अस्मित राठोड़ की कविता : सूत्रधार

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अस्मित राठोड़ की कविता :  सूत्रधार

सूत्रधार

क्या कहाँ तुमने..?
मैं तुम्हें भूल क्यूँ नहीं जाता…?
पर कैसे…?
तुम जानती हो ना तुम क्या हो…?
तुम सूत्रधार हो…सूत्रधार…
मेरी भावनाओ के रंगमंच पर..
मेरे शब्दों को अभिनय कराने वाली…
सूत्रधार…
यह तालियों की गडगडाहट सुन रहीं हो ना…?
यह भले ही मेरे लिए है..
मेरे शब्दों के लिए है…
पर…
तुम जानती हों ना…?
उसकी असली हक़दार तो तुम हो…
सिर्फ तुम…
मेरे शब्दों को कहाँ कुछ आता था…?
तुम्हारे आने से पहले…क्या वजूद था मेरे शब्दों का…?
कुछ भी तो नहीं…
पर तुम आये…
और…
तुम्हे देखकर, मानो मेरे शब्दों में जान आ गयी…
तुम्हारी अदाओं को देख कर…
उनको…अदाकारी आ गयी…
तूम जानती हो ना..?
मेरे शब्दों के अभिनय की गहराई…
तुम्हारी झील सी गहरी आँखों से ही तो आई है…
तुम मुस्कुराती हो…
और मेरे शब्द खिलखिला उठते है…
तुम अपनी जुल्फें लहराती हो…
और मेरे शब्द झूम उठते है…
तुम्हारी चूड़ीयों की खनक…
तुम्हारी पायल की रूमझूम…
तुम्हारी बालियों की झंकार…
इन्ही सब के इशारों पर तो मेरे शब्द अभिनय करते है…
और तुम कहती हो मैं तुम्हे भूल जाऊ..?
पर हाँ..
अगर तुम्हे मेरा साथ अच्छा नहीं लगता…
तो…तुम बेशक जा सकती हो…
मेरा प्यार तुम्हारे पांव की बेड़ियाँ नहीं बनेगा…
मेरा प्यार तुम्हे पंख लगा कर…
परी बना देगा…
खूबसूरत सी, नन्ही सी परी…
फिर तुम उड़ जाना…कही दूर…
इस नीले-नीले आसमान में..
जितना ऊँचा चाहो…
उड़ लेना…
लेकिन…
तुम्हारे जाने के बाद भी…
मेरी भावनाओं के रंगमंच पर…पर्दा नही गिरेगा…
मेरे शब्दों का अभिनय…चलता रहेगा…
अविरत…
क्यूंकि…तुम…
जाने के बाद भी हम में कायम रहोगी…
मैंने और मेरे शब्दों ने..
तुम्हे इस कदर हम में समां लिया है…
की अब तुम्हे…
हमसे कोई नहीं छीन सकता…
कोई नहीं…
भगवान भी नहीं…
और हाँ…
मेरा तुमसे वादा है…
मेरी भावनाओं के रंगमंच पर…
कभी दर्द या आंसू की कहानी नहीं होगी..
क्यूँ की…
मैं और मेरे शब्द…जानते है…
तुम्हे आंसू पसंद नहीं…
तुम्हे मुस्कुराना अच्छा लगता है…
खिलखिलाना अच्छा लगता है…
प्रेम अच्छा लगता है…
तो…
इस रंग मंच पर हमेशा प्रेम का अभिनय होगा…
कभी न मिटने वाले प्रेम का…
और यह होगी गुरु-दक्षिणा…
मेरे शब्दों की और से गुरु-दक्षिणा…
तुम्हारे लिए…
उन्हें प्रेम का अभिनय सिखाने के लिए…
मेरे भावनाओ के रंगमंच को एक नया रूप देने के लिए…
अलविदा सूत्रधार अलविदा….!!!

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अस्मित राठोड़परिचय :-

अस्मित राठोड़

कवि ,लेखक व् उपन्यासकार

अस्मित राठोड़ का जन्म वापी शहर के पास दमन में हुआ. उन्हों ने ओस्मानिया महाविद्यालय से जर्नालिसम एंड मास क्म्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेज्युएशन की उपाधि हांसिल की औरतकरीबन दस साल भारत में काम करने के प्रश्चात अब वो ऑस्ट्रेलिया में स्थायी हुए है.
बचपन से ही साहित्य में रूचि होने के कारण उन्होंने हिंदी, अग्रेज़ी, गुजराती भाषा में बहोत सारी किताबें पढ़ी हैऔर कुछ सालो से खुद भी साहित्य रचना में प्रवृत रहते है. ग़ज़ल, कविताये लिखना उनका शौख भी है और अनुराग भी. उनकी गजलों में जीवन के हर पहलु को एक नए अंदाज़ में पेश किया हुआ पाया जाता है.

ग़ज़ल और कवितायेँ लिखने के साथ साथ उन्होंने अपना हुन्नर उपन्यास में भी आजमाया है. उनका पहला उपन्यास “लाइफ इस अ बीच” जो अग्रेज़ी में लिखा गया है हाल ही में मुंबई के जानेमाने प्रकाशक “लीडस्टार्ट पब्लिशर” के द्वारा प्रकाशित हुआ है और पाठको द्वारा खूब सराहा गया है.

अच्छे कवि और उपन्यासकर्ता होने के साथ-साथ अस्मित राठोड़ एक अच्छे इंसान भी है. मृदुभाषिता और सरल स्वाभाव के होते हुए वो सब का दिल जीत लेते है.अपने संवेदनशील और प्रेमसभरव्यक्तित्व के द्वारा उन्होंने ने समाज में अपना एक गरिमापूर्ण स्थान कायम किया है.

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