Friday, August 7th, 2020

​लोकपाल की नियुक्ति में संविधान का उल्लंघन हो रहा है​ : हिन्दू संगठन

आई एन वी सी न्यूज़ नई दिल्ली,

  • लोकपाल की नियुक्ति के बाद जज लोकतन्त्र को गुलाम बना देंगे - स्वामी ओम जी

धर्मरक्षक श्री दारा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुकेश जैन की अध्यक्षता में हुई हिन्दू संगठनों की बैठक में संविधान का उललंघन करके की जा रही लोकपाल की नियुक्ति पर चिन्ता जाहिर की गयी। बैठक में दारा सेना राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने बताया कि कानून के अनुसार लोकसभा के प्रतिपक्ष के नेता का लोकपाल की नियुक्ति में भाग लेना जरूरी है जब कि वर्तमान लोकसभा में प्रतिपक्ष का विधि सम्मत कोई भी नेता नहीं हैं। ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जिस प्रकार से सी आई ए के ऐजेन्ट अन्ना हजारे के बहकावे में आकर लोकपाल  की नियुक्ति के लिये सरकार पर दबाव डालकर असंवैधानिक तरीके से लोकपाल की नियुक्ति करा रहे है उससे लोकतन्त्र का अस्तित्व ही खतरे में पड़ रहा हैं। श्री जैन ने आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय के जिस सेवानिवृत्त न्यायाधीश पिनाकी चन्द्र घोष को संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करके मुख्य लोकपाल नियुक्त किया जा रहा है, वह गलत है।श्री जैन ने बताया कि न्यायाधीश पिनाकी चन्द्र घोष ने ही जल्लु कट्टू पर रोक लगाकर हिन्दुत्व के प्रति अपनी नफरत दर्शाई थी। श्री जैन ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जिस प्रकार से नक्सली ईसाई आतंकवादियों और देशद्रोहियों के साथ खड़े है और उन्हे तुरन्त जमानत दे रहे है ऐसे देशद्रोहियों को लोकपाल नियुक्त करना भारत के लिये सबसे बड़ा खतरा है। वैसे भी महामना मदन मोहन मालवीय ने वकालत के पेशें को बेईमानों का पेशा बताते हुए वकीलत करने से इंकार कर दिया था। ऐसे में बेठ्रमानों के पेशे से लोकपाल नियुक्त करना  देश के लिये सबसे बड़ा मजाक है। हिन्दू संगठनों की बैठक में स्वामी ओम जी ने खुलासा किया कि न्यायाधीशों का भ्रष्टाचार उजागर करने वाले न्यायाधीश कर्णन को 6महीने की सजा दिलवाकर जेल भेजने वाला यही पिनाकी चन्द्र घोष था जिसने बेईमान जजों के खिलाफ उठी एक मात्र आवाज का गला घोट दिया। सर्वोच्च नयायालय के न्यायाधीश जिस प्रकार से राफेल मामले पर सरकार को ब्लैक मेल कर रहे हैं, हिन्दू त्यौहारों पर नये नये प्रतिबन्ध लगा रहे हैं, कल लोकपाल के दायरे में प्रधानमंत्री के आने के बाद चुनी हुई सरकार को सर्वोच्च न्यायालय के नक्सलवादी देशद्रोही सी आई ए के ऐजेन्ट जज गुलाम बनाने में वक्त नहीं लगायेंगे। अन्ना आन्दोलन के जरिये सी आई ए और उसकी फंडिंग पर पल रहा मीडिया लोकतन्त्र को गुलाम बनाने का यही घिनौना खेल खेल रहा था। हिन्दू संगठनों ने नयी लोक सभा का गठन होने के बाद प्रतिपक्ष के नेता की नियुक्ति और स्वीकृति के बाद ही लोकपाल नियुक्त करने की सरकार से मांग की।



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