Monday, February 17th, 2020

115 करोड़ रुपये से बनेगा राम तीर्थ मंदिर

imagesआई एन वी सी, चंडीगढ़, भगवान वाल्मीकि महाराज जी की अमीर विरासत को आवाम में लेजाने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री स. प्रकाश सिंह बादल इस वर्ष 18 अक्तूबर को भगवान वाल्मीकि जयंती के अवसर पर अमृतसर के समीप श्री वाल्मीकि आश्रम (रामतीर्थ ) में मंदिर और ऐतिहासिक स्मारक बनाने के सिविल कार्यो का नींव पत्थर रखेंगे। इस संबंधी फैसला कैबिनेट मंत्री स. गुजजार सिह रणिके के नेतृत्व में श्री वाल्मीकि आश्रम (रामतीर्थ) विकसित करने के लिए गठित किए भगवान वाल्मीकि तीर्थ विकास बोर्ड की एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री ने लिया। विचारविमर्श के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि नये मंदिर का निर्माण श्री वाल्मीकि आश्रम (रामतीर्थ)में 115 करोड़ रुपये की लागत से होगा। इसका आर्टीटेक्चर एक विलक्षण किस्म का होगा जिसको बहुत बढिय़ा ढंग से डिजाईन किया होगा। इस स्थान को ऐतिहासिक और धार्मिक पक्ष से बहुत बढिय़ा ढंग से तैयार करने की राज्य सरकार की वचनबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने गुरूनानक देव विश्व विद्यालय के आर्कीटैक्ट विभाग को इस विश्व स्तरीय मंदिर के निर्माण के लिए डिजाईन तैयार करने और निगरानी करने के लिए कहा है। उन्होंने इस प्रौजेक्ट के ढांचे का डिजाईन भी विभाग को दो महीने में तैयार करने के लिए कहा है। स. बादल ने बोर्ड के रोजमर्रा के खर्चो का प्रबंध के लिए 10 करोड़ रुपये के कारपस फंड की भी बोर्ड के लिए स्वीकृति दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के लिए यह बहुत गौरव और सम्मान वाली बात है कि यह इस स्थान को विकसित करके भगवान वाल्मीकि महाराज जी को आदरमयी श्रद्धांजलि भेंट कर रही है। इस स्थान पर महाऋृषि ने महाकाव्य श्री रामायण की रचना समाज के कल्याण के लिए की। इस स्थान को विश्व स्तर की विरासत के तौर पर विकसित करने की जरूरत पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि विश्व भर से श्रद्धालु इस स्थाान पर आयेंगे। स. बादल ने स्पष्ट किया कि यह मंदिर स्वयं में बहुत विलक्षण होगा। यह ना केवल भगवान वाल्मीकि महाराज़ के दर्शन को प्रचार करने में मदद देगा बल्कि सद्भावना एवं सुदृढ सामाजिक गांठों वाले समाज के निर्माण के लिए भी मदद देगा। इसके साथ ही यह महाऋृ षि द्वारा दी गई महान नैतिक शिक्षाओं को भी नवयुवाओं के मनों में पैदा करने के लिए मदद करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री वाल्मीकि आश्रम का संग्राहलय और गलियारा भगवान वाल्मीकि जी की शिक्षाओं को प्रदर्शित करेगा जो एक बढिय़ा राज या समाज के निर्माण के लिए बढिय़ा व्यक्ति, बढिय़ा शासक और उच्च विचारवान व्यक्ति पैदा करने के सिद्धांतों पर विशवासों पर आधारित है । उन्होंने कहा कि यह कार्य चरणबद्ध ढंग से किया जाएगा। पहले चरण दौरान मंदिर और बहुमंजिल बस/कार पार्किन्ग का निर्माण किया जाएगा। इसके बाद लंगर हाल, संगत हाल और संग्रहालय क्रमश: द्वितीय, तिृतीय और चौथे चरण के दौरान निर्मित किए जांएगे। मंदिर के मामलों को चलाने और प्रबंधन में पारदर्शिता और कुशलता को यकीनी बनाने के लिए बेहतर ढंग अपनाये जाने की जरूरत पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने इस कार्य के लिए एक वैधानिक संस्था बनाये जाने पर जोर दिया। उन्होंने बोर्ड के सदस्य सचिव की हैसियत में अमृतसर के उपायुक्त को इस संबध में विभिन्न प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए कहा ताकि मंदिर के लिए बढिय़ा प्रबंधकीय कमेटी बनाई जाये। उपायुक्त ने स. बादल को बताया कि इसके लिए मनसा देवी मंदिर शाईन बोर्ड के मॉडल को लागू किया जा सकता है। इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख व्यक्तियों मे कैबिनेट मंत्री श्री गुलज़ार सिंह रणिके, वित्तायुक्त विकास श्री एन एस कंग, प्रधान सचिव पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामले श्री एस एस चन्नी, सचिव खर्चे श्री जसपाल सिंह, विशेष प्रधान सचिव मुख्यमंत्री के जे एस चीमा, निदेशक कल्याण श्री पृथी चंद, उपायुक्त अमृतसर श्री रजत अग्रवाल, संयुक्त निदेशक देहाती विकास जसपाल सिंह गुरूनानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर के आर्कीटैक्ट विभाग के प्रौ. सरवजीत सिंह बहल बैठक में शामिल थे।

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