Tuesday, May 26th, 2020

हाईकोर्ट के फैसले का है स्वागत

लखनऊ । प्रदेष के प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के साथ ही बहुजन समाज पार्टी व कांग्रेस ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले का सोमवार को स्वागत किया, जिसमें दिसंबर में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शन के आरोपियों के पोस्टर तत्काल हटाने का आदेश लखनऊ प्रशासन को दिया गया है।
अपनी प्रतिक्रिया में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार ना तो नागरिकों को प्रदत्त निजता के अधिकार की जानकारी रखती है और ना ही उसका संविधान के प्रति सम्मान है। राज्य की जनता इस सरकार से उब चुकी है। हम उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं। वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी फैसले का स्वागत किया। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले की सराहना करते हुए ट्वीट किया है। बसपा नेत्री मायावती ने लिखा कि लखनऊ में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में आंदोलन में हिंसा के मामले में आरोपियों के खिलाफ सड़क व चैराहों पर लगे बड़े-बड़े सरकारी होर्डिग्स व पोस्टर्स को माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान लेकर, उन्हें तत्काल हटाये जाने के आज दिये गये फैसले का बीएसपी स्वागत करती है। जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे उत्तर प्रदेश सरकार के संविधान विरोधी चेहरे का पर्दाफाश हो गया है।
उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति गोविन्द माथुर और न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की पीठ ने लखनऊ के जिलाधिकारी एवं पुलिस आयुक्त को इस संबंध में 16 मार्च तक रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इस बीच फैसले का स्वागत करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सदफ जाफर ने कहा कि फैसला स्वागत योग्य है क्योंकि यह देश के संविधान और न्याय पालिका में हमारी आस्था को मजबूत करता है। पोस्टरों में सदफ के अलावा पूर्व आईपीएस अधिकारी एस आर दारापुरी का नाम भी है। दारापुरी ने बताया कि इस फैसले से साबित हो गया कि उत्तर प्रदेश में कानून का राज ही चलेगा ना कि योगी आदित्यनाथ सरकार की अराजकता।

Comments

CAPTCHA code

Users Comment