दोहे 
आजादी को हो गए,.आज उनहत्तर साल ! नहीं गुलामी का मगर,कटा ज़हन से जाल !!
आजादी का कब हुआ,हमें पूर्ण अहसास ! पहले गोरों के रहे ,...अब अपनों के दास !!
जिसको देखो बेधड़क, लूट रहा है देश ! आजादी के अर्थ को, समझे नहीं रमेश !!
आजादी के बाद से, दिन-दिन भड़की आग ! साल उनहत्तर बाद भी, नहीं सके हम जाग !!
भूखे को रोटी नहीं,रहने को न  मकान ! हुआ देश आजाद ये,कैसे लूँ मै मान! !
आज़ादी को हो गये,आज उनहत्तर साल !! नेता तो खुशहाल हैं,पर जनता बदहाल!
आजादी अब हो गई,  है ऐसा हथियार ! अपनों के आगे करे, अपनों को लाचार !! _________________________________
रमेश शर्मापरिचय -:
रमेश शर्मा
लेखक व् कवि

बचपन राजस्थान के जिला अलवर के एक छोटे से गाँव में गुजरा ,  प्रारंभिक पढाई आठवीं तक वहीं हुई, बाद की पढाई मुंबई में हुई, १९८४ से मुंबई में  एक प्राइवेट कम्पनी में नौकरी की शुरुआत की , बाद में नौकरी के साथ साथ टैक्स कन्सल्टन्ट का भी काम शुरू किया जो कि आज तक बरकरार है , बचपन से ही कविता सुनने का शौक था  काका हाथरसी जी को बहुत चाव से  सुनता था , आज भी उनकी कई कविता  मुझे मुह ज़ुबानी याद है बाद में मुंबई आने के बाद यह शौक शायरी गजल की तरफ मुड गया , इनकम टैक्स का काम करता था तो मेरी मुलाकात जगजीत सिंह जी के शागिर्द घनशाम वासवानी जी से हुई उनका काम मैं आज भी देखता हूँ उनके साथ साथ कई बार जगजीत सिंह जी से मुलाकात हुई ,जगजीत जी के कई साजिंदों का काम आज भी देखता हूँ , वहीं से लिखने का शौक जगा जो धीरे धीरे दोहों की तरफ मुड़ गया दोहे में आप दो पंक्तियों में अपने जज्बात जाहिर कर सकते हैं और इसकी शुरुआत फेसबुक से हुई फेसबुक पर साहित्य जगत की  कई बड़ी हस्तियों से मुलाकात हुई उनसे मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला

संपर्क -: 18/984,आश्रय को- ऑप. हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड  खेर नगर , बांद्रा (ईस्ट )  मुंबई ४०००५१  …  फोन ९७०२९४४७४४ –  ई-मेल. rameshsharma_123@yahoo.com