केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी को कम करने के निर्णय से राज्य का वैट भी अपने आप पेट्रोल पर 1.8 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 2.6 रुपए प्रति लीटर कम हो गया। इस कमी से राज्य को  वैट राजस्व में 1800 करोड़ रुपए का सालाना नुकसान हुआ है।”
गहलोत ने कहा कि इस साल बजट के वक्त राज्य सरकार ने डीजल पेट्रोल पर 2 प्रतिशत वैटTकम किया गया था, जिसके कारण 1000 करोड़ का राजस्व नुकसान हो चुका है, अब 1800 करोड़ का और नुकसान होगा, इस तरह राजस्थान को 2800 करोड़ का राजस्व कम मिलेगा।
गहलोत ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह तेल कंपनियों को आगे कीमतें नहीं बढ़ाने के लिए पाबंद करें। ताकि पेट्रोल-डीजल के दामों में रोज-रोज होने वाली बढ़ोतरी रुके। उन्होंने कहा “पाबंद नहीं किया तो पहले की तरह दीपावली के बाद और 5 राज्यों के चुनाव के बाद कुछ ही दिनों में ऑयल कम्पनियां कीमत बढ़ा कर केंद्र-राज्य सरकार की ओर से दी गई राहत का लाभ जीरो कर देंगी।”
गहलोत ने कहा, “एक्साइज से जो हिस्सा सभी राज्य सरकारों को मिलता था, वह केंद्र सरकार ने पहले से ही कम कर दिया है। साथ ही, पहले से ही कोरोना की स्थिति के कारण राज्यों के राजस्व में भारी कमी आई है। प्रधानमंत्री जी से फिर आग्रह है कि राजस्थान का जीएसटी कम्पनसेशन का करीब 5963 करोड़ का भुगतान कराए।” PLC
 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here