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Friday, April 23rd, 2021

​अमिताभ सिन्हा सिखों को राष्ट्र विरोधी साबित करने पर तुले: मनजिंदर सिंह सिरसा

आई एन वी सी न्यूज़ नई दिल्ली,

  • हम वन्दे मातरम का नहीं बल्कि दयाल सिंह मजीठिया की विरासत खत्म करने का विरोध कर रहे हैं

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डी एस जी एम सी) के महा सचिव श्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने आज कहा कि दयाल सिंह कालेज की गवर्निंग शरीर के चेयरमैन अमिताभ सिन्हा अपने तथाकथित राष्ट्रवाद के नारों के साथ सिखों को राष्ट्र विरोधी साबित करने पर तुले हुए हैं। यहां पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए श्री सिरसा ने कहा कि यह बहुत हैरानी वाली बात है कि हम दूरअंदेशी सोच के मालिक राष्ट्रीय नेता दयाल सिंह मजीठिया की विरासत खत्म करने का विरोध कर रहे हैं जबकि अमिताभ सिन्हा इसको गलत ढंग के साथ पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम खास तौर पर मैं कभी भी वन्दे मातरम का विरोध नहीं किया परन्तु हम दयाल सिंह कालेज का नाम बदलने का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि असली मुद्दा वन्दे मातरम नहीं बल्कि मुद्दा दयाल सिंह कालेज का नाम बदलने का है और उन का नाम और विरासत मिटाने के प्रयत्न किए जा रहे हैं। उन्होंने गवर्निंग बाडी खास तौर पर श्री सिन्हा को याद करवाया कि जब दयाल सिंह मजीठिया ने ऐसीं महान संस्थाओं की स्थापना के लिए अपनी धन दौलत दान की थी जिसे किसी एक फिरके के लिए दान नहीं की थी बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए दी थी। दिल्ली गुरुद्वारा कमेटीके महा सचिव ने कहा कि नाम बदलने के मामले पर अपनी, दलीलों गलत होने का एहसास होने पर श्री सिन्हा ने अब वन्दे मातरम का मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह श्री सिन्हा का अपने तथाकथित राष्ट्रवाद है जिस कारण उन्होंने अहंकार भरा स्टैंड लिया है और वह मामले में गंभीरता नहीं समझ रहे जब सभी अमन पसंद राष्ट्रवादी लोग एक राष्ट्रीय नेता का नाम मिटाने के प्रयत्नों से दुखी हैं क्योंकि इस नेता ने राष्ट्र निर्माण के लिए बड़ा योगदान दिया और भविष्य की पीढ़ीयों की शिक्षा के लिए अनेकों स्कूल और कालेज बनवाऐ। श्री सिरसा ने कहा कि हम यह नाम तबदील नहीं होने देंगे क्योंकि इस के साथ भविष्य में हो राष्ट्रीय नेताओं के नाम पर चल रही संस्थायों के नाम बदलने की गलत प्रवृत्ति पड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि यहां सवाल सिख या किसी ओर धर्म का नहीं है, बल्कि असली मुद्दा यह है कि राष्ट्रवाद के नाम पर देश की प्रभावशाली शख्सियतों के नाम खत्म करने के प्रयत्न हो रहे हैं। उन्होंने श्री सिन्हा को यह याद करवाया कि व्यक्तिगत तौर पर या पारिवारिक तौर पर उन का राष्ट्र निर्माण प्रति कोई योगदान नहीं है। उन्होंने कहा कि अब जब यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर उठ गया है और बुद्धिजीवी वर्ग और हर सही सोच वाले व्यक्ति की तरफ से दयाल संघ मजीठिया के नाम को खत्म करने का विरोध हो रहा है तो श्री सिन्हा की घटिया चालबाजी भी उजागर हो गई है तो उन्होंने वन्दे मातरम के नाम का मुद्दा बना कर लोगों का ध्यान ओर तरफ करने के प्रयत्न आरंभ दिए हैं। श्री सिरसा ने श्री सिन्हा को सलाह दी कि जीवन में राजनीति में उठने के लिए हमेशा सख्त मेहनत की जरूरत होती है और उन को ऐसे शब्द पर घटिया राजनीति नहीं करनी चाहिए जो सभी देश का है। उन्होंने कहा कि वन्दे मातरम देश के हर नागरिक का है और उन को व्यक्तिगत लाभों के लिए इसका दुरुपयोग नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दयाल सिंह कालेज ट्रस्ट सोसायटी की जायदाद हड़पने की उनके मंसूबों का राज खुल गया है और अब उन को देश के लोगों से मुआफी मंगनी चाहिए कि उन्होंने ऐसे व्यक्तिगत का नाम मिटाने का यत्न किया जिसने देश के लिए अपना सब कुछ दान कर दिया।

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