चीन ने अमेरिका पर “विभाजन और टकराव को भड़काने के लिए लोकतंत्र को “जनसंहार के हथियार” के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाकर बाइडन प्रशासन द्वारा आयोजित कार्यक्रम की आलोचना की। चीन ने सम्मेलन को उसके उदय को रोकने और अलग-थलग करने के लिए,अमेरिका द्वारा बनाया जा रहा, एक नए मोर्चा करार दिया। दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित 100 से अधिक नेताओं ने भाग लिया।सम्मेलन निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने, मानवाधिकारों की रक्षा और भ्रष्टाचार से लड़ने में प्रगति का मूल्यांकन करने के आह्वान के साथ संपन्न हुआ। अमेरिका ने चीन और रूस को आमंत्रितों की सूची से हटाने लेकिन ताइवान को आमंत्रित करने पर गुस्से में है,इस चीन ने ‘वन चाइना नीति का घोर उल्लंघन बताया,चीन ताइपे को चीनी मुख्य भूभाग का अभिन्न अंग मानता है। चीनी विदेश मंत्रालय, जो पिछले कुछ हफ्तों से शिखर सम्मेलन पर लगातार हमला बोल रहा है, ने अमेरिका पर लोकतंत्र के नाम पर विभाजन का आरोप लगाकर एक लंबा बयान जारी किया। बयान में कहा गया, लोकतंत्र के नाम पर बंटवारे और टकराव को भड़काना इतिहास में लौटना है, और यह दुनिया में उथल-पुथल और आपदा के अलावा कुछ नहीं लाएगा।
उसने कहा कि लंबे समय से, अमेरिका अपनी राजनीतिक व्यवस्था और मूल्यों को दूसरों पर थोपता रहा है, तथाकथित “लोकतांत्रिक सुधारों” पर जोर देता रहा है, एकतरफा प्रतिबंधों का दुरुपयोग करता रहा है और “रंग क्रांतियों” को उकसाता रहा है, जिसके “विनाशकारी परिणाम” हुए हैं। PLC

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