अस्मित राठोड़ की पाँच ग़ज़ले
1 . खुदा को सलाम लिख लेता हूँ बेहतर नहीं, बस मेरे ख्याल लिख लेता हूँ कभी जवाब तो कभी सवाल लिख लेता हूँ जोड़ता हूँ हिसाब जब भी जिंदगी का मेरी ज्यादा खुशियाँ थोड़े मलाल लिख लेता हूँ तारीफ तेरे हुस्न की करने जब उतर आऊ तुझे बेशक चाँद का जमाल लिख लेता हूँ बाते इश्क की बेवजह तो नही करता में इसी बहाने, खुदा को सलाम लिख लेता हूँ
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2  . टूट कर आज छोटी सी एक लहर हुआ
आसमां था जो बड़ा वोह मुख़्तसर हुआ रुक्सत ए यार का कुछ यूह असर हुआ वक़्त तो गुजरा अपनी रफ़्तार से मगर न शाम हुई और न ही मेरा सहर हुआ इबादत ए खुदा समझ अपनाया जिसे वोह मरासिम ही जीस्त का ज़हर हुआ न करार तुझे न ही सुकून ए दिल मुझे न जाने दोनों पर, क्यूँ ऐसा कहर हुआ समंदर जो हुआ करता था जज़बा मेरा टूट कर आज छोटी सी एक लहर हुआ
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 3 . तलाश जारी रहे उसकी
खरा या खोटा हर बार तो वापिस नहीं आता है सिक्का मुक़द्दर का कभी कभी चल भी जाता है सवाल इतने क्यूँ उठाते हो मेरे किरदार पर तुम दिल है आखिर....कभी कभी मचल भी जाता है नज्म दो लिख दी उसके हुस्न पर तो क्या हुआ इश्क सर चढ़..…..कभी कभी बोल भी जाता है माना मैंने की बुरा हूँ मैं.....मगर इतना भी नहीं ज़मीर गिर के मेरा कभी कभी संभल भी जाता है तलाश जारी रहे उसकी.....बगैर यकीन गवायें परवरदिगार है वो, कभी कभी मिल भी जाता है
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 4 .  फरियाद'
ज़िन्दगी की आजमायेशों से बड़ा कोई उस्ताद नहीं होता बुलंदी मिलती नहीं...गर 'सबक ए गर्दिश' याद नहीं होता संवारना हो मुक़दर तो, यह 'फितरत ए वक़्त' जान लेना वक़्त अच्छा कभी भी.......वक़्त अच्छे के बाद नहीं होता कलियों से पूछ लेना और भवरों से भी तसल्ली कर लेना वक़्त-बेवक़्त तो कभी....कोई गुलिस्ताँ आबाद नहीं होता 'एहतराम ए वक़्त' न हो ने की.....किंमत चूका रहे है वोह 'हुकूमत ए खुदा' में वरना....कोई बेवजह बर्बाद नहीं होता तालीम मुस्कुराने की हर हालात में...पायी जिसने है यहाँ लबों पर उसके कभी भी......'लफ्ज़ ए फरियाद' नहीं होता
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5 . शबनम
परवाह मेरी प्यास की, वोह हरदम रखता है सनम मेरा लबों पर अपने शबनम रखता है सुर्ख एडियाँ......और पायल की झंकार लिये कदम वोह अपने मेरे नक्श ए कदम रखता है "सलीका ए गुफ्तुगू" है, उसका दिलकश बड़ा बातें नहीं....वोह लफ़्ज़ों की सरगम रखता है डर कोई नहीं मुझे अब, ज़माने के ज़ख्मों का वोह मुस्कराहट में अपनी....मरहम रखता है असर दुआओं का उसकी, बेअसर होता नहीं खुशियों को मेरी....वोह खैरमकदम रखता है छोड़ दे करना रश्क, अब मुझ पर मेरे रकीब मुझे, सिर्फ मुझे वोह अपना हमदम रखता है
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अस्मित-राठोड़परिचय :-
अस्मित राठोड़
कवि ,लेखक व् उपन्यासकार
अस्मित राठोड़ का जन्म वापी शहर के पास दमन में हुआ. उन्हों ने ओस्मानिया महाविद्यालय से जर्नालिसम एंड मास क्म्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेज्युएशन की उपाधि हांसिल की औरतकरीबन दस साल भारत में काम करने के प्रश्चात अब वो ऑस्ट्रेलिया में स्थायी हुए है. बचपन से ही साहित्य में रूचि होने के कारण उन्होंने हिंदी, अग्रेज़ी, गुजराती भाषा में बहोत सारी किताबें पढ़ी हैऔर कुछ सालो से खुद भी साहित्य रचना में प्रवृत रहते है. ग़ज़ल, कविताये लिखना उनका शौख भी है और अनुराग भी. उनकी गजलों में जीवन के हर पहलु को एक नए अंदाज़ में पेश किया हुआ पाया जाता है.
ग़ज़ल और कवितायेँ लिखने के साथ साथ उन्होंने अपना हुन्नर उपन्यास में भी आजमाया है. उनका पहला उपन्यास “लाइफ इस अ बीच” जो अग्रेज़ी में लिखा गया है हाल ही में मुंबई के जानेमाने प्रकाशक “लीडस्टार्ट पब्लिशर” के द्वारा प्रकाशित हुआ है और पाठको द्वारा खूब सराहा गया है.
अच्छे कवि और उपन्यासकर्ता होने के साथ-साथ अस्मित राठोड़ एक अच्छे इंसान भी है. मृदुभाषिता और सरल स्वाभाव के होते हुए वो सब का दिल जीत लेते है.अपने संवेदनशील और प्रेमसभरव्यक्तित्व के द्वारा उन्होंने ने समाज में अपना एक गरिमापूर्ण स्थान कायम किया है.