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Wednesday, September 23rd, 2020

57,128 करोड़ रुपये ट्रांसफर करेगा रिजर्व बैंक

नई दिल्ली,
भारतीय रिजर्व बैंक लेखा वर्ष 2019-20 के लिए केंद्र सरकार को 57,128 करोड़ रुपये ट्रांसफर करेगा। आरबीआइ की तरफ से जारी एक बयान के मुताबिक केंद्रीय बैंक के बोर्ड ने इसकी मंजूरी दे दी है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में हुई सेंट्रल बोर्ड की 584वीं बैठक में देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति की समीक्षा की गई। फैसला किया गया कि कोविड-19 महामारी के चलते पैदा हुए चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात और घरेलू परिस्थितियों का देश की अर्थव्यवस्था पर हुए असर को कम करने के लिए नियामकीय और मौद्रिक कदम उठाए जाएंगे। रिजर्व बैंक ने अपने बयान में कहा, 'सरकार को बतौर सरप्लस रकम ट्रांसफर की मंजूरी के अलावा बोर्ड ने आकस्मिक जोखिम बफर 5.5 प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखने का भी निर्णय लिया है।' इसके अलावा आरबीआइ के सेंट्रल बोर्ड ने 'इनोवेशन हब' स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की। इसके जरिए देश में नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा।

आरबीआइ ने अगस्त, 2019 में केंद्र सरकार को कुल 1.76 लाख करोड़ रुपये की राशि देने का ऐलान किया था। इसमें 1.23 लाख करोड़ रुपये की राशि बतौर लाभांश के तौर पर दी गई थी जबकि शेष राशि रिजर्व फंड में से दी गई थी। चालू वित्त वर्ष के बजट में से आरबीआइ से लाभांश के तौर पर 60,000 करोड़ रुपये आने का प्रावधान किया गया है। हालांकि इस फैसले के बावजूद केंद्र सरकार की वित्तीय सेहत एकदम से सुधर जाने की संभावना नहीं है। कोविड-19 की वजह से आर्थिक गतिविधियां काफी प्रभावित हुई हैं जिससे सरकार का कर-संग्रह उम्मीद से काफी नीचे रहने की संभावना है।

आरबीआइ ने पिछले वर्ष ही यह फैसला किया था कि वह आपातकालीन जोखिम के लिए अपनी कुल परिसंपत्तियों का 5.5 फीसद फंड कंटिन्जेंसी रिजर्व बफर (सीआरबी) यानी आपातकालीन फंड रखेगा। यह फैसला पूर्व गवर्नर डॉ. बिमल जालान समिति की सिफारिशों के आधार पर किया गया था। पिछले वर्ष आरबीआइ ने बताया था कि उसके पास सीआरबी के तौर पर 6.8 फीसद राशि है। बैंक ने उस वक्त यह भी बताया था कि सीआरबी की सीमा से अतिरिक्त 11,608 करोड़ रुपये की राशि फंड में है। सरप्लस फंड को लाभांश के तौर पर भी जाना जाता है। वित्त वर्ष 2018-19 में आरबीआइ ने 65,896 करोड़ रुपये, 2017-18 में 50,000 करोड़ रुपये और 2018-19 में 30,659 करोड़ रुपये की राशि इस मद में दी थी। PLC.

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