Thursday, December 12th, 2019

​अब हाईवे में भी एम्बुलेंस सेवा

आई एन वी सी न्यूज़ रांची, राज्य के गरीब और सुदूरवर्ती क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा मिले। इस निमित्त आज मंदरा मुंडा की पवित्र धरा से टेलीमेडिसिन की सुविधा का शुभारंभ कर हर्षित हूं। टेलीमेडिसिन की सुविधा राज्य के 100 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शुरू किया जा रहा है। इसके तहत पलामू में 14, दक्षिणी छोटानागपुर में 11, उत्तरी छोटानागपुर में 25, कोल्हान में 18 और संथाल परगना में 33 टेलीमेडिसिन केंद्र गरीबों, वंचितों, शोषितओं के लिए किया गया है। ऐसे लोगों को इस डिजिटल डिस्पेंसरी की सुविधा निःशुल्क मिलेगी। यह बड़ी क्रांति है। हमें डिजिटल इंडिया, डिजिटल झारखंड बनाना है। फिर वह शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, कृषि हो, पेंशन हो सभी मामलों में राज्य सरकार आईटी का उपयोग कर रही है और डीबीटी के माध्यम से योजनाओं का लाभ लोगों को मिल रहा है। आज आईटी की ही देन है कि राज्य से बिचौलिए समाप्त हो रहें हैं। राज्यभर में 300 हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर का संचालन हो रहा है। 2022 तक इसका दायरा और भी बढ़ेगा। यह सिर्फ टेलीमेडिसिन की बात नहीं बल्कि मरीज और चिकित्सक के बीच के फासले, शासन और जनता के बीच की खाई को कम किए जाने का माध्यम सरकार आईटी को बना रही है। जनता और शासन के बीच कोई दूरी ना रहे यह सरकार का प्रयास है। उपरोक्त बातें मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कही। श्री दास बुधवार को पिठोरिया में आयोजित झारखण्ड राज्य के 100 चयनित स्वास्थ्य केन्द्रों में अपोलो हॉस्पिटल इंटरप्राइजेज लिमिटेड के सहयोग से टेलीमेडिसिन सेन्टर (डिजिटल डिस्पेंसरी) व एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। एक ही दिन में 3 मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन​  :    मुख्यमंत्री ने कहा कि 67 साल की आजादी में राज्य में मात्र 3 मेडिकल कॉलेज ही बन पाए थे। वर्तमान सरकार ने अपने 4 साल के कार्यकाल में 3 नए(पलामू, हजारीबाग, दुमका) मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया, जिसका उद्घटान प्रधानमंत्री द्वारा किया गया। केंद्र और राज्य सरकार गरीब परिवार के लिए चिंतित है, इसका प्रमाण है 2 दिन पूर्व प्रधानमंत्री ने आयुष्मान भारत योजना के लाभुकों से रांची में मिले और उनसे योजना से संबंधित जानकारी ली। सरकार का प्रयास है की हर गरीब को स्वास्थ्य सुविधा मिले। उसी निमित्त राज्य के 68 लाख परिवारों में से 57 लाख परिवार को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा गया। सरकार इसके लिए 400 करोड़ की अतिरिक्त राशि खर्च कर रही है, ताकि गरीबों का इलाज सुनिश्चित हो सके। ​​ अब हाईवे में भी मिलेगी एम्बुलेंस सेवा​  :    मुख्यमंत्री ने बताया कि 4 साल के शासनकाल में बीमार लोगों को निर्धारित समय में एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। तय समय पर एंबुलेंस पहुंचता है, जिसमें आपातकालीन उपचार की सुविधा युक्त होती है और मरीज को अस्पताल तक पहुंचाया जाता है। वर्तमान में 299 एंबुलेंस का संचालन हो रहा है। 30 और नए एंबुलेंस जल्द मरीजों को अपनी सेवा देंगे। राज्य के मुख्य राष्ट्रीय राज्य मार्ग को भी एंबुलेंस सेवा से आच्छादित किया जाएगा जो पुलिस से टैग भी होगा ताकि पुलिस को भी घटना की जानकारी मिल सके। एंबुलेंस सेवा सही मायने में कार्य कर रहा है या नहीं इसकी जांच मैं समय-समय पर करता रहता हूं लेकिन अभी तक की जांच में उसकी सेवा संतोषप्रद रही है। ​​ अज्ञानता और अशिक्षा के कारण एनीमिया, 6 जिला में नियुक्त हैं पोषण सखी​  :   मुख्यमंत्री ने कहा कि अज्ञानता व अशिक्षा के कारण एनीमिया का प्रकोप राज्य में है। झारखण्ड की बच्चियां और महिलाएं इससे ग्रसित हैं। एनीमिया को दूर भगाने के लिए हमें घरेलू उपचार की ओर जाना होगा। हमें जागरूक होना होगा। झारखण्ड में विभिन्न तरह के साग होते हैं सहजन के पेड़ पूरे राज्य में फैले हैं। यह घर- घर उपलब्ध है, इसका उपयोग एनीमिया से ग्रसित लोग करें। जनजाति परिवार को विशेष ध्यान देने की जरूरत है ताकि एनीमिया को दूर भगाए जा सके। सिर्फ सरकार यह कार्य नहीं कर सकती राज्य के सभी लोगों को इसमें सहयोग प्रदान करना होगा। तभी हम सुखी झारखंड और स्वस्थ झारखंड का निर्माण कर सकेंगे क्योंकि सुख का संबंध स्वास्थ्य से भी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि