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Sunday, November 1st, 2020

20 साल से टीचर थी - मामला खुला तो हुई फरार

मऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) में अनामिका शुक्ला (Anamika Shukla) नाम से फर्जी टीचरों मामले में अभी जांच चल रही है. लगातार ऐसे कई फर्जीवाड़े सामने आ रहे हैं. अब मऊ (Mau) में ममता राय (Mamata Rai) के नाम पर फर्जीवाड़ा सामने आया है. पता चला है कि बलिया (Ballia) की रहने वाली ममता राय के दस्तावेज पर बलिया की ही रहने वाली रम्भा पांडेय (Rambha Pandey) मऊ (Mau) में वर्ष 2000 से नौकरी कर रही थी. वह महाराजगंज से ट्रांसफर लेकर आई थी.  मामले के खुलासे के बाद रम्भा फरार हो गई है. उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है, वहीं एफआईआर दर्ज कराई जा रही है.

 

शिकायत के बाद हुई जांच तो खुलासा
कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि उसकी सेवा समाप्त कर दी गई है. उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे दिया गया है. वह वर्ष 2000 में महाराजगंज जिले से ट्रांसफर लेकर आई थी. बेसिक शिक्षा विभाग को शिकायत मिली कि जनपद में ममता राय नामक किसी महिला के अभिलेख पर एक फर्जी शिक्षिका नौकरी कर रही है. शिकायत मिलते ही जांच शुरू हो गई.

 

रतनपुरा ब्लॉक के मुबारकपुर उच्च प्राथमिक विद्यालय में कर रही थी नौकरी
जांच में पता चला कि रतनपुरा ब्लाॅक के मुबारकपुर उच्च प्राथमिक विद्यालय में ममता राय नामक शिक्षिका का असली नाम रम्भा पांडेय है. वह ममता के नाम के अभिलेखों के आधार पर फर्जी तरीके से नौकरी कर रही है. विभाग द्वारा जांच शुरू होने की खबर मिलते ही कथित ममता राय यानी रम्भा पांडेय फरार हो गई. जांच में पता चला है कि वह मूल रूप से बलिया जनपद के पांडेयपुर ताखा गांव की निवासी है. वर्ष 2000 में वह महाराजगंज जनपद से स्थानांतरण पत्र लेकर आई थी. उसकी सर्विस बुक में पहली प्रविष्टि वर्ष 2011 में दर्ज की गई है.

 

सेवा समाप्त, एफआईआर के आदेश
रम्भा के गांव के प्रधान द्वारा उसके नाम-पता की पुष्टि होने पर रम्भा को विभाग द्वारा नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए शुक्रवार की तिथि निर्धारित थी. मगर वह उपस्थित नहीं हुई. अब उसकी सेवा समाप्त कर दी गई है. उसके विरुद्ध हलधरपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा.

 

असली ममता भी बलिया की, खोज जारी
वहीं जिस ममता राय के नाम पर रम्भा नौकरी कर रही थी, अभिलेखों में उसका नाम व पता बाछाबार, बलिया अंकित है. विभाग उसका पता लगा रहा है. संभावना है कि इस महिला के अभिलेख पर और भी लोग नौकरी कर रही हों. बता दें गोंडा की अनामिका शुक्ला के साथ भी ऐसा ही हुआ, उसके अभिलेखों में फर्जीवाड़ा कर कई अनामिका शुक्ला ने नौकरी हासिल कर ली और मेज से तनख्वाह उठा रही थीं. PLC.

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