Saturday, May 30th, 2020

2170 मेगावाट की 170 परियोजनाएं कार्यान्वयनाधीन : अब्दुल्ला

राजेन्द्र उपाध्याय नई दिल्ली.  नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि मंत्रालय द्वारा प्रायोजित एक परियोजना के तहत भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलौर द्वारा तैयार किए गए राष्ट्रीय बायोमास संसाधन एटलस के अनुसार विद्युत उत्पादन के लिए देश में प्रति वर्ष लगभग 120-150 मिलियन एमटी अतिरिक्त कृषि औद्योगिक और कृषिगत अवशिष्ट होने का अनुमान लगाया गया है जिसमें लगभग 18,000 मेगावाट की बायोमास विद्युत संभाव्यता मौजूद है. राज्यसभा में कल एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ, ग़ुजरात,  हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल राज्यों में गत 30 जून, 2009 की स्थिति के अनुसार 220 परियोजनाओं के माध्यम से 1870 मेगावाट की संचयी बायोमास विद्युत उत्पादन क्षमता पहले ही संस्थापित की जा चुकी है और 2170 मेगावाट की 170 परियोजनाएं कार्यान्वयनाधीन हैं. सरकार द्वारा देश भर में बायोमास से विद्युत उत्पादन की परियोजनाओं की संस्थापना हेतु विभिन्न राजकोषीय प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं जिनमें क्षमता से जुड़ी पूंजीगत सब्सिडी और राजकोषीय प्रोत्साहन जैसी मशीनरी तथा संघटकों के आयात पर रियायती सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क से छूट, प्रमुख संघटकों पर त्वरित मूल्यह्रास, करों से राहत और भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास संस्था (इरेडा) तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं से आवधिक त्रऽण शामिल हैं। इसके अलावा, 14 राज्यों में वाणिज्यिक बायोमास विद्युत परियोजनाओं से विद्युत की बिक्री के लिए अधिमान्य शुल्क दर उपलब्ध कराई जा रही है। बायोमास विद्युत परियोजनाओं के विकास, क्षमता निर्माण, जागरूकता सृजन आदि के लिए संवर्धनात्मक प्रोत्साहन भी उपलब्ध कराए जाते हैं।

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