Monday, April 6th, 2020

CAA :  22 लोगों की मौत, 322 अभी भी जेल में बंद


लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में नागरिकता संशोधन अधिनियम (Citizenship Amendment Act) के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में अब तक 22 लोग मारे गए हैं और 83 घायल हो गए. हिंसा फैलाने के आरोप में 883 लोगों को गिरफ्तार किया गया था जिसमें से 561 अब जमानत पर हैं और 322 अभी भी जेल में हैं. प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल (Additional Advocate General Manish Goyal) ने सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में हलफनामा दाखिल कर यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि हिंसा के दौरान 45 पुलिसकर्मी और अधिकारी भी हुए घायल थे. उन्होंने घायलों की सूची भी प्रस्तुत की. यूपी में पिछले साल 20 और 21 दिसंबर को सीएए विरोधी प्रदर्शन किया गया था.

अगली सुनवाई अब 18 मार्च को होगी

कोर्ट ने इस बीच प्रदेश सरकार और याचीगण के अधिवक्ताओं को अपने पक्ष में हलफनामा आदि दाखिल करने का निर्देश दिया था. सीएए के विरोध में प्रदर्शन करने वालों के साथ पुलिस ज्यादती के मामले में हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर अगली सुनवाई अब 18 मार्च को होगी. राज्य सरकार के वकील ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की पीठ के समक्ष हलफनामा दाखिल कर यह जानकारी दी.


111 लोगों की जमानत अर्जिया अदालतों में लंबित

मनीष गोयल ने बताया कि घायलों को उपचार उपलब्ध कराने के लिए 24 घंटे एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराई गई. यह कहना गलत है कि एंबुलेंस पर किसी प्रकार की रोक लगाई गई. घायलों को उपचार की पूरी सुविधा दी गई है तथा पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने अस्पतालों में जाकर उनका हालचाल भी जाना. गोयल ने बताया कि बलवा और तोड़फोड़ की घटनाओं के सिलसिले में प्रदेश भर में कुल 883 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिसमें से 561 लोग जमानत पर बाहर आ चुके हैं. 322 लोग अभी भी जेल में हैं, जबकि 111 लोगों की जमानत अर्जिया अदालतों में लंबित हैं.

पुलिसकर्मियों के खिलाफ मिलीं 8 शिकायतें

प्रदर्शन के बाद हुई हिंसा के मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ 8 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, इन शिकायतों की जांच की जा रही है. 2 शिकायतें अदालतों में दाखिल की गईं हैं. इस प्रकार से नागरिकों की ओर से पुलिस वालों के खिलाफ कुल 10 शिकायतें प्राप्त हुई जिनकी जांच की जा रही है. कोर्ट ने कानपुर के बाबू पुरवा में मोहम्मद कासिम को गोली मारे जाने के मामले में पूछा कि क्या घायल का किसी मजिस्ट्रेट द्वारा बयान लिया गया है या नहीं? इस पर सरकारी वकील का कहना था कि वह इस बारे में जानकारी लेकर शीघ्र ही न्यायालय को अवगत कराएंगे. जबकि याची का पक्ष रख रहे वकीलों का कहना था कि अभी तक घायल का कोई बयान नहीं लिया गया है.

'ई-मेल भेजकर याचिका दाखिल करना सही नहीं है'

कोर्ट ने एसआईटी जांच के बारे में भी जानकारी मांगी कि क्या कोई ऐसी अधिसूचना जारी की गई है. इस पर सरकारी वकील ने कहा कि जांच के लिए शासन ने आदेश जारी किया है. अजय कुमार द्वारा दाखिल याचिका का विरोध करते हुए अधिवक्ता का कहना था कि न्यूयार्क टाइम्स और अन्य अखबारों में प्रकाशित समाचारों की जांच में पाया गया है कि यह समाचार सही नहीं है. अन्य अखबारों का भी हवाला दिया गया और बताया गया कि समाचार पत्रों में अलग-अलग सूचनाएं प्रकाशित हैं. याची के पास घटना को लेकर कोई निजी जानकारी नहीं है. उन्होंने मात्र समाचार पत्रों के आधार पर ईमेल भेजकर याचिका दाखिल की है जो कि सही तरीका नहीं है. इस पर कोर्ट का कहना था कि हमारे पास याचिका पर सुनवाई करने के पर्याप्त आधार हैं.

याची पक्ष को 16 मार्च तक दाखिल करने हैं जवाब और दस्तावेज

सरकारी वकील की ओर से प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में मारे गए मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफआईआर की कॉपी इत्यादि भी अदालत में दाखिल की गई है. कोर्ट ने याची पक्ष के वकीलों को 16 मार्च तक अपने जवाब और दस्तावेज इत्यादि दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई अब 18 मार्च को होगी.

एएमयू में हुई हिंसा के मामले में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई 25 को

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई टाल दी गई. कोर्ट ने इस मामले में मानवाधिकार आयोग को जांच कर अपनी रिपोर्ट देने को कहा था. आयोग के अधिवक्ता ने बताया कि अभी तक उन्हें आयोग की ओर से कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है. इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 25 फरवरी की तारीख नियत कर दी है. PLC.

 

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