Monday, December 16th, 2019

हज़ारो करोड़ रुपये का जैविक कृषि उत्पादों का बाजार

आई एन वी सी न्यूज़  
ग्रेटर नोएडा/नई दिल्ली, 

 
धूम्रपान छोड़ने की कोशिश में जुटे लोगों के लिए तंबाकू मुक्त जैविक सिगरेट धूम्रपान की सुरक्षित और अधिक सेहमतंद विकल्प हैं। पवित्र तुलसी, चाय के पौधे (कैमेलिया साइनेंसिस), गुलाब की पंखुड़ियों, पुदीने की पत्तियों को मिलाकर वर्जिन पेपर में रोल कर और रुई का फिल्टर लगाकर बनाई गईं तंबाकू एवं निकोटिन मुक्त जैविक सिगरेट बायोफैच इंडिया के तीसरे और आखिरी दिन प्रमुख आकर्षण रहीं। बायोफैच इंडिया भारत के जैविक कृषि एवं जैविक खाद्य क्षेत्र का सबसे बड़ा कार्यक्रम है, जिसे नर्नबर्ग मेसे इंडिया तथा भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के अधीन कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने यहां ग्रेटर नोएडा में संयुक्त रूप से आयोजित किया था।

अपने दो भाइयों गौरव और नितिन के साथ मिलकर ऑर्गनिक स्मोक्स शुरू करने वाले श्री पीयूष छाबड़ा ने बताया, “ऑर्गनिक स्मोक्स चाय के पौधे कैमेलिया साइनेंसिस से बनी हैं और 100 प्रतिशत हर्बल हैं। इसमें कैमेलिया साइनेंसिस के साथ तुलसी पड़ी है तथा किसी तरह का तंबाकू या निकोटिन नहीं है। इसमें टार आउट फिल्टर है, जिससे धूम्रपान भी सेहत भरा हो जाता है और धूम्रपान करने से तनाव, जेट लैग, सर्दी और निकोटिन की तलब से मुक्ति मिलती है तथा मन भी अच्छा होता है।”

किसी समय स्वयं भी बहुत अधिक धूम्रपान करने वाले छाबड़ा का दावा है, “ऑर्गनिक स्मोक्स को प्राकृतिक कागज में ढेर सारी सामग्री मिलाकर बनाया गया है, जिसमें जैविक तरीके से उगाए गए गुलाब की पंखुड़ियां और पुदीने की पत्तियां हैं, जिन्हें कागज में लपेटा जाता है और एक छोर पर रुई का फिल्टर तथा टार छोड़ने वाला माउथपीस लगाया जाता है। इस हानिमुक्त मिश्रण के कारण धूम्रपान करने वाले को आम सिगरेट जैसी राहत मिलती है मगर सेहत को किसी तरह का खतरा नहीं होता। इससे तनाव दूर होता है, जेट लैग दूर करने में मदद मिलती है और सर्दी-जुकाम से भी बचाव होता है।”

एफडीए से प्रमाणित यह निकोटिन मुक्त फॉर्म्यूला तीन फ्लेवर - मेंथॉल, माइल्ड और रेग्युलर में मिलता है और 10 जैविक सिगरेट के पैक की कीमत 100 रुपये से 300 रुपये होती है। इन सेहतमंद और सुरक्षित सिगरेटों का निर्यात दूसरे देशों को करने की भी कंपनी की योजना है।

जैविक मेले में बांस से बने लकड़ी के टूथब्रश, पुनः इस्तेमाल योग्य स्ट्रॉ और रेडी टु ईट हेल्थ फूड भी आकर्षण का केंद्र थे।

एपीडा के चेयरमैन श्री पवन के बड़ठाकुर ने कहा, “व्यापार मेला-प्रदर्शनी बायोफैच 2019 में भारत तथा विदेश के निर्यातकों, प्रसंस्करणकर्ताओं, रिटेल चेन उद्योग, प्रमाणन संस्थाओं एवं उत्पादकों समेत 6000 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने चाय, मसाले, शहद, बासमती चावल, कॉफी, अनाज, मेवे, सब्जी, प्रसंस्कृत खाद्य एवं औषधीय पौधों समेत विभिन्न भारतीय जैविक उत्पादों पर चर्चा की और उनका प्रत्यक्ष अनुभव किया।”

उन्होंने कहा, “उद्योग का अनुमान है कि भारत में लगभग 8,500 करोड़ रुपये के जैविक कृषि उत्पादों का बाजार है। इसमें से 5,150 करोड़ रुपये यानी लगभग 60 फीसदी बाजार निर्यात का 2,500 करोड़ रुपये का बाजार देश में होने का अनुमान है। तकरीबन 97 अरब डॉलर के अंतरराष्ट्रीय व्यापार की तुलना में भारत का बाजार बहुत छोटा लगता है, लेकिन बहुत तेजी से बढ़ रहा है।

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