Monday, June 1st, 2020

2001 की एनडीए सरकार ने समर्थन पाने के लिये पैसे बांटे थे!!!!

images (9)आई एन वी सी,

दिल्ली,

बिहार के पूर्णिया से पूर्व सासंद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने एक सनसनीखेज खुलासा कर देश के सियासी हल्कों में तूफान खड़ा कर दिया है। पप्पू ने यह खुलासा अपनी आत्मकथा 'द्रोहकाल का पथिक' में किया है। पप्पू ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि 2001 में एनडीए के समर्थन के लिए पैसे बांटे गए थे। गौरतलब है कि उस वक्त बीजेपी नेता अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में केंद्र में एनडीए की सरकार थी। पप्पू का यह आरोप अटल बिहारी वाजपेयी को भी कठघरे में खडा़ करता है। यहाँ यह बात कहना बेहद ज़रूरी है कि आज तक बीजेपी यह कहती आई है कि अटल बिहारी वाजपेयी देश के सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री रहे हैं और उनका चरित्र बेदाग रहा है।

पप्पू यादव ने अपनी इस किताब में दावा किया है कि वर्ष 2008 के विश्वास मत से पहले यूपीए और एनडीए ने उनसे संपर्क साधा था। दोनों पार्टियां (कांग्रेस और बीजेपी) ने सांसदों को 40-40 करोड़ रुपये देने की पेशकश की थी। पप्पू के दावे के मुताबिक जुलाई 2008 में विश्वास मत के दौरान भी कांग्रेस और बीजेपी ने सांसदों के समर्थन के लिए 40 करोड़ रुपये देने की पेशकश की थी।

पप्पू के मुताबिक वर्ष 2001 में एनडीए सरकार के तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इंडियन फेडरल डेमोक्रेटिक पार्टी के तीन सांसदों को एनडीए का हिस्सा बनने के लिए पैसा दिया था। पप्पू यादव का कहना है कि सांसदों की कीमत को लेकर सौदेबाजी हुई थी। सांसद अनवारूल हक को एक एसेंट कार के साथ 1 करोड रूपये भी मिला। नागमणि को भी तत्काल 1 करोड रूपये दिए गए थे और बाद में राज्यमंत्री का पद देने का भरोसा दिलाया गया था। पप्पू के मुताबिक यह सौदेबाजी भाजपा के यशवंत सिन्हा ने खुद की थी। पप्पू यादव का दावा है कि यशवंत सिन्हा से उनके पारिवारिक रिश्ते थे, इसलिए उन्होंने बिना पैसे लिए एनडीए का साथ दिया। उस वक्त हमें पैसे की जरूरत थी पर हमने पैसा नहीं लिया।

हालांकि इस मसले पर यशवंत सिन्हा ने पप्पू यादव के इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और उन्होंने कहा कि इस मामले पर टिप्पणी की जरूरत नहीं है।

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