Tuesday, July 7th, 2020

होती है आज भगवान विष्णु के चौथे अवतार की पूजा

हिंदू धर्म में व्रत त्योहार को बहुत ही खास माना जाता हैं वही वैशाख माह के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी तिथि को नृसिंह चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता हैं धर्म ग्रंथों के मुताबिक इसी तिथि पर भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया था। ये भगवान श्री विष्णु के दस प्रमुख अवतारों में चौथा माना जाता हैं इस बार यह पर्व 6 मई यानी की आज देशभर में मनाया जाएगा। इस दिन भगवान नृसिंह को प्रसन्न करने के लिए व्रत उपवास किया जाता हैं और पूजा भी होती हैं तो आज हम आपको नृसिंह जयंती से जुड़ी जानकारी प्रदान करने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं।भगवान नृसिंह की पूजा आराधना में चंदन का प्रयोग खासतौर से किया जाता हैं ये भगवान श्री हरि विष्णु का रौद्र रूप का अवतार हैं इसलिए इनके क्रोध को कम करने के लिए चंदन का लेप लगाया जाता हैं चंदन ठंडक पहुंचाता हैं इसलिए इसका उपयोग पूजा में विशेष रूप से किया जाता हैं।वही दैत्यों का राजा हिरण्यकशिपु स्वयं को भगवान से भी अधिक बलवान मानता था। उसे मनुष्य देवता, पक्षी, पशु न दिन में न रात में न धरती पर न आकाश में, न अस्त्र से न शस्त्र से मरने का वरदान प्राप्त था। उसके राज्य में जो भी भगवान श्री विष्णु की आराधना करता था। उसको दंड दिया जाता था।

उसके पुत्र का नाम प्रह्लाद था।
 प्रह्लाद बचपन से ही विष्णु जी का परम भक्त था। यह बात जब हिरण्यकशिपु को पता चली तो पहले उसने प्रह्लाद को समझाने का प्रयास किया। जब वह नहीं माना तो राज ने उसे मृत्युदंड दे दिया।मगर हर बार विश्णु के चमत्कार से वह बच जाता। हिरण्यकशिपु की बहन होलिका, जिसे आग से न जलने का वरदान मिला था। वह प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ गई तब भी भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद बच गया और होलिका जल गई हिरण्यकशिपु खुद प्रह्लाद को मारने ही वाला था। तब भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर खंबे से प्रकट हुए और उन्होंने अपने नाखूनों से हिरण्यकशिपु का वध कर दिया। plc.

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