एनीमिया को दूर भगाने के उद्देश्य से राज्य के 6 जिलों में पोषण सखी नियुक्त किया गया है। यह एक अनुवांशिक बीमारी है। जो जनजाति क्षेत्रों में ज्यादा देखने को मिलती है। एक सिकल सेल एनीमिया व दूसरा एनीमिया। हमें इन दोनों को दूर भगाना है और एक हेल्थी गांव बनाना है। ​​ 4 साल में शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमी आई​  :    मुख्यमंत्री ने कहा कि 4 साल के दौरान शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमी आई है। यह यूनिसेफ और स्वास्थ्य विभाग की देन है। उनके अथक प्रयास से यह सफल हुआ। राज्य में जन्म लेने वाला बच्चा, झारखंड का भविष्य स्वस्थ हो इसके लिए 2019-20 की बजट में शिशु किट देने का प्रावधान किया गया है। इस कीट में कपड़े और बच्चे से संबंधित आवश्यक सामान अप्रैल 2019 से दिए जाएंगे। बच्चों को स्वस्थ रखने की सलाह सहिया बहने देंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल विवाह भी राज्य की एक समस्या है। इसे रोकने के लिए मुख्यमंत्री सुकन्या योजना लागू की गई है, जिसके तहत आर्थिक सामाजिक सर्वेक्षण व अंत्योदय के तहत और अनाथ बच्चियों को योजना का लाभ मिलेगा। राज्य सरकार बच्चियों की शिक्षा हेतु 40 हजार और उनकी शादी हेतु 30 हजार रुपये खर्च करेगी। इसका दूसरा पहलू यह भी है कि बच्चियां शिक्षा से आच्छादित हों। अभिभावक गण भी अपनी बच्चियों का रजिस्ट्रेशन स्कूल या आंगनबाड़ी केंद्र में कराएं ताकि इस योजना का लाभ उन्हें मिल सके। ​​ जागरूकता बीमारी से बचाव​  :   सांसद श्री रामटहल चौधरी ने कहा कि लोगों को परेशानी से अब मुक्ति मिलेगी। इसका लाभ सुदूरवर्ती गांव के लोगों को लाभ होगा। केंद में मानव संसाधन हमेशा उपलब्ध हो यह सुनिश्चित करना होगा। झारखण्ड में उगने वाले साग और सब्जी को उपयोग स्वास्थ्य लाभ हेतु करें। जैविक खेती की ओर राज्य अग्रसर हो। लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हों तो बीमारी हमें छू भी नहीं सकेगी। ​​ लोगों को स्वस्थ रखना सरकार का उद्देश्य​  :    कांके विधायक डॉ जीतुचरण राम ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य राज्य के लोगों स्वस्थ रखना है क्योंकि लोग स्वस्थ होंगे तो राज्य स्वास्थ्य होगा। पिठोरिया से टेली मेडिसिन सेंटर का उद्घाटन हुआ यह हमारे लिए गर्व की बात है। अब इस सेंटर से गरीब लोग स्वास्थ्य लाभ ले सकेंगे। लोगों को हैदराबाद के विशेष चिकित्सकों के माध्यम से अपनी परेशानी बता समस्या का निदान कर सकेंगे। ​​ क्या है डिजिटल डिस्पेंसरी​  :    चिकित्सकों की कमी के मद्देनजर सुदूरवर्ती गांव में निवास करने वाले ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा उनके प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध कराना इस योजना का उद्देश्य है, जिसके तहत स्वास्थ्य केंद्र में नर्स और पारा मेडीकल स्टाफ रहेंगे। यहां शरीर के विकार से संबंधित जांच की सुविधा रहेगी। किसी तरह की गंभीर समस्या होने पर टेलीमेडिसिन के माध्यम से PHC में मौजूद नर्स और पारा मेडिकल स्टाफ वरीय चिकित्सकों से सलाह लेकर उनका इलाज सुनिश्चित करेंगे। यह पूरी तरह से निःशुल्क होगी। मरीज टेली मेडिसिन सुविधा के माध्यम से हैदराबाद के चिकित्सकों से रूबरू हो अपनी समस्या साझा कर स्वास्थ्य लाभ ले सकते हैं। ​​ संथालवासियों को सबसे अधिक 33 टेली मेडिसीन की सुविधा​  :   टेली मेडिसिन की सुविधा हेतु राज्य के 100 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में से 33 टेली मेडिसिन की सुविधा संथालवासियों को मिला है। अब संथाल परगना के लोग IT क्रांति के जरिये स्वास्थ्य लाभ ले सकेंगे। राज्य सरकार ने प्रथम चरण में 100 PHC के इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है। प्रथम चरण में राज्य के 16 जिला का चयन किया गया है। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रथामिक स्वास्थ्य केंद्र पिठोरिया का निरीक्षण किया, स्वास्थ्य केंद से जुड़े लोगों से रूबरू हुए। साथ ही साहेबगंज के कितलपोखर PHC की चंदा कुमारी ने मुख्यमंत्री को टेली मेडिसिन डिस्पेंसरी से दी जा रही सुविधा की जानकारी दी। इस अवसर पर सांसद श्री रामटहल चौधरी, स्वास्थ्य सचिव श्री नितिन मदन कुलकर्णी,  एनएचएम के अभियान निदेशक श्री कृपानंद झा, उपायुक्त रांची, एसडीओ रांची, मुखिया पिठोरिया पंचायत, सहिया, एएनएम और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।



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